Saturday, March 16, 2019

पाकिस्तान ने करतारपुर गलियारे की जमीन हड़पी, मंत्री रशीद ने कहा- खालिस्तान स्टेशन हो इसका नाम

करतारपुर कॉरिडोर का नाम  हो खालिस्तान स्टेशन पाक मंत्री ने  कहा , पाक की नीयत साफ नहीं है , अटक सकती है परियोजना ,बीते गुरुवार को गलियारे को बनाने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच अटारी सीमा पर भारत के क्षेत्र में बैठक हुई। भारत ने बैठक के दौरान रोजाना 5000 तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने देने की मांग की थी। इसके बाद पाकिस्‍तान की तरफ से आए एक बयान में कहा गया कि पाक अब प्रस्तावित गलियारा सुविधा पर कई बंदिशें लगाने का प्रयास कर रहा है, जिनमें तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित कर रोजाना 500 करना, यात्रियों को पैदल यात्रा नहीं करने देना, विशेष परमिट जारी करना आदि शामिल हैं। बैठक में हिस्सा लेने वाले एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी। झूठे वादे और ऊंचे दावे करने, जबकि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं करने की अपनी पुरानी छवि पर पड़ोसी मुल्क खरा उतरा है। करतारपुर साहिब गलियारे पर उसका दोहरा कमेटी मापदंड गुरुवार को पहली बैठक में ही बेनकाब हो गया। अधिकारी ने कहा कि जिस जमीन पर अतिक्रमण किया गया है, वह महाराजा रणजीत सिंह और अन्य श्रद्धालुओं ने करतारपुर साहिब को दान में दी थी। भारत में सिख श्रद्धालुओं की भावनाओं की कद्र करते हुए इस जमीन को तुरंत प्रभाव से गुरुद्वारे को लौटाए जाने की मांग की गई है।
इन मांगों से मुकरा पाक
  • भारत ने करतारपुर कॉरिडोर पर हुई पहली बैठक में पाक को प्रस्ताव दिया था कि एक दिन में 5000 श्रद्धालुओं को दर्शन की इजाजत दी जाए। साथ ही गुरुपर्व और बैसाखी जैसे कुछ खास मौकों पर 15000 लोगों को बिना वीजा दर्शन का मौका दें। हालांकि, पाक ने इस मांग को ठुकरा दिया। 
  • इसके अलावा भारत ने मांग की थी कि देश और विदेश से हर दिन हजारों लोग करतारपुर पहुंचेंगे। ऐसे में सभी भारतीय और भारतीय मूल (ओसीआई कार्डधारक) के लोगों की एंट्री भी मान्य की जाए। इस पर भी पाक ने सहमति नहीं जताई। 
  • भारत ने पाकिस्तान से कहा था कि एक परिवार या फिर समूह में जाने वाले चाहे जितने हों उन्हें करतारपुर के दर्शन के लिए पाकिस्तान जाने की इजाजत दें। हालांकि, पाक ने इस मांग को यह कहकर टाल दिया कि 15 श्रद्धालुओं का समूह ही एक बार मे भारत से दर्शन करने जा सकता है।


पाकिस्तान ने करतारपुर गलियारे की जमीन हड़पी, मंत्री रशीद ने कहा- खालिस्तान स्टेशन हो इसका नाम

डेरा बाबा नानक (गुरदासपुर). करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान की तरफ से बेहद चौंकाने वाला रवैया सामने आया है। एक तरफ पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख रशीद अहमद ने विवादित बयान दिया है कि करतारपुर कॉरिडोर में सिख तीर्थयात्रियों के लिए बनाए जाने वाले ट्रेन स्टेशन का नाम 'खालिस्तान स्टेशन' रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर जानकारी यह भी मिल रही है कि पाकिस्तान ने इस इलाके में जमीन पर अतिक्रमण कर लिया है। इसकी पुष्टि बीते दिनों अटारी बॉर्डर पर हुई दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक में शामिल रहे एक भारतविवादित बयान से बिगड़ सकते रिश्ते

Monday, May 14, 2018

प्रेस संघर्ष जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन के 5 वां वार्षिक फाउंडेशन डे संगरूर जिले में मनाया गया


Rakesh Punj is with Press Sangarsh 
21 hrs
प्रेस संघर्ष जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन के 5 वां वार्षिक फाउंडेशन डे संगरूर जिले में मनाया गया। एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. राकेश पुंज और राष्ट्रीय प्रेसिडेंट संजीव पुंज ने चीफ गेस्ट के तौर पर शिरकत की। पंजाब के कई विधायक, भूतपूर्व विधायक तथा भूतपूर्व सांसद, एसएसपी संगरूर सहित पंजाब की ही कई गणमान्य हस्तियों सहित कई अन्य प्रदेशों से पत्रकार साथियों व कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। जिनमे मुख्यतौर पर एक्स एम पी एडवोकेट स राजदेव सिंह खालसा , सेहजधारि पार्टी सुप्रीमो डॉ परमजीत सिंह रानू, बीबी सुरिंदर कौर वालिया , मोहिन्दरपाल भोला, फरजंद एम एल ए सुरजीत सिंह धीमान , एम एल ऐ हरपाल सिंह चीमा , देश सेवक समाचार पत्र के मुख्य संपादक मदनदीप सिंह , आज न्यूज़ के एम डी ध्रुव सिंह , स्टैण्डर्ड कारपोरेशन से एम डी स नछत्र सिंह , जोश ट्रेक्टर के एम डी स दर्शन सिंह पनेसर, आल इंडिया राजीव गांधी मंच के चेयरमैन सुरिंदर कंबोज ,वयापार मंडल बरनाला से अनिल बंसल नाना शामिल हुए।इस अवसर पर बोलते हुए स राजदेव सिंह खालसा ने कहा के पतरकर्ता एक दर्पण है जिससे समाज  अच्छाई और बुराई को मीडिया अपने तरीके से दिखाता  है स राजदेव सिंह खालसा ने पतरकारिता में आ रही गिरावट पर भी चिन्ता  व्यक्त की  ,स खालसा ने मंदिर कांड का उदारहण भी दिया।   सेहजधारि सिख पार्टी सुप्रीमो डॉ परमजीत सिंह रानू ने कहा के पतरकर्ता लोक तंत्र की ताकत है जिसने पूरी दुनिया को बदल दिया है उन्होंने कहा के पतरकार को खबर छापने से पहले उसके सारे पक्षों की अच्छी तरह जाँच क्र लेनी चाहिए ता जो समाज के सहमने असली सच्चाई आ सके। देश सेवक के एडिटर इन चीफ मदनदीप सिंह ने कहा के गंभीर पतरकर्ता की कमी एक बहुत बड़ी चिन्ता का विषय है ,इससे लोकतंत्र के दूसरे सतम्भ भी प्रभावित होते है इस पर जयादा तवज्जो देने की जरुरत है स्टैण्डर्ड कारपोरेशन से एम डी स नछत्र सिंह ने सम्बोधन करते हुए कहा के मीडिया हाउसों को भी  पतरकारो के हक्को की राखी के लिए आगे आना चाहिए , ,प्रेस संघर्ष जोउर्नलिस्ट एसोसिएशन के नेशनल प्रेजिडेंट संजीव पुंज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा के ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया जरूरी बन चुका है, इसके बिना गुजारा भी नहीं है। लेकिन आज के समय में इसका जमकर मिसयूज हो रहा है। सोशल मीडिया का यूज हमें सा‌वधानी पूर्वक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देखने में आता है कि कई बार एक ग्रुप में एक फेक मैसेज को डाल दिया जाता है, जिसे जमकर आगे बिना कुछ सोचे समझे आगे फावर्ड कर दिया जाता है। लोगों के इसके बारे में पता ही नहीं होता। उन्होंने कहा कि मैसेज को आगे फावर्ड करने से पहले हमें उस मैसेज की तय तक जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सोशल मीडिया का ठीक यूज हो तो इसका बहुत फायदा है जबकि मिसयूज होने पर कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती है। वही प्रेस संघर्ष जोउर्नलिस्ट एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ राकेश पुंज  ने कहा  कि सोशल मीडिया का अगर सही ढंग से यूज हो तो जानकारी बढ़ाने का इससे बढ़िया कोई भी प्लेटफार्म नहीं है।उन्होंने कहा के पतरकर्ता से ही हमेशा रेवुलेशन आता है पतरकारिता से ही देश में आजादी आयी है पतरकारो की आजादी में निभाई गयी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता ,डॉ राकेश पुंज ने सर्कार से मांग करते हुए कहा के पतरकार समुदाय अपनी जान जोखिम में डाल कर   अपना कर्त्तव्य निभाता है  पतरकारो की सुरक्षा का सर्कार विशेष प्रावधान करे पिशले दो वर्षो में ही करीब २५६ पतरकार अपनी ड्यूटी करते हुए माफिया के हाथो शहीद हो चुके है ,डॉ राकेश पुंज ने  प्रेस संघर्ष जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन की तरफ से  आये हुए सभी मेहमानों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा के प्रेस संघर्ष जोउर्नलिस्ट एसोसिएशन  सभी का 






























दिल की गहराईयो से धन्यवाद करती है के उन्होंने अपना कीमती समय निकाल कर हमारी वर्षगाँठ के उत्सव को चार चांद लगाए है ।
प्रैस संघर्ष जर्नलिस्ट ऐसो रजि भारत के उन सभी मैंबर पर हमें गर्व है जो यूनियन के प्रति हमेशा समर्पित है प्रैस संघर्ष की 5वी वर्षगाँठ के सालाना समागम को हर्षोउल्लास से संगरूर में मनाकर आपसी एकता का जो प्रमाण दिया है उसके के लिए सभी पत्रकार बन्दुओ प्रेस संघर्ष जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभी मेंबर्स विशेषकर नेशनल प्रेजिडेंट संजीव पुंज , हरीयाणा स्टेट प्रेसिडेंट अभिनव शर्मा, जिला हिसार प्रेसिडेंट संदीप ढांडा, वाईस प्रेसिडेंट अशोक शर्मा, बलदेव खट्टर व लहरा गागा से राकेश सिंगला,यू पी टीम, कुलवंत खटरा ,गुरमीत सिंह थूहि , अमृतसर से हर्ष पुंज ,राजेश कौंडल ,दीपक जिंदल , मोगा से जोगिंदर गिल , सुनाम से नरेश छारीय, सुरिंदर शेरों , संजीव काली ,बरनाला से बलजिंदर सिंह चौहान और उनकी टीम , प्रोग्राम के होस्ट संगरूर के जिला अध्यक्ष एस एस बावा और संगरूर टीम को बहुत बहुत बधाई हो। संगरूर जिला प्रेसिडेंट एस. एस. बावा व उनकी टीम ने इस कार्यक्रम की तैयारी में कोई कसर नही छोड़ रखी व कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर उसे पूर्ण रूप से सफल बनाया। एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. राकेश पुंज व राष्ट्रीय प्रेसिडेंट संजीव पुंज ने सराहना करते हुए कहा कि एसोसिएशन के संगरूर जिला प्रेसिडेंट एस. एस. बावा व उनकी टीम के द्वारा करवाया गया यह कार्यक्रम काबिले तारीफ है और इस कार्यक्रम की सफलता के बाद एसोसिएशन का कद और भी बढ़ गया है। प्रेस संघर्ष जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन अपने सभी सहयोगियों का दिल की गहराईयो से शुक्रगुजार है और कामना करती है के प्रेस संघर्ष जॉर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभी मेम्बेर्स हमेशा ऐसे ही उत्साह से संगठन को मजबूत बनाने में सहयोग देते रहेंगे

Monday, April 16, 2018

फिल्म सिंघम का पंजाबी वर्जन बनाने जा रहे थे सिंगर परमीश

फिल्म सिंघम का पंजाबी वर्जन बनाने जा रहे थे सिंगर परमीश, गैंगस्टर ने मांगे थे 25 लाख

पंजाबी सिंगर परमीश वर्मा पर फिरौती न देने के कारण ही कातिलाना हमला हुआ।

  • फिल्म सिंघम का पंजाबी वर्जन बनाने जा रहे थे सिंगर परमीश, गैंगस्टर ने मांगे थे 25 लाख
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    परमीश अौर चाहल की हालत खतरे से बाहर, अभी डिस्चार्ज नहीं।
    मोहाली. पंजाबी सिंगर, डॉयरेक्टर और एक्टर परमीश वर्मा पर शुक्रवार देर रात गोली चलाने वाले गैंगस्टर दलप्रीत सिंह के दो साथी को मोहाली पुलिस ने पकड़ लिया है। उनमें से एक की पहचान बद्दी के गांव भुल्लरवालां के रहने वाला हरविंदर सिंह हैप्पी और दूसरे को अमृतसर पुलिस ने पकड़ा है जिसकी पहचान भूपिंदर सिंह उर्फ भिंदा व डॉन के रुप में हुई है। वहीं सामने आ रहा है कि गैंगस्टर वाले परमीश वर्मा से 25 लाख रुपए मांग रहे थे। सूत्रों के अनुसार परमीश ने इसकी जानकारी पुलिस को भी दी हुई थी। पुलिस की ओर से कहा गया था कि इसमें संपत नेहरा गैंग हो सकता है। वहीं अमृतसर पुलिस ने भिंदा के पकड़ने की सूचना मोहाली पुलिस को दे दी है। इसको अब मोहाली पुलिस यहां पर लेकर आ रही है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपी हरविंदर सिंह हैप्पी को कोर्ट में पेशकर पांच दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया है और उससे सीआईए में पूछताछ की जा रही है
    परमीश वर्मा अजय देवगन की सुपरहिट फिल्म सिंघम का सीक्वेंस पंजाबी में बनाने जा रहे थे। इस बारे में उनका करार हो चुका है और फिल्म को प्रोड्यूस अजय देवगन ने ही करना था। जबकि, फिल्म में परमीश लीड रोल करने जा रहे थे। इस फिल्म के बारे में खबरें सोशल मीडिया में जब वायरल हुई तो फिल्म का हिट होना लगभग तय माना जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक उसके बाद से परमीश वर्मा को लगातार फिरौती के लिए धमकियां मिल रही थी। उससे गैंग 25 लाख की फिरौती मांग रहे थे।
    सूत्रों की मानें तो एक बड़े पुलिस अधिकारी को वारदात से कई दिन पहले ही परमीश ने इसकी जानकारी दी थी। तब उसे कहा गया था कि यह संपत नेहरा गैंग हो सकता है। उन्हें जल्द पकड़ लिया जाएगा। जबकि ऐसा नहीं हुआ और फिरौती न मिलने के कारण ही परमीश पर हमला हुआ। आरोपियों ने जानबूझकर परमीश के पैर पर हिट किया, ताकि बाकी सिंगरों में भी डर पैदा किया जाए। सिर्फ परमीश ही नहीं, परमीश के साथ ही अपना करियर शुरू कर हिट हाेने वाले पंजाबी सिंगर को भी लगातार फिराैती के लिए धमकियां मिल रही हैं। अंदेशा लगाया जा रहा है कि इस हमले के बाद से पंजाबी फिल्म एंड म्यूजिक इंडस्ट्री में फिरौती देने का सिलसिला शुरू हो सकता है।
    फोर्टिस अस्पताल में इलाज करा रहे परमीश और उसका दोस्त कुलवंत सिंह चहल की हालत में सुधार है। गोली से हुए हमले के बाद परमीश और चाहल का इलाज रविवार को अस्पताल में चला। दोनों की हालत को लेकर फोर्टिस की ओर से बताया गया है कि दोनों अब ठीक हैं और खाना भी खा रहे हैं। परमीश का दोस्त सत्ता उसके साथ है और परमीश के खाने पीने का ध्यान भी रख रहा है। उधर रविवार को भी अस्पताल में उनका हाल जानने के लिए बाहर फैन खड़े थे और अंदर पंजाबी सिंगर व कलाकारों का तांता लगा हुआ था।
    करनाल से 15 दिनों पहले लूटी गई थी क्रेटा
    पुलिस सूत्रों की मानें तो सामने आ रहा है कि जिस गाड़ी में गैंगस्टर दलप्रीत सिंह अपने पांच अन्य गैंगस्टरों के साथ परमीश पर हमला करने आया था वह क्रेटा गाड़ी करनाल से लूटी हुई हो सकती है। क्योंकि करीब 15 दिनों पहले करनाल के पास से गन पॉइंट पर एक सफेद रंग की क्रेटा गाड़ी लूटी गई थी। अब इस मामले में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
    अगले दिन भी पुलिस ने मौका-ए-वारदात से बरामद किए खोल
    परमीश पर हुए हमले के बाद पुलिस बार-बार उस मौका-ए-वारदात की जायजा ले रही है। रविवार को पुलिस को मौका-ए-वारदात से सर्च करते हुए एक बोर .315 पिस्टल का खोल बरामद किया है। घटनास्थल के पास रहने वाले लोगों की मानें तो घटना वाली रात को एक के बाद एक कई गोलियां चलने की आवाज सुनी गई थी।
    दाहा के नजदीकियों पर कस रहे पकड़
    अमृतसर पुलिस ने दिलप्रीत सिंह दाहा के खासमखास भूपिंदर सिंह उर्फ भिंदा डोन को करीब तीन दिन पहले एक कत्ल केस में गिरफ्तार किया था। दिलप्रीत व भिंदा ने मिलकर अमृतसर में एक कत्ल किया था। इसी केस में अमृतसर पुलिस ने भिंदा को गिरफ्तार किया हुआ है। जो वहां पर रिमांड पर है। अब भिंदा से परमीश पर हमले को लेकर भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस दाहा के नजदीकियों पर शिकंजा कस के दाहा तक पहुंचने की कोशिश की रही है।
    चंद दिनों पहले भी चंडीगढ़ में थे गैंगस्टर...
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चंद दिनों पहले गैंगस्टर दलप्रीत सिंह धाहा व संपत नेहरा की चंडीगढ़ आने की गुप्त सूचना पुलिस को मिली थी। इसको लेकर चंडीगढ़ के साथ-साथ मोहाली में हाईअलर्ट रहा था और पुलिस ने नाकाबंदी की थी। मोहाली पुलिस ने तो पूरे शहर को सील कर जहां नाकों पर बैरिकेडिंग की हुई थी वहीं पुराने टॉयरों से दीवार बनाई हुई थी। लेकिन गैंगस्टर मोहाली पुलिस के हाथ नहीं आ सके थे। चंडीगढ़ पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि उस दिन गैंगस्टर की लोकेशन सेक्टर-38 में कुछ समय के लिए आई थी।

Friday, July 28, 2017

दहेज प्रताड़ना के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन



 

नई दिल्ली। देश में हज रोज हो रहे दहेज प्रताड़ना के झूठे मुकदमों के कारण सुप्रीम कोर्ट ने अब दहेज प्रताड़ना यानि आईपीसी की धारा 498-ए के मामलों में नई गाइड लाइन जारी कर दी है। इसके तहत मामला दर्ज होने के तत्काल बाद आरोपी ससुराल पक्ष के लोगों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। गिरफ्तारी से पहले यह मामला फैमिली वेलफेयर सोसायटी में जाएगा जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। फैमिली वेलफेयर सोसायटी की रिपोर्ट के आधार पर इंवेस्टीगेशन रिपोर्ट या मजिस्ट्रेट तय करेंगे कि मामले को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना चाहिए या नहीं। इसी आधार पर गिरफ्तारी की जाएगी। इससे पहले फैमिली वेलफेयर सोसायटी यह कोशिश करेगी कि मामले में न्यायालय में पहुंचने से पहले ही राजीनामा हो जाए। 

मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के PS नवनीत कोठारी IAS पर 25 हजार का जुर्माना



 

आनंद ताम्रकार/बालाघाट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के कैबिनेट मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के पीएस डॉ. नवनीत मोहन कोठारी पर मप्र राज्य सूचना आयोग ने 25 हजार रुपए का जुर्माना ठोका है। मप्र के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी आईएएस पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया हो। यह जुर्माना उनके संदर्भ में लगाई गई एक आरटीआई का जवाब ना देने पर लगाया गया है। कोठारी तत्समय बालाघाट कलेक्टर थे। 

Monday, July 3, 2017

पति के WHATSAPP पर आईं कॉलगर्ल्स की फोटो, उनमें से एक उसकी WIFE भी थी


इंदौर। यहां एक युवक के होश तब उड़ गए जब उसके दोस्त ने इंदौर की कुछ कॉलगर्ल्स की फोटो उसे वाट्सएप पर भेजी। इन फोटोग्राफ्स में एक फोटो उसकी पत्नी का भी था। युवक के दोस्त ने बताया कि भंवरकुआं इलाके में रहने वाला एक बदमाश सेक्स रैकेट चलाता है और तुम्हारी पत्नी भी उसके तलाशे ग्राहकों के पास जाती है। मामले की छानबीन के बाद जब जानकारी पुख्ता हुई तो पीड़ित पति सीधे भंवरकुआं पुलिस के पास पहुंचा और सारी कहानी बताई। भंवरकुआं पुलिस ने संतोष यादव निवासी नर्मदा नगर के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। खंडवा रोड इलाके में रहने वाला एक युवक अपने साथ 20-25 लोगों को लेकर बुधवार रात को भंवरकुआं थाने पहुंचा। उसके साथ संतोष भी था। युवक ने आरोप लगाया कि पकड़ाया आरोपी संतोष यादव देह व्यापार का धंधा चलाता है। उसने पत्नी को भी अपने साथ ले लिया। पत्नी के कई वीडियो और फोटो वाट्सएप पर शेयर कर चुका है।

पत्नी से पूछा तो वह विवाद करके मायके भाग गई। पति और अन्य लोगों का कहना था कि आरोपी कई दिनों से रैकेट चला रहा है। लोगों ने उसकी छानबीन की तो सबूत हाथ आए। उधर, पुलिस का कहना है कि मामला पति-पत्नी के बीच विवाद का है। युवक को आरोप लगाकर फंसा दिया गया है। हालांकि आरोपी पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। मामले की जांच की जा रही है।


अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाला गिरफ्तार

 फर्जी कॉल सेंटर के जरिए कई अमेरिकी नागरिकों को ठगने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति शराफत अली अन्य लोगों के साथ मिलकर एक फर्जी कॉल सेंटर चलाता था और वे अमेरिकी नागरिकों को ठगने के लिए खुद को माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन का कर्मचारी बताते थे।
उन्होंने कहा कि अली :33: को कल दक्षिणी कोलकाता के कराया थानांतर्गत बेकबागान रो स्थित कॉल सेंटर से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अधिकारी ने कहा, वे इंटरनेट से उनका :अमेरिकी लोगों: फोन डाटा डाउनलोड करने के बाद खुद को माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन का कर्मचारी बताकर वीओआईपी :वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल: के जरिए उन्हें फोन करते थे। अली और उसके साथी अमेरिकी लोगों से कहते थे कि उनका सिस्टम हैक हो गया है और उनके डाटा में गड़बड़ी हुई है, जिसकी जानकारी उन्हें मशीन में लगे माइक््रोसॉफ्ट सिस्टम से मिली।
ये लोग अमेरिकी नागरिकों को उनका सिस्टम ठीक करने के नाम पर मनीग्राम या वेस्टर्न यूनियन के जरिए 199 डॉलर से 300 डॉलर तक की राशि ऑनलाइन देने को विवश करते थे।
अधिकारी ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर टीम व्यूअर का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने बताया कि कॉल सेंटर पर छापे के दौरान आरोपियों के पास से सीपीयू, आई फोन, लैपटॉप और दस्तावेज जब्त किए गए।
शहर की एक अदालत ने अली को 10 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

Monday, April 24, 2017

काले जादू और दिव्य सिद्धियों के नाम पर लोगों का शोषण कर रहे कथित बाबा, कमाता था हजारों

 अमृतसर.विदेशयात्रा, कर्जा मुक्ति, वशीकरण, प्रेम विवाह, पति-पत्नी में अनबन, नौकरी, गृह क्लेश, रूठे प्रेमी प्रेमिका, मनचाही शादी, मुठकरणी, कारोबार में बाधा और जाने क्या-क्या। पिछले लंबे समय से ऐसे इश्तहार देकर कुछ कथित बाबा, मियां और काले जादू का सम्राट होने का दावा करने वाले लोगों को गुमराह करके उनका शोषण करने में लगे हैं। प्रशासन ऐसे कथित दावे करने वालों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठा रहा। लोगों की भोली-भाली मानसिकता का फायदा उठाकर ऐसे कथित तांत्रिक और बाबा हर रोज हजारों के वारे-न्यारे कर रहे हैं।
ऐसे लोगों की ओर से की जा रही कमाई पर तो कोई टैक्स है और ही इसका कोई हिसाब-किताब नजर रहा है। आए दिन अखबारों और अन्य मीडिया संसाधनों पर ऐसे लोगों का प्रचार आम है। सभी समस्याओं का हल कुछ ही घंटों में, घर बैठे ही रिजल्ट पाएं, हमारे किए जादू की कोई काट नहीं जैसे लुभावने और लोगों को गुमराह करने वाले इश्तिहार हर रोज देखने को मिलते हैं। काले इल्म के बादशाह, बंगाली जादू, कुछ ही घंटों में समाधान की गांरटी, खुला चैलेंज, गुरु, बाबा, मियां जी और कुछ इसी तरह के नाम दावों को लोगों के बीच बड़ी चतुराई से परोसा जाता है। एक बार जो इनका शिकार बन गया तो उसके शोषण का सिलसिला लंबा चलता है। एेसा नहीं कि प्रशासन और आम आदमी को इसकी खबर नहीं, लेकिन एक सरसरी नजर इन विज्ञापनों पर डाली जाती है और फिर हर कोई अपने रोजमर्रा के कामों में लग जाता है। बुद्धिजीवी वर्ग और समाजसेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसे लोग समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं जो गैर कानूनी है। संविधान में ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के प्रावधान हैं।
स्कूल-कॉलेज स्तर पर चेतना पैदा की जाए...
पूर्वस्वास्थ्य मंत्री समाजसेविका प्रो. लक्ष्मीकांता चावला का कहना है कि समाज में अपनी जड़े जमा चुके इस तरह के अंधविश्वास को मात्र कानून से खत्म ही किया जा सकता। इसके लिए स्कूल कॉलेज स्तर पर स्टूडेंट्स में चेतना पैदा की जानी चाहिए। राष्ट्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से दिखाए जा रहे सिगरेट, शराब के नुकसान वाले विज्ञापनों की तरह अंधविश्वास विरोधी विज्ञापन भी दिखाये जाने चाहिए।
लोगों के सेंटिमेंट्स का उठाते हैं फायदा...
डॉक्टरी पेशे और समाजसेवा से जुड़े अदलक्खा हॉस्पिटल के डाॅ. एएल अदलक्खा कहते हैं कि समाज में ऐसी बातें किसी भी तरह से टालरेट करने योग्य नहीं हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और उन चीजों को दिल में रखे हुए हैं जो तर्क के आधार पर किसी भी तरह से खरी नहीं उतरती। समाज में ऐसे लोग अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं और जादू टोने के नाम पर लोगों के सेंटिमेंट्स को भुनाते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
ऐसे इश्तिहार गैर-कानूनी हैं...
तर्कशील सोसायटी पंजाब के अमृतसर जिले के इंचार्ज सुमीत सिंह का कहना है कि ड्रग्स मैजिक रेमिडीज ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइज एक्ट 1954 के तहत ऐसे इश्तहार गैर-कानूनी है। टीवी चैनल पर इस तरह की एडवरटाइजमेंट केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट 1994 के तहत बैन है। देश के संविधान की धारा 51 (एएच) के तहत हर नागरिक को अधिकार है कि वह जहां कही भी ऐसे कुछ हो रहा देखे, इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए प्रशासन से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि सोसायटी मांग करती है कि महाराष्ट्र की तर्ज पर पंजाब विधानसभा में भी अंधविश्वास विरोधी कानून लाया जाए।

Thursday, September 8, 2016

चुनाव नजदीक आते ही ऑफिसर्स के बदले तेवर ,अकाली दल के जिला प्रधान ने बाइक छोड़ने को कहा, नहीं माने एसडीएम

बीतीरात शहर के केसी रोड के पास नाका लगाकर चालान काट रहे एसडीएम और अकाली दल के शहरी जिला प्रधान संजीव शौरी के बीच चालान काटने को लेकर हुई बहस इस कदर बढ़ गई की दोनों आमने-सामने हो गए। दोनों ने एक दूसरे के साथ दुर्व्यवहार करने बदतमीजी करने के आरोप लगाए। एसडीएम ने तो अकाली दल के प्रधान पर कानून हाथ में लेते ड्यूटी में विघ्न डालने का भी आरोप लगा दिया। एसडीएम ने पूरे मामले को डीसी बरनाला के पास पहुंचाया तो वहीं अकाली दल के प्रधान ने पार्टी हाइकमांड तक सारी बात पहुंचा कार्रवाई की मांग की है। दरअसल  बरनाला के एसडीएम अमनवीर सिद्धू के लंबी छुट्टी पर जाने के कारण बरनाला के एडीएम का का एडिशनल चार्ज तपा के एसडीएम राजपाल सिंह को सौंपा गया है। राजपाल सिंह ने मंगलवार को ही अपना चार्ज संभाला था की पहले ही दिन वह अकाली दल के प्रधान से उलझ पड़े। एसडीएम ने नाके पर एक बाइक को रोककर जब उसका चालान करने लगे तो ऐन मौके पर संजीव शौरी ने फोन कर एसडीएम को बाइक छोड़ने को कहा था, एसडीएम के मना करने पर मामला बढ़ गया। मंगलवार रात को कच्चा कालेज रोड पर एसडीएम राजपाल सिंह चालान काट रहे थे। उनके साथ एसएचओ सिटी दविंदर सिंह भी थे। नाके दौरान एसडीएम ने एक बाइक सवार व्यक्ति को रोककर जब उसका बाइक बंद करने लगे तो व्यक्ति ने प्रधान संजीव शौरी को फोन किया। संजीव शौरी ने एसडीएम को फोन कर बाइक छोड़ने को कहा तो एसडीएम ने प्रधान की नहीं मानी तो तैश में आए प्रधान संजीव शौरी और पार्टी के जिला उपाध्यक्ष राजीव वर्मा रिम्पी सीधा एसडीएम के पास नाके पे पहुंच गए। जहां शौरी ने दोबारा एसडीएम को बाइक छोड़ने को कहा तो एसडीएम नहीं माने। बाद में डीसी के कहने पर बाइक छोड़ दी। डीसी भुपिंदर सिंह राय ने कहा कि एसडीएम को दफ्तर बुलाकर समझा दिया है। भविष्य में ऐसी नौबत कभी नहीं आने देंगे। संजीव शौरी ने कहा कि व्यक्ति के पास कागज पूरे थे तो एसडीएम उसका जबरन चालान काट रहे थे जब उन्हें छोड़ने को कहा गया तो वह उनसे ही दुर्व्यवहार पर उतर आए। जिसकी पूरी जानकारी पार्टी हाईकमांड को दे दी है। एसडीएम राजपाल सिंह का कहना है कि वह नाका लगा ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने वालों के चालान कर रहे थे कि प्रधान संजीव शौरी उनके पास पहुंच गए और अपनी ही पार्टीबाजी का उन पर रौब झाड़ने लगे। शौरी ने कानून को हाथ में लेते उनकी ड्यूटी में बाधा भी डाली

Wednesday, September 7, 2016

किसानों का कर्ज माफ और बिजली बिल आधा करेंगे- कांग्रेस

आसान नहीं है डेल्ही से पंजाब की डगर दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है रास्ता ,विवादों में घिरती जा रही आप


अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री,दिल्ली

पंजाब में सत्ता पाने का स्वपन संजोय बैठी आम आदमी पार्टी की डेल्ही से पंजाब की राह अब आसान नहीं लग रही ! केजरीवाल के चेहरे को आगे कर के ही अब शायद पंजाब की कुर्सी पर कब्ज़ा किया जा सकता है ! केजरीवाल की आंख पंजाब के  चीफ मिनिस्टर की कुर्सी पर है ! क्यों के डेल्ही के चीफ मिनिस्टर की पावर एक म्युनिसिपल प्रेजेंट जैसे ही होती है ! इस लिए लगता है के  पंजाब को केजरीवाल हर हालात में हासिल करना चाहते है !उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल जी का अस्तीफा भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है ! कभी कभी तो लगता है के केजरीवाल खुद ही नहीं चाहते कि उनकी पार्टी के किसी नेता का कद इतना बड़ा हो जाय के वो अपने दम पर वोट ले सके !कई उदारहरण है अतीत में योगेंद्र यादव ,बिन्नी ,प्रशांत भूषण इत्यादि ! ऐसा ही पंजाब में हुआ ,स्टार प्रचारक भगवंत मान अचानक नाछेरी  बन गया ,उस के मुह से शराब की बॉस आने लगी है ,कोई बताएगा के भगवंत मान मेंबर पार्लियामेंट तो अब बना है इससे पहले क्या वो रिक्शा चलता था ? कभी व्हिस्की  या स्कोच की बास आती है क्या वो देसी ठहरा  पीता है ! सुच्चा सिंह छोटेपुर को भी छोटा कर दिया !क्या केजरीवाल साहेब ये तो नहीं चाहते के पंजाब की चीफ मिनिस्टर सुनीता केजरीवाल हो ! स्वपन देखना बुरी बात नहीं पर पहले चुनाव तो जीत लो साहेब !यह डेल्ही नहीं है पंजाब के लोग सर आँखों पर भी बड़ी जल्दी बिठाते है पर धुल चटाने ने में भी देर नहीं लगाते ! अभी तो दिल्ली में  ही आपकी पार्टी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अश्लील सीडी कांड का मामला भी शांत भी नहीं हुआ कि आपकी पार्टी के एक विधायक ने सीएम केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर 'आप' के टॉप नेताओं पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है. कर्नल देवेंद्र सेहरावत ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि 'आप' के नेता पंजाब में भी महिलाओं का शोषण कर रहे हैं. 'आप' विधायक के इस तरह के सनसनीखेज आरोपों के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी इस पार्टी के अब राह इतनी आसान नहीं दिख रही है. पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली बार किस्मत आजमा रही इस पार्टी ने जितने भी पत्ते फेंके, एक-एक कर सभी चुनाव से पहले ढेर होते जा रहे हैं. ! केजरीवाल सरकार के कैबिनेट मंत्री संदीप कुमार अश्लील सीडी कांड में फंसे. तो सीएम ने तत्काल उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त किया. पुलिस ने संदीप कुमार को तुरंत गिरफ्तार भी कर लिया लेकिन सीडी में दिख रही महिला के आरोपों के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री की मुसीबतें बढ़ गई हैं. महिला ने आरोप लगाया कि नशे की हालत में उसके साथ रेप किया गया है.बात यहीं तक नहीं रुकी. पार्टी के सीनियर नेताओं में से एक आशुतोष ने संदीप कुमार का बचाव करते हुए उनकी तुलना महात्मा गांधी और नेहरू से कर दी. इस मुद्दे पर विपक्ष ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोल दिया ! इस हालात में 'डैमेज कंट्रोल' करना केजरीवाल सरकार के लिए आसान नहीं दिखाई दे रहा है. इसी बीच, सेहरावत ने आरोप लगा दिया है कि आप के नेता पंजाब में टिकट देने या उसके वादे के एवज में महिलाओं का शोषण कर रहे हैं. सेहरावत ने आशुतोष, दिलीप पांडेय और पार्टी की पंजाब ईकाई के प्रभारी संजय सिंह का भी नाम ले लिया है.!
पंजाब के संगरूर से आम आदमी पार्टी के सांसद  भगवंत मान दुवारा संसद का वीडियो बनाए जाने के मामले ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. मान के इस वीडियो के बाद न सिर्फ विपक्ष, बल्कि 'आप' के सांसदों ने भी मोर्चा खोल दिया. मान की संसद सदस्यता खत्म किए जाने की मांग तक भी हो चुकी है !.आम आदमी पार्टी ने पिछले दिनों सुच्चा सिंह छोटेपुर को पार्टी के पंजाब संयोजक पद से हटा दिया था. पंजाब के माझा इलाके से ताल्लुक रखने वाले सुच्चा सिंह की इलाके के पार्टी नेताओं में खासी पैठ है और इलाके की कई  सीटों पर जीत-हार तय करने में वह अहम साबित हो सकते थे. ! आप' में मौजूदा संकट से निपटने के लिए अब अरविंद केजरीवाल पंजाब चुनाव में पार्टी की कमान संभालने जा रहे हैं. केजरीवाल का 'मिशन पंजाब' 8 सितंबर से शुरू हो रहा है. उन्होंने राजनीति की दुनिया में नए गुरप्रीत घुग्गी को सुच्चा सिंह की जगह पार्टी संयोजक की जिम्मेदारी दे दी है इस जुमेवारी पर घुघी और केजरीवाल कितने कामयाब होते है ये तो आने वाला समय ही बताएगा फ़िलहाल तो यही कहा जा सकता है के आसान नहीं है डेल्ही से पंजाब की डगर........  दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है रास्ता  
 
इसके अलावा मान की इमेज एक नशेड़ी के तौर पर बन गई है. 'आप' के ही बर्खास्त सांसद हिरेंद्र सिंह खालसा ने लोकसभा स्पीकर से शि‍कायत करते हुए कहा कि उनकी सदन में सीट को बदल दिया जाये क्योंकि उनकी बगल वाली सीट पर बैठने वाले भगवंत मान संसद में शराब पीकर आते हैं और उनके मुंह से शराब की बदबू आती है. नशामुक्त पंजाब का सपना दिखाने वाली आम आदमी पार्टी के लिए मान सहारा की जगह मुसीबत बन चुके हैं.
×सुच्चा ने छोड़ा साथ, सिद्धू से जुड़ सकते हैं


Tuesday, September 6, 2016

प्रदेश में स्वच्छ और ईमानदार सरकार के लिए दे भाजपा को वोट- पंकज सिंह अन्ना स्टाइल की टोपी पहनकर करने वालो की निं

भाजपा के प्रदेश महासचिव पंकज सिंह ने रेलवे रोड बजरिया स्थित गुरुसिंह सभा धर्मशाला में आयोजित एक सभा में अपील की की भ्रष्टाचार से मुक्त और सुशासन के लिए भाजपा को ही वोट दे | उन्होंने कहा की गाज़ियाबाद विधान सभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याक्षी अतुल गर्ग स्वच्छ छवि के ईमानदार व्यक्ति है | वह पूर्व मेयर डी.सी.गर्ग के पुत्र है जिनका कार्यकाल आरोप मुक्त रहा और विकास के लिया जाना जाता है | गाज़ियाबाद और प्रदेश की स्थिति आज किसी से छुपी नहीं है | सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाले इस शहर के विकास और व्यवस्था परिवर्तन के लिए भाजपा को ही वोट देने की उन्होंने अपील की |
इस मौके पर उन्होंने विपक्षी प्रत्याक्षी के समर्थको द्वारा अन्ना स्टाइल में मैं…….हूँ की टोपी पहने जाने की भी निंदा की और कहा जिन पर भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा आरोप है वही संत अन्ना की नक़ल उतार रहे है कितनी हास्यापद स्थिति है | व्यापारी नेता गुलशन माकन ने कांग्रेस, बसपा और सपा सरकारों की निंदा करते हुए भाजपा के ही पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया | व्यापारी दीपक तलवार ने कहा की क्या आप उस सरकार को सत्ता में लाना चाहेंगे जो भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे निहत्थे लोगो पर सोते समय लाठिया बरसाती है | सञ्चालन कर रहे व्यापारी प्रेम प्रकाश गर्ग ने कहा की केवल भाजपा ही बिना जातिवाद, भेदभाव के कार्य करती है | बेदाग़ छवि के प्रत्याक्षी अतुल गर्ग को ही वोट दे |

हर गरीब को मकान मिल सकते हैं … बशर्ते!


देश की जनसंख्या तेजी से साथ बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही आवास की समस्या भी एक प्रमुख समस्या के रूप में हम सभी के सामने है। बाजार में जमीन भी है और मकान भी हैं। लेकिन वास्तविकता यह भी है कि आम आबादी जिसे हम निर्धन भी कहते हैं कि आज भी स्वयं का एक कमरे या दो कमरे के मकान से वंचित है। इसका कारण यही है कि मकानों और फ़्लैटों की कीमतें आसमान छू रही है। अधिकांश बिल्डर्स जो मकान बना रहे हैं वे आम आदमी या गरीब वर्ग के लिए नहीं हैं। जिनके पास 20 लाख से अधिक की रकम हैं वे तो कोई फ़्लैट या मकान खरीद सकते हैं लेकिन आम आदमी के पास इतना धन कहां आता है? इसी प्रकार लोन लेने में भी आम आदमी को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर किसी आम आदमी को मकान या फ़्लैट चाहिए तो उसके पास सर्वप्रथम बैंक स्टेटमेंट हो, पैन कार्ड हो, और आयकर संबंधी कागजात तथा आय संबंधी प्रमाणपत्र। हमारी केन्द्र और राज्य सरकारों ने कभी इस दिशा में ध्यान नहीं दिया। आम आदमी जिसे हम श्रमिक वर्ग भी कह सकते हैं या जो ई.डब्ल्यू.एस वर्ग का हो के पास बैंकों से लोन लेने संबंधित कागजात नहीं होते हैं। अगर हैं भी तो आधे अधूरे । जब उसके पास ये कागजात ही नहीं हैं तो उसे मकान आखिर मिलेगा तो कैसे? सवाल यही है कि जब तक आम आदमी को रहने के लिए एक या दो कमरे का मकान नहीं मिल जाता तब तक विकसित उत्तर प्रदेश या विकसित भारत की कल्पना नही की जा सकती है।
वास्तविकता यह भी है कि आम आदमियों और ईडब्लूएस वर्ग के मकान बनाने और उसे सुलभ कराने की कोई प्रभावकारी योजना केन्द्र और राज्य स्तर पर नहीं हैं जबकि देश की अधिकांश आबादी गरीब है और विभिन्न साधनों से वंचित हैं । मै कहना चाहूँगा कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 24 के बाई पास पर कई किलोमीटर की लंबी कालोनियां की श्रृंखला और बसा दी गई है। दुख की बात यह है कि इन कालोनियों में सीवर और पानी जैसी अनेका-अनेक आवश्कताओं की कमी देखी जा सकती है । इन कालोनियों मे रहने वाले लोगों को कोई लोन नहीं मिलता है। मूलभूत सुविधाओं का अभाव है इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। इन कालोनियों के निवासियों को आखिर मूलभूत सुविधऐं कौन देगा? कौन उनके लिए पार्क बनवाएगा और कौन उनके लिए अन्य सुविधएं देगा? इस पर समस्त राजनीतिक दल चुप है।
अब मैं बातें करता हूँ सरकारी नियमो की। सरकार आज गरीबों याने ईडब्ल्यूएस वर्ग के मकानों के लिए भी कारपार्किंग की जगह छोडने की माँग करती है, ई.डब्ल्यू.एस वर्ग के मकानों के लिए क्या कार पाकिंग एक आवश्यकता है? एक आम आदमी अपने रहने के लिए ठीक ठाक मकान की कल्पना करता है। सबसे पहले उसकी इस कल्पना को साकार किया जाना चाहिए। अगर सरकार दिशा में अपने नियमो में संशोधन कर ले तो आम आदमी को मकान सस्ते दरों पर कुछ प्राईवेट बिल्डर भी उपलब्ध करा सकते हैं। तीन से पांच लाख रुपए में शानदार मकान गरीबों के लिए बनाये जा सकते हैं।
इसके लिए एफ0ए0आर0 के अंदर कोई छूट न देकर 200 यूनिट से प्रति एकड़ 400 से 500 प्रति हेक्टेयर की छूट दी जानी चाहिए। इसके तहत कम पूंजी वाला व्यकित जो आज किराया दे रहा है रहने के लिए उसे स्वयं का अपना मकान मिल सकता है। इस राशि को वह किश्त के रूप में देकर स्वयं मकान का मालिक बन सकता है और गरीब बस्तियों मे रहने वाले लोग शानदार मकानों में रह सकते हैं। कई बिल्डर इस दिशा में काम करना चाहते हैं लेकिन सरकार को अपने नियमों और व्यवस्था तंत्र में एक विकसित और विकासोन्मुख भावना का परिचय देना होगा।
अब मैं बात करता हू गाजियाबाद की। गाजियाबाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है। यह दिल्ली की सीमा से लगा है लेकिन यहाँ पर नोएडा और गुडगाँव जैसी सुविधाओं का अभाव है। इस ओर न तो केन्द्र और न ही उत्तर प्रदेश सरकार ने ध्यान दिया है । जितने भी राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली से होकर गाजियाबाद के रास्ते निकलते हैं उन में 100 प्रतिशत उत्तराखण्ड का यातायात संचालित होता हैं। नैनीताल, मसूरी और हरिद्वार जाने के लिए गाजियाबाद के गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग से ही होकर किसी वाहन को गुजरना पडता है। इन्ही मार्ग से 90 प्रतिशत उत्तर प्रदेश का भी यातायात संचालित होता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 24, 54 और 91 इसका उदाहरण हैं। इन मार्गो की सबसे ज्यादा अनदेखी की गई है। यहाँ पर दिल्ली की आबादी की भी बसावत है।
इन मार्गो की उपेक्षा का ही परिणाम है कि इन मार्गो पर आने वाले क्षेत्रों में और बस्तियों में नागरिक सुविधाओं का अभाव है। मैं यह भी स्पष्ट कर दूँ कि एनसीआर बोर्ड के पास धन की कमी नही है लेकिन उसका सही उपयोग इन मार्गो और क्षेत्रो में नहीं हो पा रहा है। नोएडा और गुडगाँव जैसा सौंदर्य मेट्रो और अन्य सुविधाओं का इस क्षेत्रों में अभाव हैं। इसके लिए मेरा सुझाव यह भी है कि राज्य सरकार को जो राजस्व प्राप्त होता है उसका एक निशिचत हिस्सा इस क्षेत्रो के विकास पर खर्च होना चाहिए। इसी प्रकार केन्द्र सरकार को भी जो टैक्स प्राप्त होता है उसका भी एक हिस्सा इस क्षेत्रों के विकास कार्य में किया जाए क्योंकि गाजियाबाद से ही तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों को जोड़ते हैं। आखिर गाजियाबाद सबसे ज्यादा राजस्व उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने में जमा करता है। यहां सर्वाधिक उद्योग हैं। यहां के व्यापारियों और उद्योगपतियों के माध्यम से राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है। सरकार दावा तो करती है कि यहा के लोगों का आय बढ़ रही है लेकिन संसाधनो का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस क्षेत्रों के विकास के लिए कोष का आवंटन सही तरीके से हो चाहिए।
अब, मैं बात करता हूँ भूमि अधिग्रहण की। किसानों की जो जमीन अधिग्रहीत की जाती है वह बाजार मूल्य पर किसानों के साथ धोखा है। अगर सरकार 15 प्रतिशत किसी भूमि पर खर्च कर दे तो उसकी कीमत 2 से तीन गुना हो जाती है। इसी प्रकार सरकार जो भूमि अधिग्रहीत करती है उसे कई -कई गुना ज्यादा दाम पर बिल्डरों को या अन्य संस्थाओं को देती है। कम कीमत पर जमीन लेकर सरकार द्वारा ज्यादा दामों पर बेचने के मामले में ध्यान देना होगा कि सरकार कोई व्यापारी नहीं है। सरकार को निश्चित रकम जुटाने का अधिकार है लेकिन जमीन पर व्यापार करने का हक नहीं है लेकिन ऐसा हो रहा है। सरकार जमीन के मामले में आज व्यापारी हो गई है। किसी भी जमीन का विकास शुल्क नाम मात्र का ही होता है। सरकार विकास शुल्क के नाम पर क्यों ज्यादा दामों में प्लाट बेचती है? इसी प्रकार किसानों की जो जमीन अधिग्रहीत की जाती है उसका 40 प्रतिशत हिस्सा पाने का हकदार भी किसान होता है लेकिन किसान इन तथ्यों पर ध्यान ही नहीं देते हैं। जिन सोसायटियों और किसानों की जमीन अधिग्रहीत होती है उनका 40 से 50 प्रतिशत मुआवजे के रूप में जमीन दी जाती है विकास शुल्क लेकर।
अंत में हिन्ट के पाठकों के लिए मैं यही कहना चाहूंगा कि गरीबों के लिए मकान देने का लक्ष्य अगर केन्द्र और राज्य सरकार का है तो उसके लिए वातावरण बनाया जाना चाहिए। सभी को इस दिशा में राजनीजिक हितों से ऊपर उठकर आम आदमी के बारे में सोचना होगा। नियमों और कानूनों में संसोधन होना चाहिए तथा इस नियमों की जानकारी वृहत्त स्तर पर सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके अलावा गाजियाबाद के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय राजधनी क्षेत्रों की मूल भावना को लागू करने के लिए सामूहिक प्रयास हर स्तर पर होने चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को गाजियाबाद के विकास की दिशा में एकमत होना होगा तभी केंद्र और राज्य सरकार को उसके लक्ष्य के अनुक्रम में मदद की जा सकती है। जो तीन राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली से लेकर गुजरते हैं उनके विकास और उन मार्गो के आसपास की आबादी पर ध्यान देना जरूरी है। केंद्र सरकार प्रत्यक्ष करों के आधर पर गाजियाबाद के लिए एक कोष स्थापित कर सकती है जिससे एक जनपद का व्यापक स्तर पर विकास हो

किसानों को पार्टनर बनाए सरकार


मेरे विचार से जिस भूमि का भू-उपयोग व्यवसायिक अथवा आवासीय है और वह भू-अर्जन से बची है तो भू-स्वामी खुद उक्त भूमि का विकास करता है अथवा बिल्डर को बेंचता या बिल्डर से साझेदारी करता है, उपरोक्त तीनों संभावनाओं में से एक का लाभ भू अर्जन की जाने वाले भू स्वामी को भी मिलना चाहिए।
आवासीय कालोनी, रोड, औद्योगिक क्षेत्रों आदि के लिए ली जाने वाली भूमि के बदले मुआवजा कहने को तो बाजार भाव पर डिपटी कमिश्नर और प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि तय करते हैं, पर भाव तय करते समय उस भूमि का मूल्यांकन भूमि की पूर्व स्थिति पर होता है न कि वर्तमान स्थिति पर। पूर्व स्थिति से अभिप्राय: भू उपयोग और भूमि पर पहुंचने की उपलब्ध्ता।
सरकार अपने द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के लिए भू-उपयोग बदलने के लिए स्वतंत्रा हैं, जबकि मुआवजे के समय भूमि का मूल्यांकन पूर्व निर्धरित भू उपयोग पर कृषि आधरित होता है। ऐसे ही कालोनी बनने से पहले अंदर के खेतों की जमीन का मूल्य बहुत कम होता है जबकि योजना बनने के बाद अंदर तक रोड जाने से थोड़ा खर्च करके भूमि का मूल्यांकन बढ़ जाता है। मेरा मानना है कि विकास के लिए अकेले किसानों के हित की बलि देना ठीक नहीं। विकास संबंधी सभी एजेन्सीज को भू-मूल्य पूर्व स्थिति पर नहीं बल्कि भावी योजना में होने वाले उपयोग मूल्य पर आधरित होना चाहिए। अर्थात विकास की भागीदारी का लाभ किसान को मिलना चाहिए। उदाहरण के तौर पर मधुबन योजना को ही लें, माना जा रहा है कि 7500 रुपए प्रति गज से प्लाटों का रेट निकाला जाएगा, जबकि भूमि का मुआवजा 1100 रुपए प्रति वर्ग की दर पर तय किया जा रहा है। अगर पूरी योजना का गणित लगाएं तो 1100 प्रति वर्ग गज के हिसाब से जमीन खरीदकर 50 प्रतिशत जमीन सड़क, पार्क और अन्य कार्यो के लिए छोड़ दी जाए तो 50 प्रतिशत प्लाट निकल आते हैं। 1000 गज जमीन 11 लाख की तथा 500 गज जमीन बिक्री के लिए उपलब्ध् हूई। इस पर विकास इसमें से जीडीए अपने कार्य करने तथा कोष बनाने के लिए 50 प्रतिशत लाभ ले ले तब भी किसानों को 1100+1025 लाभ का अवश्य मिलना चाहिए। यदि बिक्री मूल्य बढ़ता है तो और लाभ बढ़ने की संभावना प्रबल होती है। ओल्गा टेलिस बनाम मुंबई म्यूनिसिपल कार्पोरेशन ,1985 3 एस0सी0सी0 545, ए0आई0आर0 1986 एस0सी0 180 मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि जीवन यापन का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। अत: किसानों का मौलिक अधिकार छीन कर अगर विकास प्राधिकरण लाभ कमाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। अत: इस पर पुन: विचार करने की आवश्यकता है।
भूमि अधिग्रहण अधिनियम की आड़ में विकास प्राधिकरण किसानों की भूमि छीनकर और उचित मुआवजा न देकर संविधन के अनुच्छेद 300 ए का भी उल्लंघन कर रहा है।
मेरे विचार से जिस भूमि का भू-उपयोग व्यवसायिक अथवा आवासीय है और वह भू-अर्जन से बची है तो भू-स्वामी खुद उक्त भूमि का विकास करता है अथवा बिल्डर को बेचता या बिल्डर से साझेदारी करता है। उपरोक्त तीनों संभावनाओं में से एक का लाभ भू अर्जन की जाने वाले भू स्वामी को भी मिलना चाहिए। सरकार को इस योजना के तहत किसानों को मौका देना चाहिए कि अपनी भूमि के बदले उन्हें विकसित भूमि मिले और वे खुद निर्माण कार्य में आगे आएं या इस व्यवसाय से जुड़े लोगों से भागीदारी कर सकें। ऐसा नहीं है कि मै पहली बार या कोई नई बात कर रहा हूं पहले भी गाजियाबाद में डेवलपमेंट चार्ज लेकर 40 प्रतिशत प्लाट के रूप में भूमि किसानों को दे दी जाती थी। इसे भू-स्वामी अपनी दरों पर बेच सकता था। पूर्व मेयर दिनेश चंद गर्ग आज जिस भूमि पर रह रहे हैं वह भी लैंड पालिसी के अंतर्गत मिले प्लाट था जिसे भू-स्वामी से उन्होंने खरीदा। ऐसे अनेक उदाहरण हैं।
केवल अपनी आय बढ़ाने के लिए जीडीए व सरकार ने धीरे-धीरे उक्त पालिसी को बदल दिया। यह कतई उचित नहीं है। यदि गौर से देखा जाए तो आवासीय व्यवसाय में 85 प्रतिशत भूमि का योगदार का भूमि मालिक का होता है। जबकि 15 प्रतिशत योगदान ही केवल पंजी व योजना पक्ष का होता है। जबकि लाभ के बंटवारे में भूस्वामी को केवल भूमि का बाजार मूल्य मिलता है। और लाभ 15 प्रतिशत का योगदान करने वाले योजना पक्ष को मिलता है। मेरा सुझाव है निम्न आय वर्ग व अत्याधिक गरीब वर्ग के लिए इस क्षेत्रा में अलग से सरल नियम बनाकर सीधे किसानों को ही इस क्षेत्रा में प्रोत्साहन किया जा सकता है। इस विषय में मेरा सुझाव है कि शहरी सीमा के 5-10 किलोमीटर के क्षेत्रो में यदि कोई किसान अपनी भूमि पर 40 गज से 80 गज तक के मकान बनाता है तो उसके नक्शे बिना लैंड यूज देखे ;विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सामान्यता पास किए जाएगा। और शुल्क न लिया जाए। बिजली की व्यवस्था में सामान्य शुल्क लिया जाए। इ0डब्ल्यू0एस0 व एलआईजी मकानों व प्लाटों पर संपत्ति को गिरवी रखकर बिना आय-प्रमाण पत्र के 7 प्रतिशत के दीर्घकालीन ऋण दिया जाए। 95 प्रतिशत आवश्यकता वाले ई0डब्ल्यू0एस0 व एल0आई0जी0 की 1 प्रतिशत आवासीय योजना भी भारत में नही चल रही है। इससे जिनके पास भूमि है उसी वर्ग को प्रोत्साहित कर भूमि अधिग्रहण व गरीब जनता की आवासीय समस्या एक साथ हल हो सकती है।

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