Wednesday, September 23, 2015

व्यायाम के लाभ

जिस प्रकार मानव जीवन के लिए वायु, जल तथा भोजन की आवश्यकता है इसी प्रकार व्यायाम भी मानव जीवन के लिए आवश्यक है । इसकी कमी से मनुष्य का जीवन दुर्बल और अनेक रोगों का घर बन जाता है ।

व्यायाम से शारीरिक शक्ति बढ़ती है, स्वास्थ्य ठीक रहता है । मनुष्य धन कमा सकता है परन्तु उस धन से स्वास्थ्य नहीं प्राप्त कर सकता । व्यायाम करने से शरीर हल्का और फुर्तीला बन जाता है । उत्साह में वृद्धि होती है और पाचन शक्ति तेज होती है । पटठे और हड्डियां दृढ़ हो जाती हैं । मस्तिष्क का विकास होता है क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है ।
व्यायाम अनेक प्रकार से किया जाता है । दण्ड पेलना, मुग्दर, कुश्ती खेलना, कबड्डी, सैर करना आदि अनेक प्रकार के व्यायाम हैं, परन्तु जो व्यायाम धीरे-धीरे हो वह उत्तम है । नियम से प्रतिदिन व्यायाम करना लाभदायक होता है । व्यायाम अपनी शक्ति से बढ़कर कभी नहीं करना चाहिए । थकावट अनुभव होने पर व्यायाम छोड़ देना चाहिए ।
जैसे जैसे शक्ति का संचार अधिक हो, वैसे वैसे व्यायाम की मात्रा बढ़ाई जा सकती है । शक्ति से बढ़कर व्यायाम करना हानिकारक सिद्ध होता है । शीतकाल तथा बसंत ऋतू व्यायाम के लिए बहुत अच्छी है । गर्मी तथा वर्षा के मौसम में कम व्यायाम करना चाहिए । स्वास्थ्य बहुमूल्य धन है जिसने पा लिया उसने सब कुछ पा लिया । अतः सभी को प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए 

Friday, September 18, 2015

बादल फैमिली के खिलाफ कोर्ट में याचिका, खुद का ट्रांसपोर्ट है, फिर डिपार्टमेंट में

 चंडीगढ़। पंजाब में खुद का ट्रांसपोर्ट बिजनेस होने के चलते मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के मामलों में दखल नहीं देनी चाहिए। हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका में यह मांग की गई है। इस मामले में वीरवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री व उनकी ट्रांसपोर्ट कंपनियों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस सतीश कुमार मित्तल व जस्टिस महावीर सिंह चौहान की बेंच ने मामले पर 10 दिसंबर के लिए सुनवाई तय की है।
वकील एचसी अरोड़ा की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का खुद का बहुत बड़ा ट्रांसपोर्ट बिजनेस है। ऐसे में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिए जाएं कि ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट और स्टेट सेक्टर ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग से जुड़े मामलों में उन्हें तब तक दखल न करने दिया जाए, जब तक उनकी ट्रांसपोर्ट कंपनियों में हिस्सेदारी है
याचिका में तर्क: प्राइवेट को जरूरत से ज्यादा परमिट
हाईकोर्ट में दायर याचिका में कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि सरकारी कंपनी पीआरटीसी, पंजाब रोडवेज और पनबस कंपनी को नेशनल व स्टेट हाईवे के रूट परमिट नहीं दिए गए जबकि प्राइवेट ट्रांसपोर्ट कंपनियों को जरूरत से ज्यादा रूट परमिट दिए गए हैं।
सरकारी से ज्यादा ऑर्बिट को दिया जा रहा समय 
लुधियाना से बरनाला रूट पर बसों के टाइम टेबल का उदाहरण देते हुए कहा कि ऑर्बिट बसों को सरकारी से ज्यादा समय दिया गया है। बसों के ठहराव में भी भेदभाव है। अवैध ढंग से बसें चलाने के मामले में भी प्राइवेट पर कार्रवाई नहीं की गई।

किराए तय करने का काम सरकार न करे 
बसों के किराए को लेकर कहा गया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के किराए सरकार तय करती है। यह काम किसी इंडिपेंडेंट अथाॅरिटी को दिया जाए। वहीं, स्टेट ट्रांसपोर्ट के 20 फीसदी बस टाइमिंग कैंसिल की जाती है, जिससे घाटा हो रहा है।

40 लाख का रिश्वत मामला: DSP मीना सहित तीन की जमानत अर्जी खारिज

चंडीगढ़. डीएसपी रामचंद्र मीना समेत तीन अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज 40 लाख रुपए नकद और 30 लाख रुपए के चेक रिश्वत मामले में गुरुवार को सीबीआई विशेष अदालत में करीब डेढ़ घंटे तक जमानत पर बहस हुई। बचाव पक्ष के वकीलों ने सीबीआई की दलीलों पर सवाल उठाते हुए उनमें मतभेद होने की बात कही। सीबीआई ने मामले में अपना पक्ष रखते हुए आरोपियों की जमानत अर्जी का विरोध किया हुआ। बहस के बाद सीबीआई विशेष अदालत ने चारों आरोपियों ईडब्ल्यू के डीएसपी रामचंद्र मीना, एसआई सुरेंद्र, बर्कले के मालिक संजय दहूंजा और केएलजी के अमन ग्रोवर की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
सीबीआई ने ई–डब्ल्यू डीएसपी रहे रामचंद्र मीना, एसआई सुरिंदर समेत रिश्वत मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले बर्कले के मालिक संजय दहूंजा और केएलजी होटल मालिक अमन ग्रोवर को गिरफ्तार किया था। आरोप के मुताबिक पुलिस सेक्टर-17 के चावला पेट्रोलपंप के संचालक और उसके परिजनों को गिरफ्तार न करने के बदले में यह रिश्वत ले रही थी।
सीबीआई ने दिनों तक जांच करने और मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगाया था और ट्रैप लगाया था। चावला पेट्रोल पंप के मालिक गुरकिरपाल सिंह चावला, उनकी पत्नी जगजीत कौर और बेटे हरमीत के खिलाफ ई–डब्ल्यू ने 24 दिसंबर 2014 को सेक्टर-9 की दीपा दुग्गल की शिकायत पर 6.25 करोड़ रुपए की ठगी का केस दर्ज किया था। दीपा की शिकायत थी कि चावला ने ९ साल पहले उनके और उनके घरवालों के फर्जी दस्तखत कर सेक्टर-9 की कोठी की फर्जी सेल डीड, अथॉरिटी लेटर और अन्य कागजात तैयार किए थे। इन डॉक्युमेंट्स के आधार पर करोड़ों का लोन लिया जाना था।

जेलर के अन्दर भी एक ऐसा इंसान छिपा है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते


जब भी कभी जेल सुपरडेंट का जिकर होता है तो इंसान के जेहन में सबसे पहले हिंदी फीचर फिल्म शोले के जेलर का चेहरा आँखों के साहमने आ जाता है ! और अंग्रेजो के ज़माने से जेलर की छवि बड़ी सख्त सवभाव वाले व्यकित की चली आ रही है !पर असलियत में ऐसा नहीं है !जेलर के अन्दर भी एक ऐसा इंसान छिपा है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते ! ऐसा ही एक जेलर है जिनके दिल में अपनी जेल के कैदीयो के पार्टी सिर्फ प्यार ही नहीं है बल्कि उनके लिए दर्द भी है के कैसे ये कैदी अपना अगला जीवन समाज में अच्छे नागरिक बन के गुजारे !जी है ये शकश है बरनाला जेल के जेलर स कुलवंत सिंह ! स कुलवंत सिंह जो के एक बहुत ही नेक इंसान है हमेशा जेल में कुश न कुश ऐसा उपरला करते रहते है जिससे जेल में बंद कैदियों का जीवन सुधर सके !
स कुलवंत सिंह ने बताया के जैसे शरीर को साफ रखने के लिए नहाना जरुरी हैं इस तरह ही शरीर के अंदरुनी ऑर्गन्स की सफाई भी जरुरी है जिससे शरीर को निरोग रखने के साथ साथ विचारो में भी शुद्ता आती है !इसके लिए वह बरहम कुमारी आश्रम की बहन  सु श्री सुदर्शन कुमारी जी  के सहयोग से रोजाना जेल में एक अध्यात्मक मैडिटेशन योग शिविर का आयोजन करते है जिससे जेल में बंद कैदियों की सोच पर बहुत गहरा असर पड़ा है और उनमे अच्छे नागरिक बनने की लालसा उत्पन हो रही है !कई कैदी जो के कई घम्भीर बीमारो से गरस्त थे वह ठीक हो गए है !रोजाना ९० मिनट बरहम कुमारी बहनो के सत्संग और मैडिटेशन से जो प्रभाव केदियो की सोच को सकारातमक बनाने पर पड़ा वह आशचर्य जनक था !
स कुलवंत सिंह ने बताया के जेल में बंद लोगो के लिए स्पोर्ट्स का बहुत ही अच्छा उपराला किया है जिसमे कई तरह की गेम्स का प्रबंध है !केदियो को स्वरोजगार बनाने के लिए भी कई प्रबंध किये गए है !
स कुलवंत सिंह ने कहा के जयादातर जुर्म गलत संगत  और नशे के कारन हो रहे है और वो नशा बेचने वालो के सख्त खिलाफ है !उन्होंने कहा के मैडिटेशन से सभी बुरी आदतो पर काबू पाया जा सकता है !
वह जेल में जरुरी सुधारो को पहल दे रहे है जिसमे बिजली की बचत के लिए सोलर लाइट्स पर जोर दे रहे है !पोली  खेती को  बढ़ाने का उपराला कर रहे है ! मै आपको बता दू के स कुलवंत सिंह जी p c s ऑफिसर बनने से पहले भारतीय फौज में भी सेवा कर चुके है !

Saturday, September 12, 2015

रोजाना ताली बजाओ कैंसर को दूर भगाओ ,ताली बजा के अपने रोगों को ठीक करे - परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज

रोजाना ताली बजाओ कैंसर को दूर भगाओ ! 09050760954
परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज हमेशा देश वासिओ को ऐसी बाटे बताते रहते है जिससे उनका जीवन नोरोग और सवस्थ बना रहे !आज भी स्वामी चिन्मयानन्द जी के श्री मुख से जो निकला वो आपसे शेयर कर रहा हु ! उमीद है के आप इस का भरपूर फायदा उठायेगे !परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के हिन्दू सनातन धर्म में आरती अथवा कीर्तन करते समय तालियां बजाई जाती है,
क्योंकि हम अक्सर ही यह देखते है कि जब भी आरती अथवा कीर्तन होता है तो, उसमें सभी लोग तालियां जरुर बजाते है और हमेशा जोर जोर से तालिया बजाने पर जोर दिया जाता है !लेकिन, हम में से अधिकाँश लोगों को यह नहीं मालूम होता है कि आखिर यह तालियां बजाई क्यों जाती है इसीलिए हम से अधिकाँश लोग बिना कुछ जाने समझे ही तालियां बजाया करते हैं क्योंकि हम अपने बचपन से ही अपने बजुर्गो को ऐसा करते देखते रहे हैं! परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी कहा के आपको हैरानी होगी कि आरती अथवा कीर्तन में ताली बजाने की प्रथा बहुत पुरानी है और श्रीमद्भागवत के अनुसार कीर्तन में ताली की प्रथा श्री प्रह्लाद जी ने शुरू की थी क्योंकि, जब वे भगवान का भजन करते थे तो, जोर-जोर से नाम संकीर्तन भी करते थे तथा, साथ-साथ ताली भी बजाते थे और हमारी आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने बगल में कोई वस्तु छिपा ले और यदि दोनों हाथ ऊपर करे तो वह वस्तु नीचे गिर जायेगी ठीक उसी प्रकार जब हम दोनों हाथ ऊपर उठकर ताली बजाते है शरीर के नकारतमक ऊर्जा जिसे हमने स्वयं अपने बगल में दबा रखा है, नीचे गिर जाती हैं अर्थात नष्ट होने लगती है परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के कहा तो यहाँ तक जाता है कि जब हम संकीर्तन या कीर्तन के समय हाथ ऊपर उठा कर ताली बजाते है तो हमारे शरीर में ऊर्जा उत्पन होती है जिसमे काफी शक्ति होती है और हरिनाम संकीर्तन से हमारे हाथो की रेखाएं तक बदल जाती है! परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के यदि हम आध्यात्मिकता की बात को थोड़ी देर के छोड़ भी दें तो भी आज एक्यूप्रेशर सिद्धांत के अनुसार मनुष्य को हाथों में पूरे शरीर के अंग व प्रत्यंग के दबाव बिंदु होते हैं जिनको दबाने पर सम्बंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन का प्रवाह पहुंचने लगता है और धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है और, यह जानकार आप सभी को बेहद ख़ुशी मिश्रित आश्चर्य होगा कि इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे सरल तरीका होता है ताली !
परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के असल में ताली तीन प्रकार से बजायी जाती है:- सबसे पहले ताली में बाएं हाथ की हथेली पर दाएं हाथ की चारों अंगुलियों को एक साथ तेज दबाव के साथ इस प्रकार मारा जाता है कि दबाव पूरा हो और आवाज अच्छी आए! इस प्रकार की ताली से फेफड़े, लीवर, पित्ताशय, गुर्दे, छोटी आंत व बड़ी आंत के रोग ठीक हो सकते है  इस प्रकार की ताली कब्ज, एसिडिटी, मूत्र, संक्रमण, खून की कमी व श्वांस लेने में तकलीफ जैसे रोगों में भी लाभ पहुंचाती है तथा दाएं हाथ की अंगुली के साइनस के दबाव बिंदु दबते हैं और इससे इन अंगों तक खून का प्रवाह तीव्र होने लगता है जिससे शरीर ने पौष्टिक ऊर्जा उत्पन होती है ,और कैंसर जैसी नामुराद बीमारी भी ठीक हो जाती है ! इस प्रकार की ताली को तब तक बजाना चाहिए जब तक कि हथेली लाल न हो जाए !
परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के दूसरी तरह की ताली है थप्पी ताली !
इस तरह की ताली में दोनों हाथों के अंगूठा-अंगूठे से कनिष्का-कनिष्का से तर्जनी-तर्जनी से यानी कि सभी अंगुलियां अपने समानांतर दूसरे हाथ की अंगुलियों पर पड़ती हो, हथेली-हथेली पर पड़ती हो ,इस प्रकार की ताली की आवाज बहुत तेज व दूर तक जाती है और इस प्रकार की ताली कान, आंख, कंधे, मस्तिष्क, मेरूदंड के सभी बिंदुओं पर दबाव डालती है! इस ताली का सर्वाधिक लाभ फोल्डर एंड सोल्जर, डिप्रेशन, अनिद्रा, स्लिप डिस्क, स्पोगोलाइसिस, आंखों की कमजोरी में पहुंचता है ! एक्यूप्रेशर चिकित्सकों की राय में इस ताली को भी तब तक बजाया जाए जब तक कि हथेली लाल न हो जाए ! परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के तीसरी तरह की ताली है ग्रिपरमप ताली -इस प्रकार की ताली में सिर्फ हथेली को हथेली पर ही इस प्रकार मारा जाता है कि वह क्रॉस का रूप धारण कर ले. इस ताली से कोई विशेष रोग में लाभ तो नहीं मिलता है, लेकिन यह ताली उत्तेजना बढ़ाने का कार्य करती है!
इस ताली से अन्य अंगों के दबाव बिंदु सक्रिय हो उठते हैं तथा, यह ताली सम्पूर्ण शरीर को सक्रिय करने में मदद करती है! यदि इस ताली को तेज व लम्बा बजाया जाता है तो शरीर में पसीना आने लगता है जिससे कि शरीर के विषैले तत्व पसीने से बाहर आकर त्वचा को स्वस्थ रखते हैं| परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के ताली से न सिर्फ रोगों से रक्षा होती है, बल्कि कई कैंसर जैसे असादया रोगों का इलाज भी हो जाता है!
जिस तरह कोई ताला खोलने के लिए चाबी की आवश्यकता होती है ठीक उसी तरह कई रोगों को दूर करने में यह ताली ना सिर्फ चाभी का ही काम नहीं करती हैबल्कि, कई रोगों का ताला खोलने वाली होने से इसे "मास्टर चाबी" भी कहा जा सकता है| परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के हाथों से नियमित रूप से ताली बजाकर कई रोग दूर किए जा सकते है एवं, स्वास्थ्य की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है ! ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है और, यदि प्रतिदिन यदि नियमित रूप से 2 मिनट भी तालियां बजाएं तो, फिर किसी हठयोग या आसनों की जरूरत नहीं होती ह ! परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने कहा के अंत में इतना ही कहूँगा कि हम हिन्दुओं को गर्व करना चाहिए कि जो बातें हम आज के आधुनिकतम तकनीक के बाद भी ठीक से समझ नहीं पाते हैं! एक्यूप्रेशर के प्रभाव एवं दुष्प्रभावों को हमारे पूर्वज ऋषि-मुनि हजारों-लाखों लाख पहले ही जान गए थे! परन्तु चूँकि हर किसी को बारी-बारी शारीरिक संरचना की इतनी गूढ़ बातें समझानी संभव नहीं थी, इसलिए, हमारे पूर्वजों ने इसे एक परंपरा का रूप दे दिया ताकि उनके आगे आने वाली जनरेशन सदियों तक उनके इन अमूल्य खोज का लाभ उठाते रहें!
 समरण रहे की परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने विशव को कैंसर मुक्त करने का लक्ष्य लिया हुआ है स्वामी जी कहते है के रोजाना ताली बजाओ कैंसर को दूर भगाओ !

Thursday, September 10, 2015

बिहार चुनाव

नई दिल्ली। बुधवार को बिहार चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है जिसके बाद से प्रदेश में अचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद सी वोटर-इंडिया टीवी सर्वे की रिपोर्ट ने बीजेपी में खलबली मचा दी है। सर्वे के मुताबिक बिहार में नेक टू नेक फाइट में आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस का महागठबंधन एनडीए पर भारी पड़ रहा है। जीत के बारे में नहीं सोचते तो क्या सोचते हैं नीतीश कुमार? आईये जानते हैं इस सर्वे की खास बातें... सी वोटर-इंडिया टीवी सर्वे के मुताबिक महागठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना है, मतलब कि बिहार में जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस की सरकार बनेगी। इस सर्वे में एनडीए को नुकसान होता दिख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महागठबंधन बिहार चुनाव में करीब 116 से 132 सीटें जीत सकता है। जबकि एलजेपी, रालोसपा और हम के गठबंधन को इस चुनाव में 94 -110 सीटें मिल सकती हैं। जबकि अन्य को भी 13 से 21 सीटों का फायदा मिल सकता है। सर्वे में नीतीश कुमार को ही सीएम पद के लिए बेस्ट कहा गया है। नीतीश कुमार को 53 प्रतिशत लोगों ने सीएम पद के लिए बिल्कुल सही कहा है। जबकि 18 प्रतिशत लोगों को लगता है कि बीजेपी नेता सुशील मोदी सीएम की गद्दी संभाल सकते हैं। तो 5 प्रतिशत जनता को लगता है कि सीएम की कुर्सी पर लालू यादव और शुत्रुघन सिन्हा बैठ सकते हैं। लालू-नीतीश और कांग्रेस के महागठबंधन को 43 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं तो वहीं एनडीए केवल 40 प्रतिशत पर ही सिमटती दिख रही है।
 पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम जीत के बारे में नहीं सोचते हैं। अगर राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो नीतीश कुमार के दिमाग में इस चुनाव को लेकर बहुत कुछ चल रहा है। पढ़ें- नेपाल के रास्ते आ रहे नकली नोट, बांटे जायेंगे चुनाव में आचार संहिता लागू होने के बाद नीतीश ने अपने घर के बाहर आकर कहा कि सोचना अब मीडिया का काम है। हम देशवासियों के साथ दशहरा भी मनाएंगे और दीपावली भी। हमारा गठबंधन 243 सीटों पर मजबूत है। चुनाव प्रचार के लिए 38 दिन का समय मिला है। हम प्रचार में लग जाएंगे, काउंट डाउन तो मीडिया के लिए शुरू हो गया है। आपलोग "मीडिया" रोज-रोज पटाखा फोड़िए। नीतीश बोले पांच चरण के मतदान में प्रचार के लिए थोड़ा कम गैप कम है, इससे कुछ परेशानी हो सकती है। लेकिन बिहार के तमाम राजनीतिक दलों को इसका अनुभव है। चुनाव आयोग ने फैसला कर लिया है, हम उसका स्वागत करते हैं। अगर राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो नीतीश कुमार को सबसे बड़ा डर जातिगत आधार पर वोट देने वाले वोटरों का लग रहा है। वो सोच में हैं, कि अगर जीतन राम मांझी की वजह से अति पिछड़ा वर्ग और राम विलास पासवान की वजह से पिछड़ी जातियों के वोट भाजपा के खाते में चले गये, तो राजद से दोस्ती धरी की धरी रह जायेगी। पढ़ें- कब कहां होंगे मतदान भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा कि हम चुनाव के लिए बहुत पहले से तैयार थे। अगर चुनाव सिर्फ एक चरण में भी होता तो हम इसके लिए तैयार हैं। हम चुनाव की तैयारी एक साल से कर रहे हैं। हमारे सामने कोई भी पार्टी हो जितनी पार्टियों का महागंठबंधन हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सत्ताधारी दल साम-दाम-दंड-भेद से चुनाव जीतने की कोशिश करेगा। हम लोग सत्ता में नहीं हैं। हम लोगों की तैयारी पूरी हो चुकी है। सुशील कोदी बोले कि सीटों के बंटवारे को लेकर हमारी केंद्रीय नेतृत्व बातचीत कर रही है। बिहार भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सह प्रदेश प्रभारी व सांसद भूपेन्द्र यादव ने कहा चुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। जनता अब फैसला करेगी। जनता को जंगल राज का डर सता रहा है। हम बिहार के विकास और परिवर्तन के लिए वोट मांगेंगे। हमारी पार्टी विकास, विश्वास और पारदर्शिता के लिए काम करेगी। मोदी पर बढ़ा विश्वास भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही नीतीश के जाने और भाजपा के आने का एलान हो चुका है। बिहार की जनता देख रही है कि लालू यादव और नीतीश कुमार ने बिहार की जनता को दिया क्या है। प्रधानमंत्री के पैकेज के एलान से लोगों का भरोसा बढ़ा है। एनडीए में शामिल सभी पार्टियां मिलकर लड़ेंगे।
विधानसभा चुनाव को पांच चरणों में पूरा करने की घोषणा हो चुकी है। इस महासंग्राम में भाजपा नीत राजग और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू, लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर होने जा रही है। राज्य विधानसभा चुनाव के परिणाम का राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक परिदश्य पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। 
लालू भी मुलायम को मनाने में हो चुके हैं विफल   भाजपा के लिये क्यों महत्वपूर्ण भाजपा के लिए यह चुनाव जीतना बेहद महत्वपूर्ण है, अगर वह नरेन्द्र मोदी सरकार के पक्ष में राजनीतिक बयार को गति देना चाहती है और दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की पराजय और भूमि विधेयक पर कदम पीछे खींचने और जीएसटी, आदि की वजह से लगे दाग मिटाना चाहती है तो यह चुनाव जीतना बेहद जरूरी है। अगर यह चुनाव हारी, तो केंद्र के लिये आगे चलकर मुश्क‍िल हो सकती है।
भाजपा अगर बिहार में हारे तो भाजपा के लिये 2017 में उत्तर प्रदेश जीतना और भी कठिन हो जायेगा। जदयू का जादू राज्य में जदयू 10 साल से सत्ता में है और इस दौरान नीतीश कुमार के हाथों में काफी समय तक राज्य की बागडोर रही। कुमार की पार्टी का इस बार लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन है। नीतीश भाजपा के साथ 17 साल पुराना गठजोड़ तोड़कर जून 2013 में राजग से अलग हो गए थे। इनके लिये सबसे बड़ी चुनौती महागठबंधन की एकता है। अगर इस गठबंधन में दरार आयी, तो यह ताश के पत्तों के किले की तरह ध्वस्त हो जायेगा।
 नीतीश अगर हारे तो नीतीश कुमार का करियर भी खत्म होने की कगार पर पहुंच जायेगा। पासवान को नहीं पड़ेगा फर्क पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में भाजपा का रामविलास पासवान की लोजपा और उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ गठजोड़ था और भाजपा नीत गठबंधन ने उस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था। इस चुनाव में पासवान को ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला। जितनी सीटें आयेंगी, उतने प्लस प्वाइंट उनके खाते में केंद्र में जुड़ेंगे। 
पासवान को सिर्फ इस बात का टेंशन है कि अगर जाति समीकरण इस बार नहीं चले तो बिहार में उनकी पार्टी की पैठ कम हो सकती है। आचार संहिता लागू मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी ने आदर्श आचार संहित तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। बिहार में कुल 243 सदस्यों वाले बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म हो जाएगा। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मतदान का प्रथम चरण 12 अक्टूबर, दूसरा चरण 16 अक्टूबर, तीसरा चरण 28 अक्टूबर, चौथा चरण एक नवंबर, जबकि पांचवां और अंतिम चरण पांच नवंबर को संपन्न होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार चुनाव की घोषणा करते हुए बताया कि बिहार में कुल 6.68 करोड़ मतदाता हैं, और इस बार यही मतदाता बिहार में आने वाले समय में कौन मुख्या मंत्री का पद संभालेगा यह निर्णय 8 नवंबर को सबके सामने होगा।

Tuesday, September 8, 2015

सूर्यदेव को 'जगत की आत्मा' कहा गया है वेदों में -स्वामी चिन्मय नन्द


भगवान श्री सूर्य समस्त जीव-जगत के आत्मस्वरूप हैं। वह अखिल सृष्टि के आदि कारण हैं। इन्हीं से सब की उत्पत्ति हुई है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है। श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है- भूलोक तथा द्युलोक के मध्य में अन्तरिक्ष लोक है। इस द्युलोक में सूर्य भगवान नक्षत्र तारों के मध्य में विराजमान रह कर तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं।भगवान श्री सूर्य समस्त जीव-जगत के आत्मस्वरूप हैं। वह अखिल सृष्टि के आदि कारण हैं। इन्हीं से सब की उत्पत्ति हुई है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है। श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है- भूलोक तथा द्युलोक के मध्य में अन्तरिक्ष लोक है। इस द्युलोक में सूर्य भगवान नक्षत्र तारों के मध्य में विराजमान रह कर तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं। परम पूजय स्वामी चिन्मय नन्द जी महाराज जो के इस धरती को महाप्रलय से बचने के लिए कई वर्ष पहले सूर्य महायज्ञ कर चुके है और सूर्य कामेष्टि यज्ञ करने का सेहरा भी स्वामी जी के सर ही है ने कहा के सूर्य भगवान लाइव देवता है जो प्रतयक्ष रूप से दिखाई देते है !स्वामी जी ने कहा के सूर्यदेव की दो भुजाएं हैं, वे कमल के आसन पर विराजमान रहते हैं, उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। उनके सिर पर सुंदर स्वर्ण मुकुट तथा गले में रत्नों की माला है। उनकी कान्ति कमल के भीतरी भाग की सी है और वे सात घोड़ों के रथ पर आरुढ़ रहते हैं। सूर्य देवता का एक नाम सविता भी है, जिसका अर्थ है− सृष्टि करने वाला। ऋग्वेद के अनुसार, आदित्य मण्डल के अन्तः स्थित सूर्य देवता सबके प्रेरक, अन्तर्यामी तथा परमात्मस्वरूप हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य ब्रम्ह स्वरूप हैं, सूर्य से जगत उत्पन्न होता है और उन्हीं में स्थित है। यही भगवान भास्कर ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र बनकर जगत का सजृन, पालन और संहार करते हैं। सूर्य नवग्रहों में सर्वप्रमुख देवता हैं।
जब ब्रह्मा अण्ड का भेदन कर उत्पन्न हुए, तब उनके मुख से 'ओम' यह महाशब्द उच्चारित हुआ। यह ओंकार परब्रह्म है और यही भगवान सूर्यदेव का शरीर है। ब्रह्मा के चारों मुखों से चार वेद आविर्भूत हुए, जो तेजी से उदीप्त हो रहे थे। ओंकार के तेज ने इन चारों को आवृत कर लिया। इस तरह ओंकार के तेज से मिलकर चारों एकीभूत हो गये। यही वैदिक तेजोमय ओंकार स्वरूप सूर्य देवता हैं। यह सूर्य स्वरूप तेज सृष्टि के सबसे आदि में पहले प्रकट हुआ, इसलिए इसका नाम आदित्य पड़ा।
एक बार दैत्यों, दानवों एवं राक्षसों ने संगठित होकर देवताओं के विरुद्ध युद्ध ठान दिया और देवताओं को पराजित कर उनके अधिकारों को छीन लिया। देवमाता अदिति इस विपत्ति से त्राण पाने के लिए भगवान सूर्य की उपासना करने लगीं। भगवान सूर्य ने प्रसन्न होकर अदिति के गर्भ से अवतार लिया और देव शत्रुओं को पराजित कर सनातन वेदमार्ग की स्थापना की। इसलिए भी वे आदित्य कहे जाने लगे।
भगवान सूर्य का वर्ण लाल है। इनका वाहन रथ है। इनके रथ में एक ही चक्र है, जो संवत्सर कहलाता है। इस रथ में मासस्वरूप बारह अरे हैं, ऋतुरूप छह नेमियां और तीन चौमासे रूप तीन नाभियां हैं। इनके साथ साठ हजार बालखिलय स्वस्तिवाचन और स्तुति करते हुए चलते हैं। ऋषि, गन्धर्व, अप्सरा, नाग, यक्ष, राक्षस और देवता सूर्य नारायण की उपासना करते हुए चलते हैं। चक्र, शक्ति, पाश और अंकुश इनके मुख्य अस्त्र हैं।
भगवान सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं। इनकी महादशा छह वर्ष की होती है। सूर्य की प्रसन्नता और शान्ति के लिए नित्य सूर्यार्घ्य देना चाहिए और हरिवंशपुराण का श्रवण करना चाहिए। माणिक्य धारण करना चाहिए तथा गेहूं, सवत्सा गाय, गुड़, तांबा, सोना एवं लाल वस्त्र ब्राह्मण को दान करना चाहिए। सूर्य की शान्ति के लिए वैदिक मंत्र− 'ओम आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।' का जाप करना चाहिए।
सूर्योपासना विधि-
भगवान सूर्य की नित्य त्रिकाल उपासना करनी चाहिए। सूर्य की उपासना करने वाला परमात्मा की ही उपासना करता है। सूर्य की उपासना से लंबी आयु का वरदान भी हासिल किया जा सकता है। वैदिक सूक्तों, पुराणों तथा आगम आदि ग्रंथों में भगवान सूर्य की नित्य आराधना का निर्देश है। इनके साथ सभी ग्रह, नक्षत्रों की आराधना भी अंगोपासना के रूप में आवश्यक होती है। मंत्र−महादधि, श्रीविद्यार्णव आदि कई ग्रंथों को देखने से उनके जपनीय मंत्र मुख्य रूप से दो प्रकार के मिलते हैं। प्रथम मंत्र है− ओम घृणि सूर्य आदित्य ओम' तथा द्वितीय मंत्र है− ओम ह्रीं घृणि सूर्य आदित्यः श्रीं ह्रीं मह्मं लक्ष्मीं प्रयच्छ'। इस मंत्र का मूल तैत्तिरीय शाखा के नारायण−उपनिषद में प्राप्त है, जिस पर विद्यारण्य तथा सायणाचार्य− दोनों के भाष्य प्राप्त हैं। इनकी उपासना में इनकी 9 पीठ शक्तियों− दीप्ता, सूक्ष्मा, जया, भद्रा, विभूति, विमला, अमोघा, विद्युता एवं सर्वतोमुखी की भी पूजा की जाती है।
सूर्य की आराधना से महाराज राज्यवर्धन को दीर्घ आयु की प्राप्ति− भगवान श्रीराम के पूर्वज सूर्यवंशी राजा दम के पुत्र महाराज राज्यवर्धन बड़े विख्यात नरेश हुए हैं। वे अत्यन्त सजगता से धर्मपूर्वक अपने राज्य का शासन करते थे। उनके राज्य में सभी लोग सुखी एवं प्रसन्न थे। प्रजा धर्म के अनुसार रहकर ही विषयों का उपभोग करती थी। दीनों को दान दिया जाता एवं यज्ञों का आयोजन होता रहता।

गाय रखकर कर सकते हैं वास्तु दोषों का निवारण-स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज

 परम पूजय स्वामी चिन्मय नन्द जी महाराज समय समय पर अपने भक्तो का मार्ग दर्शन करते रहते है आज जब उनके दर्शन हुए तो वास्तु दोष और गाय का जिकर हुआ तो स्वामी जी महाराज के श्री मुख से जो पवितर शब्द निकले उन्हें सुन कर मेरी जिज्ञासा वास्तु और गाय के परति और बड़ गयी !स्वामी जी ने बताया के  गाय का भारतीय संस्कृति में विशिष्ट स्थान है। यह सदा से भारतीय जन-जीवन की धुरी रही है। प्राचीन काल में हमारे देश में सर्वाधिक सम्पन्नता के स्तर का मापक गाय ही हुआ करती थी। देशी-विदेशी चिकित्सा प्रणालियों में गाय की बड़ी महिमा है।  गाय को भी देवता के समान माना गया है। गर्ग संहिता के अनुसार नौ लाख गाय रखने वाले को नंद, पांच लाख गायों के मालिक को उपनंद। दस लाख गाय वला 'वृषभानु' एंव एक करोड़ गायों को पालक को 'नंदराज' कहा जाता था। श्रीकृष्ण का नाम आते ही उनके चारों ओर गाय-बछड़ों एवं गोप-ग्वालों का चित्र हमारे मानस पटल पर आ जाता है।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के गोदुग्ध पीने से हमें सतत शक्ति एवं स्फूर्ति मिलती है। गोमूत्र सेवन से शरीर रोगमुक्त होता है।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के जिस स्थान पर भवन या घर का निर्माण करना हो तो यदि वहां बछड़े वाली गाय को बांधा जाए तो वहां वास्तु दोषों का निवारण हो जाता है। कार्य निर्विध्न पूरा होता है और समापन तक आर्थिक बाधाएं नहीं आती।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के गोधूली का समय विवाह के लिए सर्वोतम माना गया है। जब गायें जंगल से चरकर वापस घर आती है उस समय को गोधूली वेला कहते हैं।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के  यात्रा के समय गाय सामने पड़ जाए तो यात्रा सफल होती है।
 स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के किसी भी जन्मपत्री में सूर्य नीच राशि तुला पर हो या अशुभ स्थिति में हो अथवा केतु द्वारा परेशानियां आ रही हो तो गाय की पूजा करनी चाहिए, दोष समाप्त होंगे।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया केविष्णु पुराण में कहा गया है जब श्रीकृष्ण पूतना के दुग्धपान से डर गये तो नन्द दम्पनी ने गाय की पूंछ घुमाकर उनकी नजर उतारी और भय का निवारण किया।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के संतान लाभ के लिए गाय की सेवा का अच्छा उपाय कहा गया है। शिवपुराण के अनुसार गाय की सेवा करने वालों को यम का भय नहीं रहता।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के आयुर्वेद में गाय के घी को आयु कहा गया है। गाय का घी सेवन करने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है।
 स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के गोमूत्र में कार्बोलिक एसिड होता है जो कीटानाशक है और शुद्धता बढ़ाता है। इसमें स्वर्णक्षर मौजूद रहता है जो अति उपयोगी रसायन है।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के गाय भारतीय कृषि का आधार है। बिगड़ी भूमि को सुधारने एवं उर्वराशक्ति को बढ़ाने के लिए गोबर का उपयोग हजारों वर्षों से खेती के लिए किया जा रहा है।
 स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के गोमूत्र में सोलह प्रकार के खनिज तत्व होते हैं जो शरीर के रक्षण, पोषण और विकास में सहायक है। इसके समुचित सेवन से रोग-रोधक शक्ति बढ़ती है। शरीर शक्तिशाली एवं चेतनायुक्त होता है।
 स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया केगाय के सींगों का बनावट पिरामिड जैसा होता है। वह एक शक्तिशाली एंटीना के रूप में कार्य करती ह। सींगों की मदद से गाय आकाशीय ऊर्जाओं को शरीर में संचित कर लेती है। वहीं ऊर्जा हमें गोमूत्र, दूध ओर गोबर द्वारा मिलता है।
गाय के दूध में कैरोटीन नामक पदार्थ भैंस के दूध से दस गुना अधिक होता है। भैंस का दूध गर्म करने पर उसके सर्वाधिक पोषक तत्व मर जाते हैं। जबकि गाय का दूध गर्म करने का भी वैसे ही पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के देशी गाय पूर्णतय शाकाहारी पशु है जबकि जरसी गाय मांसाहारी जंगली पशु है। जरसी गाय के भोजन में मांस का टुकड़ा मिला दिया जाए तो बड़े चाव से खा जाती है।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के धार्मिक मान्यता के अनुसार भारतीय गोवंश का उद्गम जंगल से नहीं बल्कि समुद्र मंथन से प्राप्त गोमाताओं से है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भारतीय गोवंश का मूल स्रोत 'औरक्तस' नामक पशु है जिसने 18 लाख वर्ष पूर्व भारत में जन्म लिया था।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के क्रासबीडिंग करना अथवा विदेशी गायों की ओर देखना छोड़कर हमें अपनी भारतीय नस्ल की गायों को उचित महत्व देना चाहिए।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया केगौमाता की कृपा से गोभक्तों का आगामी वंश भी संस्कारवान होता है। गोसेवा करने वाला निश्चिंत रहता है। 

स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के 
जा घर होय तुलसी अरू गाय।
ता धर वैद्य कबहुं नहीं जाए।।
स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बताया के अगर किसी को भी वास्तु दोष से सम्बंदित कोई जानकारी लेनी हो तो वो मेरे व्हट्सूप नंबर 09050760954 पर संपर्क कर सकता है !

कोई हादसा नहीं हुआ था नेताजी के विमान के साथ?

विदेशी धरती से भारत की आजादी के लिए महासंग्राम छेड़ने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में 66 साल बाद भी रहस्य बरकरार है। उनके बारे में अनेक किस्से कहानियां हैं लेकिन सच कभी सामने नहीं आया। अट्ठारह अगस्त 1945 को ताइवान में जिस विमान हादसे में नेताजी की मौत हो जाने की बात कही जाती है ताइवान सरकार के अनुसार उस दिन कोई विमान हादसा हुआ ही नहीं था। नेताजी के रहस्य पर पुस्तक लिख चुके अनुज धर का मानना है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ऊपर विमान हादसे और नेताजी की मौत की कहानी यकीन से परे है। उनका कहना है कि नेताजी की मौत का सच जानबूझकर छिपाया जा रहा है।
ताइवान में कथित विमान हादसे के समय नेताजी के साथ रहे कर्नल हबीबुर रहमान ने इस बारे में आजाद हिन्द सरकार के सूचना मंत्री एसए नैयर रूसी तथा अमेरिकी जासूसों और शाहनवाज समिति के सामने जो विरोधाभासी बयान दिए उनसे यह रहस्य और भी गहरा गया। रहमान ने कभी कहा कि उन्होंने ही नेताजी के जलते हुए कपड़े उतारे थे तो कभी कहा कि वह विमान हादसे में खुद बेहोश हो गए थे और जब आंख खुली तो वह ताइपेई के एक अस्पताल में थे। कभी उन्होंने कहा कि नेताजी का अंतिम संस्कार 20 अगस्त 1945 को हुआ तो कभी अंतिम संस्कार की तारीख 22 अगस्त बताई।
मिशन नेताजी से जुड़े अनुज धर ने कहा कि जब उन्होंने इस बारे में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सरकार से सच जानना चाहा तो सरकार ने सूचना उपलब्ध कराने से ही मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इससे यह बात बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है कि सरकार जानबूझकर नेताजी के बारे में सच छिपा रही है। आजाद हिन्द फौज में शामिल रहे बहुत से सैनिक और अधिकारी दावा कर चुके हैं कि विमान हादसे में नेताजी की मौत नहीं हुई थी। वह आजादी के बाद भी जीवित रहे लेकिन घटिया राजनीति के चलते सामने नहीं आ पाए और गुमनामी का जीवन जीना बेहतर समझा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित मौत की जांच के लिए बनाई गई शाहनवाज समिति ने जहां विमान हादसे की बात को सच बताया था वहीं इस समिति में शामिल नेताजी सुभाष चंद्र के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और कहा था कि विमान हादसे की घटना को जानबूझकर सच बताने की कोशिश की जा रही है।

आजाद हिन्द फौज के कई सेनानियों का दावा है कि फैजाबाद में रहने वाले गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे और उन्होंने इस रूप में नेताजी से गुप्त मुलाकातों का दावा भी किया है। इस बारे में सच से परदा हटाने के लिए 1999 में गठित मुखर्जी आयोग ने 18 अगस्त 1945 को विमान हादसे में नेताजी की मौत को खारिज कर दिया तथा कहा कि इस मामले में आगे और जांच की जरूरत है। आयोग ने आठ नवम्बर 2005 को अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सौंपी थी। 17 मई 2006 को इसे संसद में पेश किया गया जिसे सरकार ने मानने से इंकार कर दिया।

भारत में ही सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं अल्पसंख्यक

क्या हिन्दुत्ववादी उग्रता का प्रचार अतिरेक ''अल्पसंख्यकों'' में उन्मादी अभिव्यक्ति का कारण बन रहा है। यह प्रश्न इसलिए किया जाने लगा है क्योंकि कतिपय चोरी या किसी आस्था के भवन पर पत्थरबाजी की घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस ढ़ंग से उछाला जा रहा है उससे यह आभास होता है कि विश्वभर में सबसे अधिक अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित हैं तो वह भारत हैं। क्या यह सही आंकलन है? और क्या इसाई और इस्लाम मतावलम्बियों को भारत में आम नागरिकों समान मिले संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। कुछ चोर उच्चकों की गतिविधियों को हिन्दुत्ववादी संगठनों पर आरोप मढ़ने का प्रयास एक गहरी साजिस के तहत किया जा रहा है। जिसका शिकार हमारा प्रबुद्ध वर्ग हो रहा है। इस प्रकार असाद्दुदीन ओवैसी अरशद मदनी और आजम खान में 'मुस्लिम नेता' बनने की होड़ में उग्र अभिव्यक्ति की स्पर्धा माहौल को बिगाड़ रही है।
अल्पसंख्यकों का भारत में उत्पीड़न बढ़ रहा है सबसे पहले तब उछाला गया, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह आरोप और अधिक प्रकोपित ढ़ंग से शायद इसलिए उछाला जा रहा है क्योंकि वर्षों तक उन पर बिना सबूत उस दंगे को उभारने का आरोप लगाया गया जो गोधरा रेलवे स्टेशन पर एक रेल बोगी में आग लगाकर 69 कारसेवकों को जीवित जला देने के अत्यंत नृशंस घटना की प्रतिक्रिया स्वरूप घटित हुआ था और जिसको नियंत्रित करने के लिए तत्कालीन मोदी सरकार ने जो सुरक्षात्मक कदम उठाये थे, उसमें अब तक के किसी भी दंगे में पुलिस की गोली से मरने वाले हिन्दुओं को सर्वाधिक होने के बावजूद, उसका संज्ञान नहीं लिया गया। जिस ''हिडेन एजेंडा'' शब्दावलि का अविष्कार वाजपेयी शासन के संदर्भ किया गया था, उसे ही मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद फिर से दोहराया जाने लगा है। क्यों? क्योंकि सरकार पर कुशासन, भ्रष्टाचार आदि के आरोप जो आमतौर पर प्रत्येक कांग्रेसी सरकार के साथ नत्थी है, उसका कोई अवसर न तो वाजपेयी की सरकार के खिलाफ मिला और न अब मिल पा रहा है। जिन्हें सरकार का विरोध करना है, उनके लिए ''अल्पसंख्यक'' उत्पीड़न भारतीय जनता पार्टी तथा संघ परिवार के संगठनों को पदनाम करने के लिए सर्वोत्तम हथियार समझ में आता है।
यदि आंकड़ों में जाएँ तो जितने दंगे कांग्रेस के शासनकाल में हुए और जितने देशहित विरोधी आचरण करने वाले उस काल में उभरे उसके प्रमाण में भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में कुछ भी नहीं हुआ। अभी जिस हाशिमपुरा हत्याकांड में न्यायालय ने सभी आरोपियों को बरी किया है, उसमें पीएसी घरों से निकालकर मार डालने और लाशों को नहर में फेंक देने जैसा आरोप भाजपा ही नहीं किसी भी गैर कांग्रेसी सरकार पर नहीं लगाया गया है। यह घटना केंद्र में और राज्य दोनों में कांग्रेसी सरकार रहते घटित हुई है। मुजफ्फरनगर का दंगा भाजपा नहीं राज्य में सपा और केंद्र में कांग्रेसी सरकार के समय में हुआ है। गुजरात के दंगे के संदर्भ में भी अनेक कल्पित आरोपों की फेहरिश्त में भी यह आरोप शामिल नहीं है कि सरकार या सशस्त्र बल ने अल्पसंख्यकों पर हमला किया।
लेकिन भाजपा का सत्ता में आने से रोकने या सत्ता में आने के बाद बदनाम करने के लिए उसके विरोधियों के पास एक ही मुद्दा है अल्पसंख्यक उत्पीड़न। चोरी करने वाले भी हिन्दुत्ववादी या दक्षिणपंथी अर्थात संघ द्वारा प्रेरित बताने की होड़ केवल राजनीति असरवादी लोगों के बीच नहीं है, प्रबुद्ध समझे जाने वाले लोग भी इस संदर्भ भ्रमित होकर जो अभिव्यक्ति कर रहे हैं, उसके दुष्परिणाम की ओर उनका ध्यान नहीं जा रहा है। कुछ अवांछनीय तत्वों की हरकतों को दक्षिण की संज्ञा प्रदान करने की अभिव्यक्ति का उपयोग सेवा से धर्मान्तरण अथवा शस्त्र से या छल से धर्मान्तरण करने वालों को जिस रूप में मुखरित होने का अवसर प्रदान कर रहा है, वह बहुत खतरनाक दिशा में बढ़ते जाने का संदेश दे रहा है। पाकिस्तान हमारा पड़ोसी देश है। वहां हिन्दुओं और इसाइयों का जैसा उत्पीड़न हुआ है और हो रहा है उसकी दूसरी मिशाल नहीं मिल सकती। यहीं नहीं तो वहां की सत्ता संभालने वाले वर्ग ने इस्लामी वर्ग ने इस्लामी आस्था वाले तमाम संप्रदायों को न केवल गैर इस्लामी घोषित कर दिया है बल्कि उनका कत्लेआम जारी है। क्या है अरब देशों में जहां अपनी आत्मिक आस्था के अनुसार गैर इस्लामी लोगों को द्वारा आने घर के भीतर की अनुष्ठान करना अपराध की श्रेणी में रखा गया है और उन्हें मृत्युदंड दिया गया है। जो मानवाधिकार के लम्बरदार हैं क्या उन्होंने कभी यह भी विचार किया है चाहे अमेरिका हो या अफ्रीका इसाई मतावलम्बी लोगों ने स्थानीय लोगों पर कैसा अत्याचार किया है।
दुनिया भर में भारत एक ऐसा देश है और सदैव रहा है जहां अपनी आस्था के अनुसार आचरण करने का सभी को समान अवसर की गारंटी मिली है। यह गारंटी संविधान में गारंटी देने के पूर्व सनातन काल से चली आ रही है। यहां न तो कोई नादिरशाह हुआ न अब्दालीन मोहम्मद गोरी व गजनवी जिसने तलवार के बल पर आस्था परिवर्तन करता। और न कोई ऐसी संस्था जिसने इसाई मिशनरियों के समान निर्धनता वाले समूह को लक्ष्य कर ''सेवा'' के नाम पर धर्मान्तरण भारत के जिन मनीषियों ने विदेशों या इस देश में भी अपने अभिमत का प्रचार किया है, वह उस समूह या व्यक्ति के साथ जिन्हें प्रबुद्ध माना गया है। हमारा यह आचरण आज भी जारी है यही कारण है कि पीडि़त मानवता को प्रकृति के शोषण के कारण−जिन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, उससे उबरने का एकमात्र तरीका भारत के प्रकृति के साथ तादात्म को माना जा रहा है। यह पक्ष ऐसा है जिसका बहुत विसतार किया जा रहा है। विदेशी इसाई मिशनरियों की भेदभाव मुक्त आचरण के खिलाफ स्वदेशी इसाई संगठनों का अभियान उनके आचरण की गवाही देता है।
यहां पर मेरा उद्देश्य इस अभियान के फलस्वरूप भयभीत ''अल्पसंख्यकों'' में उनमादी अभिव्यक्ति की जो होड़ चल पड़ी है उसके दुष्परिणाम के प्रति सतर्क करना है। भारतीय राष्ट्रवाद को खंडित करने के लिए अंग्रेजी हुकुमत ने बंगाल का विभाजन करने में असफलता के बाद ढाका के नवाब को मुखौटा बनाकर 1906 में मुस्लिम लीग को जन्म देकर वैमनष्यता और उन्माद के जिस दौर में डाल दिया है वह लाखों लोगों की हत्या और भारत विभाजन के रूप में सामने आया। वह उन्माद 1947 के बाद दब तो गया था, लेकिन अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक में भारतीय नागरिकों का वर्गीकरण चलता रहा। जिसके फलस्वरूप अविश्वास की खाई गहराती गई। इसी खाई का और चौड़ीकरण हो रहा है। यदि किसी को घर छोड़ने का अधिकार है तो उसे वापिस होने के अधिकार से कैसे वंचित किया जा सकता है। यदि किसी को ''सेवा'' के नाम से घर से उजाड़ा जा सकता हे, भय और सत्ता के अत्याचार से बेघर किया जा सकता है तो घर की एकता के महात्म को समझाकर उसकी वापसी को क्यों रोकने के दुराग्रह की पैरवी की जा रहा है। यह प्रयास एक देश एक जन की भावना को खंडित करता है और जिन्हें खंड−खंड स्थिति में अपना महल खड़ा करने का एकमात्र उपाय ही समझ में आता है उनके लिए अनुकूलता प्रदान करता है। इसके कितने खतरे हैं?
सबसे ज्यादा दंगे इस माहौल के कारण ही हुए आजादी के प्रारम्भिक वर्षों को छोड़कर इन दंगों में जनधन की सर्वाधिक हानि ''अल्पसंख्यकों'' की ही हुई। अब तक के आंकड़े तो यही बताते हैं कि सबसे ज्यादा दंगाई जो पुलिस की गोली से मारे गए वे अल्पसंख्यक ही थे। उनके प्रति ''बहिष्कार'' की भावना से उनका ही सब से ज्यादा हानि हुई। जिन्होंने पाकिस्तान बनाया उन्होंने भारतीय मुसलमानों का क्या भला किया। आज भी कुछ मुस्लिम नेता जो उन्माद पैदा कर रहे हैं तथा उनका इतिहास सौदेबाजी का नहीं रहा है और यह सब क्या सौदे बाजी के लिए नहीं कर रहे हैं। जहां तक इसाई मिशनरियों का सवाल है तो वे घोषित रूप से धर्मान्तरण के लिए ही 'सेवा' कर रहे हैं अब जबकि आत्म जागृति के लिए सेवा करने वाले उनके उद्देश्य में बाधक बन रहे हैं, कहीं चोरी होने कहीं पत्थर फेंकने की घटना को अपनी पोल खुलने से भयभीत होकर अंतरराष्ट्रीय प्रचार से जूलियन रिवेरो जैसे भारतीयों के लिए आदर्श व्यक्ति को भी भ्रमित कर रहे हैं।

लूट और बलात्कार की देश में जितनी घटनाएँ हो रही हैं उसमें ''अल्पसंख्यकों'' की संख्या एक या दो प्रतिशत से अधिक नहीं है। अठठानबे प्रतिशत तो बहुसंख्यक अर्थात हिन्दू ही इसके शिकार हैं। कानून व्यवस्था के इस मसले को हिन्दुओं ने कभी भी मजहबी वस्त्रों ढककर सांप्रदायिक उन्माद ही बढ़ाया। यह सब अल्पसंख्यक के नाम पर हो रहा है। क्या कश्मीरी पंडितों से अधिक किसी का उत्पीड़न और शोषण किसी का हुआ है। क्या उनसे अधिक किसकी माताओं−बहनों की अस्मिता लूटी गई है? कौन देशी या विदेशी मानवाधिकार संगठन या व्यक्ति या अल्पसंख्यकों का हितैशी या सेक्युलरिज्म का अलमबरदार उनके लिए मुखरित हुआ है। यदि देश पहले मजहबवाद में का आग्रह सांप्रदायिक है, सेक्युलरिज्म विरोधी है तो देशभक्ति क्या है? एक बात और ''अल्पसंख्यकों'' से बहुत स्पष्ट कहने में परहेज नहीं करना चाहिए उनके लिए जो छाती पीट रहे हैं उनके अतीत की गतिविधियों पर भी दृष्टिपात करें अन्यथा देश की मुख्यधारा से उनकी दूरी बढ़ती जायेगी और इस बढ़ती दूरी के कारण उनको मजहबी समानता के आधार पर भड़का कर अपना उल्लू सीधा करने वाले लाभ उठाते रहेंगे। कोई भी सरकार बहुमत से बनती है। मोदी सरकार भी बहुमत से बनी है। उसका लक्ष्य सवा सौ करोड़ भारतीय हैं। इनमें अलपसंख्यक भी शामिल हैं। यदि सरकार इस लक्ष्य से भटकी है तो उस पर अवश्य लोकतांत्रिक प्रहार करें। इस तथ्य की उपेक्षा नहीं की जा सकती कि मजहबी या पांथिक उन्माद एकपक्षीय नहीं रह सकता वह उभयपक्षीय होता है और उसके क्या परिणाम होते हैं इसके ब्यौरे में जाने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता है अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक की अवधारणा के अन्त की। उभारना है एक देश एक जन की भावना को।
राजनाथ सिंह 'सूर्य' 

पंजाब में हथियार रखने वालों को विवरण प्रस्तुत करने को कहा

पंजाब में निजी हथियार रखने वालों को 15 सितंबर तक विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उनके हथियारों का लाइसेंस रद्द समझा जाएगा। एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया, ‘‘सभी हथियार लाइसेंसधारी 15 सितंबर तक सुविधा केन्द्रों में अपना व्यक्तिगत और हथियार का विवरण प्रस्तुत करें जिससे नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) में इसे दर्ज किया जा सके।’’
उन्होंने बताया कि एक बार एनडीएएफ में विवरण दर्ज करने के बाद लाइसेंसधारी को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) दी जाएगी। उन्होंने बताया, ‘‘अगर कोई लाइसेंसधारी 15 सितंबर तक विवरण प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो उनका यूआईडी नंबर नहीं आएगा और उसके बाद एक अक्तूबर से उसके हथियार का लाइसेंस रद्द माना जाएगा।’’ इस समय पंजाब में लगभग चार लाख निजी हथियारधारी हैं।

‘बिग बॉस 9’ के पहले प्रोमो में सलमान लाए ‘डबल ट्रबल’

 08 सितंबर 2015    मुंबई 
मशहूर रिएलिटी शो ‘बिग बॉस’ का पहला प्रोमो जारी हो चुका है। प्रोमो में अपने अलग ही अंदाज में नजर आने वाले सुपरस्टार और प्रस्तोता सलमान खान एक नए ‘डबल ट्रबल’ के सिद्धांत की घोषणा कर रहे हैं। 30 सेकेंड की इस क्लिप की शुरूआत में एक आदमी और औरत को बिग बॉस के घर में एक ही कमीज में फंसे हुए दिखाया गया है। वहीं सलमान उनकी इस परेशानी पर हंसते हुए दिखाई दे रहे हैं।
‘बजरंगी भाईजान’ के 49 वर्षीय स्टार सलमान इसके बाद कहते हैं, ‘‘यहां, एक व्यक्ति दूसरे की परेशानी का कारण बनेगा क्योंकि वन प्लस वन डबल ट्रबल हो जाता है। इस बार यह मजेदार होने वाला है।’’ इस सिद्धांत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। वहीं पर्दे पर नौंवे सत्र का नाम ‘‘बिग बॉस डबल ट्रबल’’ लिखा दिखाई देता है। सलमान ने प्रोमो की शूटिंग पिछले सप्ताह की थी। आगामी सत्र के जरिए वह छठी बार इस शो के प्रस्तोता के रूप में लौटेंगे।

पिछले पांच सत्रों से इस शो की मेजबानी कर रहे सलमान अंतिम सत्र को ‘बिग बॉस हल्ला बोल’ नामक सीमित श्रृंखला के रूप में विस्तार दे दिए जाने पर इससे अलग हो गए थे। तब फिल्मकार फराह खान ने इस विस्तारित कड़ी की मेजबानी की थी। नए सत्र में एक बार फिर इस घर में तीन माह के लिए मशहूर हस्तियां बंद रहेंगी। उनकी हर हरकत पर कई कैमरों की नजर रहेगी।

Saturday, September 5, 2015

विशव को कैंसर मुकत करना ही मेरे जीवन का उदेशय है -स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज

स्वामी चिन्मय नन्द जी महाराज जिनको आज देश विदेश में करोड़ो लोग जानते है कैंसर स्पेसलिस्ट के रूप में ,जिनके प्रयासों से कई लोग कैंसर जैसे भयानक दैत्य रुपी बीमारी से छुटकारा पा  कर अपना जीवन सवस्थ हो कर ख़ुशी ख़ुशी जी रहे है ! आज भगवन श्री कृष्ण जी के जनम दिवस पर परम पूजय स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बातचीत में बताया के सबसे पहले में  दुनिया भर के लोगो को  आज भगवन श्री कृष्ण जी के जनम दिवस की शुभकामनाये देता हु वही आपको बता दू के आज के ही दिन प्रभु किरपा से मेरा जनम दिन भी है !इस दिन मै आपको एक गुड़ रहसय की बात बता रहा हु कि  अगर आपके आसपास या किसी भी परिचित या अपरिचित को केंसर जैसी भयन्कर बीमारी या कैंसर का शक भी हो किसी भी प्रकार का कैंसर हो तो आप उस व्यकित  के घर पर जाये ओर उसके परिवार या खुद मरीज को समझाये की उसकी जो भी दवाएं केंसर की चल रही हे चलने दे ओर वह साथ मे शीशम के पेड के पत्तों का ज्युस भी दस से पंद्रह दिनों तक लेवें ओर उसके बाद शीशम के पत्ते को चबाना हर रोज शुरू करें देखते देखते ही आपको केंसर के मरीज के अंदर शानदार बदलाव आने दिखने लगेंगे  ओर यह बिमारी  जड़ खत्म होजाती है स्वामी जी ने कहा के  आपका ओर मेरा छोटा सा प्रचार किसी के भी परिवार मे वापिस खुशियां ला सकता हे तो कृपया आज से ही आप लोगो को कैंसर के प्रति जागरूक करना शुरू कर दे  !क्यों के  दुःख दुसरो को हो या अपनों को दुःख दुःख होता है! परम पूजय स्वामी चिन्मय नन्द जी महाराज ने कहा के कोई भी व्यक्ति कभी भी मेरे व्हाट्स उप नंबर 09050760954 पर बात कर सकता है ! समरण रहे के स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज ने बीते कई वर्षो से विशव को कैंसर मुकत करने का अभियान चला रखा है जिसमे आप सभी से विनर्म सहयोग की कामना करते है !
विशव को कैंसर मुक्त करना ही मेरे जीवन का उदेशय है -स्वामी चिन्मयानन्द जी महाराज 

स्टूडेंट से गैंगरेप के बाद हत्या: कब, कैसे और कहां हुई वारदात ये भी पता नहीं

लुधियाना। न्यू जनता नगर में 12वीं की स्टूडेंट को किडनैप कर रेप व हत्या करने के मामले में 16 घंटे तक सोई रहने वाली पुलिस घटना के 60 घंटे बीतने के बाद भी हवा में तीर मार रही है। पुलिस ने शुक्रवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पांच मिनट में ही प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर मुख्य आरोपी लक्ष्मण शर्मा को गिरफ्तार कर मामले को सुलझाने का दावा किया। लेकिन घटना कब, कहां और कैसी हुई इसकी पुलिस को जानकारी नहीं दी।
यहां तक कि पुलिस ने आरोपी को भी पेश नहीं किया। आरोपी पीड़िता के पड़ोस में रहता है। हड़बड़ी में बुलाई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को डीसीपी नरेंदर भार्गव ने संबोधित करना था, लेकिन मौके पर एडीसीपी मुखविंदर सिंह भुल्लर आए। उन्होंने 7 लाइनों का प्रेस नोट जारी कर दावा किया कि मामले को सुलझा लिया है। भुल्लर ने इसके लिए लक्ष्मण शर्मा पुत्र एक नारायण शर्मा की गिरफ्तारी को दिखाते हुए कहा कि पूछताछ में आरोपी ने माना कि वह नशा करने का आदी है और अपने साथियों समेत गलती कर बैठा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडीसीपी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। वह अभी तक नशे की हालत में है। हादसे वाले दिन आरोपी पीड़िता को अपनी बाइक पर बैठा कर कहीं लेकर गया था। नशे की हालत में उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिल कर वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल दोनों आरोपी फरार है। पुलिस यह भी नहीं बता पाई कि उसके साथी 
कौन है।
मारुति 800 में ले जाकर फेंकी लाश
सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने पीड़िता का मर्डर बुधवार को शाम करीब 5 बजे किया। अंधेरा होने पर मारुति में लाश को लेकर गए और रात करीब 1 बजे जवद्दी पुल के निकट फेंका। जब एक अन्य कार ने उन्हें क्रॉस किया तो आरोपी डर के मारे कार को आगे ले गए। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार भी आरोपियों ने लाश को बरामदगी के करीब 6 घंटे पहले ही फेंका था। जिस कारण बाॅडी नर्म हो चुकी थी। लड़की के सिर के दोनों तरफ सूजन थी। जिससे लगता है कि उसके सिर का पिछला हिस्सा पहले जमीन पर मारा और फिर बाएं साइड का हिस्सा जमीन पर मारा।
आरोपियों ने पीड़िता को भी दिया था नशा 
सूत्रों का मानना है कि वारदात के दौरान आरोपी पूरी तरह से नशे में धुत थे। वारदात के दौरान आरोपियों ने स्टूडेंट को भी नशा दिया। जिस कारण उसकी हालत बिगड़ गई। स्टूडेंट ने आरोपियों का मुकाबला भी किया। लेकिन अंत में हार गई। आरोपियों ने उसके हाथ-पांव बांध कर ही उसे काबू किया।
.इधर प्रेस कॉन्फ्रेंस, उधर परिवार के बयान दर्ज 
शुक्रवार को पुलिस अफसरों ने शााम को 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और दूसरी तरफ महिला पुलिस अफसर को परिवार के बयान दर्ज करने के लिए भेज दिया। पीड़ित परिवार के घर पहुंची महिला अफसरों ने स्टूडेंट की छोटी बहन व उसकी मां के बयान दर्ज किए। जब कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से केवल 15 मिनट पहले ही पुलिस ने आरोपी के घर से उसका मोटरसाइकिल बरामद किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकारों को इस बरामदगी के बारे में बताया।
एसीपी के तबादले को बताया रूटीन 
न्यू जनता नगर में हुई वारदात के बाद इलाके में तैनात एसीपी आत्म नगर रमनदीप सिंह का तबादला पटियाला कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पुलिस की तरफ से लापरवाही व लेट लतीफी की गाज गिरी है। जब इस संबंध में पुलिस अफसरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनका रूटीन तबादला है।
मोबाइल लोकेशन से खुलासा
पुलिस अफसरों का दावा है कि मामले का खुलासा मोबाइल लोकेशन और मोबाइल नंबरों की डिटेल से हुआ। स्टूडेंट व आरोपी की जान पहचान थी। आरोपी के मोबाइल से स्टूडेंट के परिवार के साथ कई बार बातचीत होती थी। पुलिस को शक था कि वारदात से पहले दिन भी आरोपी के मोबाइल से कई कॉल पीड़ित परिवार के मोबाइल पर आए हैं। जब पुलिस ने पीड़ित परिवार के मोबाइल नंबरों को खंगाला तो उक्त आरोपी का नंबर मिला। जिस पर पुलिस ने सबसे पहले ही पीड़ित परिवार के पड़ोस में रहने वाले आरोपी को उठा कर मामले की जांच शुरू की।
कोताही दिखाने वालों पर कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर परमराज सिंह उमरानंगल ने बताया कि अभी पुलिस पार्टियां मामले को हल करने में जुटी हैं। पहले इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई पूरी की जाएगी। उसके बाद ही कोताही दिखाने वाले पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी कि मामले में तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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