Sunday, January 19, 2014

शामली और मुज़फ्फरनगर के दंगा राहत शिविर में रह रहे लोगों के हालातों पर एक रिपोर्ट

पीपल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राइट्स, दिल्ली
उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर, शामली, बाघपत, मेरठ, और सहारनपुर जिलों के ग्रामीण इलाकों में सितम्बर के पहले हफ़्ते में हुए दंगों के बाद से हज़ारों मुसलमान चार महीने से राहत शिविरों में रह रहे हैं | पिछले हफ़्ते से, उत्तर प्रदेश सरकार ने जबरन शिविर बंद करने और लोगों को वहाँ से निकालने की नीति अपना ली है | परिणामस्वरूप दंगा-पीड़ित लोग और भी ज़्यादा परेशान और असुरक्षित हो गए हैं |
पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पी.यू.डी.आर.) की तरफ से एक पांच सदस्यीय जांच दल  28 से 30 दिसंबर 2013 के बीच राहत शिविरों का दौरा करने गया | उद्देश्य था कि शिविरों में रह रहे लोगों के हालत और उन्हें हो रही परेशानियों का जायजा लेना | टीम ने 8शिविरों का दौरा किया और 60 से भी ज्यादा गाँवों के लोगों से बातचीत की | शामली ज़िले में टीम ने मलकपुर, बर्नावी, कांधला, और मदरसा(शामली शहर) शिविरों का दौरा किया | मुज़फ्फरनगर ज़िले में टीम ने लोई, शाहपुर, जोगिया-खेडा और जॉला शिविरों का दौरा किया | इसके साथ, टीम ने 5 अन्य शिविरों के लोगों से मुलाक़ात की | कुल मिलाकर पी.यू.डी.आर. ने 13 शिविरों के लोगों से बातचीत की | टीम ने शामली के ज़िला अधिकारी, मुज़फ्फरनगर के अतिरिक्त ज़िला अधिकारी, फुगाना थाना के थाना अधिकारी (एस.एच.ओ.), लोई और जोगिया खेडा गाँव के प्रधान, सवास्थ्य-कर्मियों, शिक्षकों, पत्रकारों, धार्मिक संगठनों के सदस्यों, शिविर समितियों के सदस्यों, और अन्य गैर-सरकारी संस्थाओं से जुड़े राहत कर्मियों से बातचीत की |
टीम के मुख्य निष्कर्षों का सारांश इस प्रकार है -
1.      जबरन राहत शिविरों से दंगा-पीड़ितों का निकाला जाना
दुर्भाग्य से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मामले की सुनवाई और मीडिया द्वारा पीड़ितों के हालातों के बारे में लगातार ख़बरें दिए जाने का उल्टा असर हुआ है | प्रशासन अब शिविरों को बंद करने पर तुल गया है और लोगों को हटाने के लिए अब तरह-तरह के तरीके अपनाए जा रहे हैं | जैसे कि पीड़ितों के खिलाफ़ सरकारी ज़मीन पर अनधिकृत रूप से रहने के लिए मामला दर्ज़ कराना, राहत शिविर समितियों पर दबाव डालना, बड़े पैमाने पर लोगों को डराने के लिए पुलिस और अफसरों की मौजूदगी और दंगा पीड़ितों कि बड़ी बस्तियों को तोड़ना |
29 और 30 दिसंबर को लोई शिविर में रह रहे खरड गाँव के सौ से भी ज़्यादा परिवारों को किसी सरकारी बैरक में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जा रहा था | उन्हें यह कहकर हटाया जा रहा था, की ऐसा उन्हें ठण्ड से बचाने और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किया जा रहा है | इन्हें अभी तक पुनर्वास मुआवज़ा नहीं मिला है |
यह स्पष्ट है की दंगों के बाद लोग अपने गाँव वापस जाने के ख्याल से ही असुरक्षित महसूस कर रहे हैं | उन मामलों में यह असुरक्षा और भी ज्यादा है जिन में हमलावरों के खिलाफ केस तक दर्ज़ नहीं किया गया है और हमलावर उन्हें धमकाते हुए खुले घूम रहे हैं | इसके बावजूद अन्य गावों के परिवारों को शिविर छोड़कर अपने-अपने गाँव जाने के लिए कहा जा रहा था  |
2.      सरकारी एजेंसियों द्वारा राहत मुहैय्या कराने में उदासीनता
हमारी टीम ने पाया की एक भी राहत शिविर ऐसा नहीं था जिसे सरकार ने शुरू किया हो या जिसका प्रबंधन सरकार द्वारा किया जा रहा हो | ज़्यादातर राहत शिविर मुसलमान-बाहुल्य गाँवों के पास पाए गए, जहां पीड़ित लोग दंगों के दौरान भागकर आये थे |
हर शिविर में हमें प्रशासन की ओर से राहत सामग्री और सुविधाएं मुहैय्या कराने में उदासीनता के बारे में बताया गया | शिविर शुरू होने के 2 हफ्ते बाद से ही प्रशासन द्वारा राहत सामग्री उपलब्ध कराई जानी शुरू की गयी | 1 अक्टूबर के बाद प्रशासन ने शिविरों में खाद्य सामग्री भेजनी भी बंद कर दी गई, जॉला और जोगिया खेडा शिविरों में भी हमें ऐसा बताया गया | शीत लहर के निकट आने और 21 नवम्बर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रशासन को राहत सामग्री दोबारा मुहैय्या कराने के आदेश के बाद भी गरम कपड़े या कम्बल उपलब्ध नहीं करवाए गए |
दिसंबर में जब प्रार्थियों ने, शिविरों में हुई 39 मौतों के बारे में सबका ध्यान केन्द्रित किया, तब जाकर प्रशासन ने 5 शिविरों में प्रत्येक परिवार के लिए दवाइयाँ और200 मी.ली. दूध बांटना शुरू किया |
शिविरों में बहुत सारे विद्यालय जाने वाले छात्र भी हैं | हालांकि कुछ जगहों पर प्राथमिक विद्यालयों की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं हैं पर बड़ी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई रुक गई है | पास के विद्यालयों में दाखिला देने से मना किया जा रहा है | सबसे बुरा प्रभाव तो छात्राओं पर हुआ है | और जिन बच्चों की पिछले साल बोर्ड की परीक्षा थी वे तो इम्तिहान देने का मौका खो ही चुके हैं | इन बच्चों ने न सिर्फ अपना एक साल गवाया है, बल्कि अब इनकी आगे की पढ़ाई बंद हो जाने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं |
स्वास्थ्य सुविधायें न के बराबर हैं | ज़्यादातर शिविरों में थोड़ी-बहुत दवाइयां ही बांटी जा रही  हैं | शामली के ज़िला अधिकारी ने इस बात पर खेद भी जताया और इसका दोष खुद के ज़िले में उदासीन स्वास्थ्य सेवाओं पर मढ़ दिया | कई महिलाओं ने शिविरों में ही बच्चों को जन्म दिया है और कई गर्भावस्था के आखिरी पढ़ाव पर हैं | एक अच्छे स्त्रीरोग विशेषज्ञ की सुविधायें पूरे ज़िले में कहीं उपलब्ध नहीं हैं, शिविरों में तो दूर की बात है | इन महिलाओं को पौष्टिक खाना उपलब्ध करवाने का प्रयास भी नहीं किया गया है | फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक समिति का गठन किया गया है जो शिविरों में हुई 34 बच्चों की मृत्यु के कारणों कि जांच कर रही है.
  1. वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा सूचित राहत शिविरों की संख्या असल संख्या से कम
दिसंबर में राज्य सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायलय में दर्ज़ कराये गए एक शपथ-पत्र में कहा गया है की सितम्बर महीने में 58 शिविर चल रहे थे | शपथ-पत्र के अनुसार यह आंकड़ा घटकर दिसंबर में 5 हो गया था (4 शामली में और 1 मुज़फ्फरनगर में ) | हमारी टीम द्वारा यह कथन बिलकुल असत्य पाया गया |
शिविर-वासियों ने हमें बताया की 25 गाँवों में राहत शिविर चल रहे हैं | इनमें से कुछ गाँवों में एक से अधिक शिविर भी हैं | हमारी टीम द्वारा 13 ऐसी जगहों का दौरा स्वयं किया गया और अभी भी शिविर चल रहे हैं | कई पीड़ित लोगों को ठण्ड के कारण पास के घरों में शरण दिलाई जा चुकी है | इसलिए जितने लोग हमें शिविरों में दिखे, वे ज़ाहिर तौर पर असल में शिविरों में रह रहे लोंगों से कम ही थे |
30 दिसंबर को लोई शिविर में टीम की मुलाक़ात मुज़फ्फरनगर के अतिरिक्त ज़िला अधिकारी से हुई | उन्होंने जो हमें बताया उससे हम सबसे ज़्यादा अचम्भित हुए | उनका कहना था कि शाहपुर गाँव में कोई शिविर नहीं चल रहा | ठीक एक घंटे के बाद हमारी टीम ने शाहपुर में 3 क्रियाशील शिविर देखे |
सरकारी सूची से इतने सारे शिविरों का छूट जाना प्रशासन के बेरुखे व्यवहार को दर्शाता है | परिणामस्वरूप हज़ारों पीड़ित लोग राहत के लिए निजी संस्थाओं पर निर्भर हैं | यह खुले तौर पर जनता को गुमराह करने का प्रयास है |
4.      दंगा प्रभावित लोगों के गुमराह करने वाले आंकडे
राहत शिविरों में जिला प्रशासन द्वारा स्वयं निरीक्षण न किए जाने का एक परिणाम यह हुआ है कि दंगा-पीड़ितों की संख्या का कोई एक निष्पक्ष आंकड़ा नहीं है | 4अक्टूबर 2013 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित हार्मनी कमिटी द्वारा अपनी रिपोर्ट में कुल आतंरिक तौर पर विस्थापित लोगों की संख्या 33,696 बताई गई है | इनमें लगभग 74% लोग मुज़फ्फरनगर के शिविरों में रह रहे थे, 22% कैराना, 3.3 % शामली और 0.7 % बागपत के शिविरों में | दिसंबर तक सर्वोच्च न्यायलय में जमा किये गए सरकारी शपथ-पत्र में शिविरों में रह रहे कुल पीड़ितों की संख्या 5,024 घोषित की गई |
इस आंकड़े की असत्यता राहत शिविरों पर उपलब्ध शिविर-वासियों के रिकॉर्ड से साफ़ साबित हो जाती है | राहत सामग्री के आबंटन के दौरान, प्रत्येक शिविर में राहत समिति द्वारा बनाए गए पीड़ितों के रिकॉर्ड, एकमात्र सबसे सटीक रिकॉर्ड हैं | सिटीजन फार जस्टिस एंड पीस बनाम उत्तर प्रदेश सरकार  (याचिका क्र. 170 वर्ष 2013)के मामले में प्रार्थियों द्वारा दर्ज़ कराये गए अतिरिक्त शपथ-पत्र के अनुसार 6 दिसंबर तक राहत शिविरों में 27,882 लोग रह रहे थे | हमारी टीम द्वारा 13 शिविरों के दौरे के बाद विस्थापित लोगों का जो अनुमानित आंकड़ा निकाला गया है, वह लगभग इस आंकड़े से मेल खाता है |

5.      'दंगा-पीड़ित' गाँवों और लोगों कि श्रेणी में डाले जाने में खामियां
राहत समितियों द्वारा हमें बताया गया की 162 गाँव के परिवारों ने अपना घर छोड़कर शिविरों में शरण ली है | स्वयं हमने 60 गाँवों के लोगों से बातचीत की | हालांकि सरकारी तौर पर सिर्फ 9 गाँव ही दंगा-ग्रस्त करार दिए गए | इसलिए सिर्फ 9 ही गाँवों के लोगों को सरकारी पुनर्वास पैकेज का फायदा मिल सकता है |
सबसे अधिक हत्याएं होने के आधार पर जो 9 गाँव दंगा-ग्रस्त घोषित किये गए हैं, उनके नाम हैं - लाक, लिसाड़, बहावड़ी, कुटबा, कुटबी, मोहम्मदपुर रायसिंह, काकरा,फुगाना, और मुंडभर | सरकारी पैकेज के अनुसार इन 9 गाँवों से लगभग 1800 परिवारों को दंगा-ग्रस्त चिन्हित किया गया है | ये सभी सरकारी पैकेज के तहत एक मुश्त राशि 5,00,000 रूपए प्राप्त करने के हक़दार हैं |
पर इन 9 गाँवों के लोगों के अलावा भी कई ऐसे लोग हैं जो अपने घर लौटने की स्थिति में नहीं है | उन्होंने अपने हिन्दू पड़ोसियों द्वारा धमकियों और बेइज्ज़ति का सामना किया है | सशस्त्र दंगाइयों द्वारा उनके घरों में तोड़-फोड़ और औरतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया है | जब वे पुलिस के साथ अपने घर वापस गए तो उनके घर लूटे जा चुके थे | और कुछ मामलों में जहां परिवार के लोग दंगों के दौरान भाग कर नहीं आ सके थे, वे अब तक (तीन महीने बाद भी) लापता हैं |
ये गाँव और यहाँ के मुसलमानों को दंगा-ग्रस्त नहीं माना जा रहा है और इसलिए वे पुनर्वास के हक़दार नहीं हैं | इनमें से कई लोगों ने, जिनसे हमारी टीम ने बात के दौरान बताया कि वे 7 या 8 सितम्बर की रात को घर से खाली हाथ, सिर्फ दो कपड़ों में भागकर आये थे |
6.      संदिग्ध पुनर्वास पैकेज और उसकी शर्तें
राज्य सरकार का हर परिवार के लिए 5 लाख रुपयों के एक मुश्त पुनर्वास पैकेज में बहुत समस्याएँ हैं | यह पैकेज न तो गाँव में घर के आकर पर आधारित है और न ही घर में बसे परिवारों की संख्या पर | इसलिए 9 चिन्हित गावों में से भी, शिविर में रह रहे हर परिवार को 5 लाख रूपए नहीं मिल पाए हैं | जहां एक ही घर में एक से ज़्यादा परिवार रह रहे थे, वहाँ यह परेशानी सबसे ज्यादा देखने को मिली | इन परिवारों में, सिर्फ परिवार के मुखिया को ही रूपए दिए गए और सयुंक्त परिवार के बाकी छोटे परिवारों को नहीं दिए गए |
इसके अलावा, पुनर्वास की शर्तों के अनुसार अगर लाभार्थी कभी भी अपने घर वापस जाते हैं, तो उन्हें यह 5 लाख रूपए लौटाने पड़ेंगे | पीड़ितों के पास मौजूदा स्थिति में, जहां वे खुले आसमान के नीचे टेंटों में रह रहे हैं और घर वापस लौटने की उम्मीद बहुत कम है, पुनर्वास स्वीकार करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है | इसके बाद एक बार अगर उनसे यह रुपये खर्च हो जाते हैं, तो मजदूरी करने वाले ये परिवार कभी इन रुपयों को लौटा नहीं पाएंगे | इस प्रकार सरकारी नीति यह सुनिश्चित करती है की पीड़ित व्यक्ति कभी अपने घर लौट ही न पाएं | ऐसे में यह पुनर्वास पैकेज वास्तव में एक ऐसा क्षतिपूरक पैकेज है जो हर तरह से लोगों को हुई उनकी क्षति की भरपाई करने में नाकामयाब साबित होता है |
दूसरी तरफ, सरकार ने पीड़ितों के घरों और सामुदायिक संपत्ति जैसे मस्जिद, ईदगाह, मदरसे, कब्रिस्तान आदि की सुरक्षा के लिए कोई ज़िक्र नहीं किया है | ये संपत्तियां समय के साथ उन्हीं लोगों के हाथों में पड़ जाएंगी जो मुसलामानों के खिलाफ हिंसा करने के लिए ज़िम्मेदार हैं | इससे भविष्य में साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देने के लिए एक अच्छे आर्थिक फायदे के रूप में भी देखा जा सकता है |
आखिर में, इस पूरी प्रक्रिया में जो बात बिलकुल छिप जाती है वह है राज्य की अभियोज्यता | मुख्य रूप से, क्योंकि राज्य पीड़ितों को साम्प्रदायिक हिंसा से बचा नहीं पाया, क्योंकि अपराधी आज भी आज़ाद घूम रहे हैं, और क्योंकि पीड़ितों को अच्छी सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, इसीलिए आज पीड़ित अपनी जिंदगियों में वापस लौटने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं | ऐसे में यह पुनर्वास पैकेज और कुछ नहीं बस राज्य की असफलता को छिपाने के लिए एक चाल नज़र आती है |
7.      हत्या, बलात्कार, आगजनी, और लूट के मामलों में पुलिस की बेहद ढीली पड़ताल
फैक्ट-फाइंडिंग टीम को ज्ञात हुआ की पुलिस जान-बूझकर सबूत मिटाने और पड़ताल को विलंबित करने का प्रयास कर रही है | इस तरह से, सी आर पी सी के सेक्शन 167(2) में पड़ताल के लिए निर्धारित अधिकतम अवधि (90 दिन) निकलती जा रही है | और जघन्य अपराधों के दोषी बेल पर छूट रहे हैं | सिटीजन फार जस्टिस एंड पीस बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (याचिका क्र. 170 वर्ष 2013) के मामले में प्रार्थियों द्वारा दर्ज़ कराये गए अतिरिक्त शपथ-पत्र के अनुसार कम से कम 5 ऐसे दोषियों को बेल मिल भी चुकी है और अब इनको बिना कोर्ट वॉरेंट के गिरफ्तार करना असम्भव है | निम्नलिखित कम से दो ऐसे मामलों में पुलिस की संदिग्ध भूमिका स्पष्ट होती है |

डूंगर गाँव के मेहेरुदीन (पुत्र रफीक) का मामला ऐसा ही है | डूंगर गाँव मुज़फ्फरनगर ज़िले के फुगाना थाने में पड़ता है | मेहरुदीन का शव 8 सितम्बर को, निर्वस्त्र अवस्था में उन्हीं के गाँव के पवन जाट के घर में गले से लटका हुआ पाया गया था | ग्राम प्रधान और अन्य प्रभावशाली जाटों के दबाव में शव को गाँव के पास के कब्रिस्तान में दफ़नवा दिया गया था | आज मेहेरुदीन का परिवार कहता है की उनकी मृत्यु बीमारी के कारण हुई थी | परिवार अब शिविर छोड़कर कांधला शहर में रह रहा है | पर इसी गाँव के तीन लोग इस पूरी घटना के साक्षी थे और उनका वर्णन एफ़.आई.आर. में भी है | उनको जान की धमकियां भी आने लगी हैं | इनके बयान वीडियो पर रिकॉर्ड किये गए हैं और एफ़.आई.आर. के साथ जमा किये गए हैं | पुलिस अधिकारियों को एक अलग पत्र लिखकर शव का पोस्ट-मोर्टेम करने के लिए अनुरोध भी किया गया है, पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है | विधि के अनुसार पुलिस को चाहिए था की वह वारदात के मौके पर एक पंचनामा बनाती और परिवार के अनुसार बताये गए मृत्यु के कारण को उसमें दर्ज करती | पर इस मामले कोई पंचनामा बनाया ही नहीं गया है | एफ़.आई.आर. दर्ज़ कराने के बाद भी पोस्ट-मोर्टेम के लिए शव को खोद कर निकला नहीं गया है |

एक अन्य मामले में भी पुलिस की दुष्टता सामने आती है | आमिर खान (पुत्र रैसुद्दीन) जो की अन्छाढ़ गाँव, थाना बिनौली, बाघपत ज़िले के निवासी थे, 8 सितम्बर को अपने माता, पिता, बीवी, और छोटे भाई के साथ अपना गाँव छोड़कर शेखपुरा में अपने रिश्तेदार के घर चले गए थे | 12 सितम्बर को परिवार से सलाह करके आमिर अपने गाँव वापस यह देखने के लिए गये कि हालात सामान्य हुए हैं या नहीं | जब आमिर देर शाम तक वापस नहीं लौटे, तब उनके माता, पिता और बीवी ने गाँव जाकर देखने का फैसला किया | 6 बजे के आस पास जब वे अपने घर पहुंचे तब उन्होंने आमिर के शव को छत से लटका हुआ पाया | उनकी चीखें सुनकर लोग इकठ्ठा हो गए और ग्राम प्रधान को बुलवाया गया | दो ग्राम निवासियों, संजीव और उसके पिता जगबीरा ने आमिर के परिवार को गाली देना शुरु कर दिया और आमिर द्वारा उधार लिए हुए 80,000 रूपए लौटाने को कहने लगे | ग्राम प्रधान समरपाल ने आमिर का शव दफ़नवा दिया और घोषित कर दिया कि किसी के भी पूछने पर यही कहा जाए कि आमिर की मृत्यु बीमारी से हुई थी | जाट परिवारों द्वारा पुलिस को बुलवाया गया और यही बताया गया | आमिर के परिवार द्वारा लगातार पोस्ट-मोर्टेम किये जाने के अनुरोध को नज़रंदाज़ कर दिया गया और उनसे जबरन अंगूठे के निशान ले लिए गए | इन तीन लोगों को फिर अपने ही घर में, उधार चुकाने के एवज में संजीव, जगबीरा और समरपाल द्वारा, बंधक बना कर रखा गया | जब 30 सितम्बर को उन्होंने अपने रिश्तेदारों की मदद से रूपए लौटाए तब उन्हें छोड़ा गया | इसके बाद परिवार जॉला गाँव के शिविर में चला गया, जो की बुद्धाना थाना, ज़िला मुज़फ्फरनगर में पड़ता है | परिवार ने फिर से पुलिस को पोस्ट-मोर्टेम करवाने के लिए कहा है पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है |
पी.यू.डी.आर. मांग करता है कि -
1.      पीड़ितों को शिविरों से जबरन निकालने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए | और पीड़ितों को तब तक राहत मुहैय्या कराई जाए जब तक उनके लिए एक स्थायी व्यवस्था न करा दी   जाए |
2.      एक कमिशन गठित किया जाए जो की विस्थापित लोगों की जानकारी, विस्थापन का कारण और उनकी संपत्ति का हिसाब बना सके | ताकि राहत और पुनर्वास के लिए पर्याप्त कदम लिए जा सकें |
3.      पुनर्वास पैकेज निष्पक्ष तौर पर दिया जाए | हर विवाहित जोड़े और हर अविवाहित वयस्क को एक अलग परिवार मानकर मुआवज़ा दिया जाए |
4.      पुनर्वास पैकेज के साथ जुड़ी नाजायज़ शर्तों को हटाया जाए | पीड़ितों की निजी और सामुदायिक संपत्ति जैसे कब्रिस्तान, मदरसे, ईदगाह आदि को दर्ज़ किया जाए और अन्य ग्रामवासियों द्वारा अनधिकृत कब्ज़े से सुरक्षित किया जाए |
5.      गवाहों और शिकायतकर्ताओं को मिल रहीं धमकियों को देखते हुए उन्हें सुरक्षा दी जाए |
6.      यह सुनिश्चित किया जाए कि दंगों की निष्पक्ष जांच हो और मुकद्दमें चलें | इसके लिए सभी मामले एक केन्द्रीय एजेंसी को सौंपें जाएँ |

Assistant Chemical Examiner along with 3 other officials of State Chemical Laboratory suspended from duty.



Chandigarh, 19th January:
The Department of Health & Family Welfare, Punjab here today passed the orders for the suspension of 4 of its employees working in the State Chemical Laboratory, Kharar on account of absence from duty. This was revealed here today by Sh Surjit Kumar Jyani, Health Minister, Punjab. He informed that those who have been suspended included Dr R.P Singh, Assistant Chemical Examiner, Sh Lekh Raj, MLT (Grade 2), Sh Rajesh Mishra, Junior Assistant and Sh Mohit Gugnani Class IV.

ਸਭ ਕੁਝ ਠੀਕ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਸੀ ਥਰੂਰ ਦੇ ਵਿਆਹ 'ਚ...


everything was not fair in Throor-Sunandas case.......
ਸਭ ਕੁਝ ਠੀਕ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਸੀ ਥਰੂਰ ਦੇ ਵਿਆਹ 'ਚ...
ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ : ਪਾਕਿਸਤਾਨੀ ਮਹਿਲਾ ਪੱਤਰਕਾਰ ਮੇਹਰ ਤਰਾਰ ਸਬੰਧੀ ਥਰੂਰ ਜੋੜੇ ਵਿਚਕਾਰ ਵਿਵਾਦ ਅਤੇ ਤਣਾਅ ਹੁਣ ਸੁਨੰਦਾ ਪੁਸ਼ਕਰ ਦੀ ਅਚਾਨਕ ਮੌਤ ਦੀ ਚੱਲ ਰਹੀ ਜਾਂਚ 'ਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੈ। ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਦੀ ਮਹਿਲਾ ਪੱਤਕਰਾਰ ਨਾਲ ਥਰੂਰ ਦੀ ਨੇੜਤਾ ਸਬੰਧੀ ਘਰੇਲੂ ਤਣਾਅ ਦੀ ਗੱਲਬਾਤ ਕੇਂਦਰੀ ਮੰਤਰੀ ਅਤੇਪੱਤਰਕਾਰ ਵਿਚਕਾਰ ਉਸ ਕਥਿਤ ਈ-ਮੇਲ ਸੰਵਾਦ 'ਚ ਵੀ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੈ ਜੋ ਹੁਣ ਸਾਹਮਣੇ ਆਈ ਹੈ। ਏਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਪੁਸ਼ਕਰ ਨੇ ਵੀ ਕੁਝ ਆਖ਼ਰੀ ਟਵੀਟ 'ਚ ਆਪਣੇ ਕੋਲ ਮੌਜੂਦ ਮੇਹਰ ਦੇ ਈ-ਮੇਲ ਤੇ ਫੋਨ ਸੁਨੇਹੇ ਦੇ ਆਧਾਰ 'ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਝੁੱਠਾ ਦੱਸਿਆ ਸੀ। ਥਰੂਰ ਅਤੇ ਮੇਹਰ ਵਿਚਕਾਰਲਾ ਕਰੀਬ ਸੱਤ ਮਹੀਨੇ ਪਹਿਲਾਂ ਦਾ ਇਕ ਈ-ਮੇਲ ਸੰਵਾਦ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿਚ ਦੋਵਾਂ ਦੀ ਨੇੜਤਾ ਸਪੱਸ਼ਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਈ-ਮੇਲ 'ਚ ਹਾਲਾਂਕਿ ਦੋਵਾਂ ਨੇ ਇਸ ਨੂੰ ਮਹਿਜ਼ ਦੋਸਤੀ ਕਰਾਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। 28 ਜੁਲਾਈ, 2013 ਦੇ ਇਸ ਈ-ਮੇਲ ਸੰਵਾਦ 'ਚ ਦੋਵੇਂ ਕਾਫੀ ਘੱਟ ਸਮੇਂ 'ਚ ਇਕ-ਦੂਸਰੇ ਦੇ ਕਾਫੀ ਨੇੜੇ ਆ ਗਏ ਸਨ। ਮੇਹਰ ਨੇ ਥਰੂਰ ਦੇ ਭੇਜੇ ਮੇਲ 'ਚ ਆਪਣੇ ਕਾਰਨ ਕੇਂਦਰੀ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰ 'ਚ ਕਲੇਸ਼ 'ਤੇ ਖੇਦ ਪ੍ਰਗਟਾਉਣ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸਭ ਕੁਝ ਠੀਕ ਹੋਣ ਦੀਆਂ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਵੀ ਦਿੱਤੀਆਂ ਸਨ। ਨਾਲ ਹੀ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ 'ਚ ਥਰੂਰ ਦੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਲਈ ਸ਼ੁਕਰੀਆ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਕਿਹਾ- 'ਅਸੀਂ ਲਾਂਗ ਡਿਸਟੈਂਸ ਦੋਸਤ ਹੀ ਸਹੀ...।' ਮੇਹਰ ਦੇ ਈ-ਮੇਲ ਦੇ ਜਵਾਬ 'ਚ ਥਰੂਰ ਨੇ ਵੀ ਇਸ ਗੱਲ ਦੀ ਤਸਦੀਕ ਕੀਤੀ ਸੀ ਕਿ ਸੁਨੰਦਾ ਪਾਕਿ ਮਹਿਲਾ ਪੱਤਰਕਾਰ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਗੱਲਬਾਤ ਸਬੰਧੀ ਦੁਖੀ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸ਼ਬਦਾਂ 'ਚ, 'ਕੁਝ ਲੋਕ ਇਹ ਨਹੀਂ ਸਮਝ ਸਕਦੇ ਹਨ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਸਬੰਧੀ ਵੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ।
ਮੌਤ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਰਾਤ ਭਰ ਜਾਗੀ ਸੁਨੰਦਾ
ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਦੇਰ ਸ਼ਾਮ ਸੁਨੰਦਾ ਪੁਸ਼ਕਰ ਦੀ ਮੌਤ ਦੀ ਖ਼ਬਰ ਆਈ ਪਰ ਸੋਸ਼ਲ ਨੈਟਵਰਕਿੰਗ ਟਵਿਟਰ 'ਤੇ ਸੁਨੰਦਾ ਲਗਪਗ ਪੂਰੀ ਰਾਤ ਸਰਗਰਮ ਰਹੇ। ਉਧਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਟਵਿਟਰ ਸੁਨੇਹਿਆਂ 'ਚ ਆਪਣੇ ਪਰਿਵਾਰਕ ਜੀਵਨ ਸਬੰਧੀ ਉਠੇ ਵਿਵਾਦ ਦਾ ਦਰਦ ਸਾਫ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ। ਇਥੋਂ ਤਕ ਕਿ 17 ਜਨਵਰੀ 2014 ਨੂੰ ਦੇਰ ਰਾਤ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਤੇ ਪਾਕਿ ਮਹਿਲਾ ਪੱਤਰਕਾਰ ਮੇਹਰ ਤਰਾਰ ਵਿਚਕਾਰ ਵੀ ਸੁਨੇਹੇਬਾਜ਼ੀ ਹੋਈ। ਮੇਹਰ ਨੇ ਵੀਰਵਾਰ ਅਤੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਅੱਧੀ ਰਾਤ ਕਰੀਬ 2 ਵਜ ਕੇ 10 ਮਿੰਟ 'ਤੇ ਸੁਨੰਦਾ ਦੇ ਟਵੀਟ 'ਤੇ ਜਵਾਬ 'ਚ ਲਿਖਿਆ- 'ਜਾਣ ਕੇ ਚੰਗਾ ਲੱਗਾ ਸ਼੍ਰੀਮਤੀ ਟੀ। ਹੁਣ ਥੋੜਾ ਆਰਾਮ ਕਰ ਲਓ। ਗੌਡ ਬਲੈਸ।' ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸੁਨੰਦਾ ਨੇ 2:08 ਵਜੇ ਲਿਖੇ ਸੁਨੇਹੇ 'ਚ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਮੈਂ ਅਤੇ ਮੇਰੇ ਪਤੀ ਖੁਸ਼ ਹਾਂ। ਕੋਈ ਮੇਹਰ ਮੈਨੂੰ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੀ ਪਰ ਟੀਵੀ 'ਤੇ ਉਸ ਨੇ ਜੋ ਝੂਠ ਕਿਹਾ ਉਸ ਸਬੰਧੀ ਮੈਂ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਹਾਂ। ਰਾਤ ਇਕ ਵੇਜ ਉਨ੍ਹਾਂ ਜਨਤਕ ਹੋਏ ਆਪਣੇ ਪਰਿਵਾਰਕ ਵਿਵਾਦ 'ਤੇ ਇਕ ਟੀਵੀ ਸ਼ੋਅ ਦਾ ਹਵਾਲਾ ਦਿੰਦਿਆਂ ਟਵੀਟ ਕੀਤਾ, 'ਮੈਂ ਸ਼ੋ ਵੇਖਿਆ ਅਤੇ ਮੇਹਰ ਨੇ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਝੂਠ ਬੋਲਿਆ। ਮੇਰੇ ਪਤੀ ਨੂੰ ਭੇਜੇ ਉਸ ਦੇ ਸਾਰੇ ਈਮੇਲ-ਬੀਬੀਐਮ (ਬਲੈਕਬੇਰੀ ਮੈਸਜ) ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਹਨ। ਮੈ ਝੂਠ ਨਹੀਂ ਬੋਲਦੀ।' ਸਵੇਰੇ ਕਰੀਬ ਪੌਣੇ ਪੰਜ ਵਜੇ ਤਕ ਸੁਨੰਦਾ ਟਵੀਟ 'ਤੇ ਸਰਗਰਮ ਰਹੀ। ਇਕ ਟਵੀਟਰ ਫਾਲੋਅਰ ਵੱਲੋਂ ਟੀਵੀ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ 'ਚ ਮੇਹਰ ਅਤੇ ਸ਼ਸ਼ੀ ਥਰੂਰ ਦੇ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਆਉਣ ਦੇ ਪ੍ਰਸਤਾਵ 'ਤੇ ਆਉਣ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਕਦੇ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ। ਰਾਤ ਭਰ ਜਾਗਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਿਹਾੜਾ ਸਵੇਰੇ ਸੁੱਤੀ ਸੁਨੰਦਾ ਮੁੜ ਉੱਠ ਨਹੀਂ ਸੀ।

ਦਿੱਲੀ ਪੁਲੀਸ ਨੂੰ ਦਿੱਲੀ ਸਰਕਾਰ ਅਧੀਨ ਲਿਆਂਦਾ ਜਾਵੇ- ਕੇਜਰੀਵਾਲ



  • ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ,
    ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਅਰਵਿੰਦ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਨੇ ਅੱਜ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਕਿ ਦਿੱਲੀ ਪੁਲੀਸ ਨੂੰ ਦਿੱਲੀ ਸਰਕਾਰ ਅਧੀਨ ਲਿਆਂਦਾ ਜਾਵੇ ਕਿਉਂਕਿ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਰ ਜੁਰਮ ਲਈ ਦਿੱਲੀ ਵਾਸੀ ਪੁਲੀਸ ਤੋਂ ਜਵਾਬ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਆਪਣੇ ਕੈਬਨਿਟ ਸਾਥੀਆਂ ਸਮੇਤ ਉਪ ਰਾਜਪਾਲ ਨੂੰ ਮਿਲ ਕੇ ਚਾਰ ਪੁਲੀਸ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਮੁਅੱਤਲ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ। ਇਹ ਮੰਗ ਨਾ ਮੰਨੇ ਜਾਣ ’ਤੇ ‘ਆਪ’ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸੋਮਵਾਰ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਦਫ਼ਤਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਧਰਨਾ ਦੇਣ ਦੀ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਹੈ।
    ਅੱਜ ਇੱਥੇ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਸੁਸ਼ੀਲ ਕੁਮਾਰ ਸ਼ਿੰਦੇ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ ਮਗਰੋਂ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦਿਆਂ ਸ੍ਰੀ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਨੇ ਕਿਹਾ, ‘‘ਜਦੋਂ ਵੀ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਜੁਰਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਲੋਕ ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਆ ਕੇ ਜਵਾਬ ਮੰਗਦੇ ਹਨ। ਉਹ (ਕੇਂਦਰੀ) ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਕੋਲ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦੇ। ਇਸ ਕਰਕੇ ਦਿੱਲੀ ਪੁਲੀਸ ਵਿਭਾਗ ਨੂੰ ਦਿੱਲੀ ਸਰਕਾਰ ਹਵਾਲੇ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ।’’
    ਦਿੱਲੀ ਪੁਲੀਸ ਇਸ ਵੇਲੇ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰਾਲੇ ਦੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨਿਕ ਕੰਟਰੋਲ ਹੇਠ ਹੈ। ਸ੍ਰੀ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਨਾਲ ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਮਨੀਸ਼ ਸਿਸੋਦੀਆ, ਸੋਮਨਾਥ ਭਾਰਤੀ ਅਤੇ ਰਾਖੀ ਬਿਰਲਾ ਵੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਮਿਲਣ ਗਏ।
    ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਚਾਰ ਪੁਲੀਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ ਮੁਅੱਤਲ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਪੁਲੀਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ’ਤੇ ਤਿੰਨ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਮਾਮਲਿਆਂ ਸਬੰਧੀ ਆਪਣੀ ਡਿਊਟੀ ਵਿੱਚ ਲਾਪ੍ਰਵਾਹੀ ਵਰਤਣ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਲੱਗੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਔਰਤ ਨਾਲ ਸਮੂਹਿਕ ਬਲਾਤਕਾਰ, ਮਾਲਵੀਆ ਨਗਰ ਵਿੱਚ ਸਰਗਰਮ ਨਸ਼ਿਆਂ ਦਾ ਗਰੋਹ ਅਤੇ ਪੱਛਮੀ ਦਿੱਲੀ ਵਿੱਚ ਦਾਜ ਸਬੰਧੀ ਔਰਤ ਨੂੰ ਜਿੰਦਾ ਜਲਾਉਣ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ। ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੇ ਭਰੋਸਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਮੰਗਾਂ ਬਾਰੇ ਵਿਚਾਰ ਕਰਨਗੇ ਅਤੇ ਕੁਝ ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਦੱਸਣਗੇ। ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਮਗਰੋਂ ਦਿੱਲੀ ਪੁਲੀਸ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਬੀ।ਐਸ। ਬਾਸੀ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਨੂੰ ਮਿਲੇ।
    ਪਹਿਲਾਂ ਸਵੇਰੇ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੈਬਨਿਟ ਸਾਥੀਆਂ ਰਾਖੀ ਬਿਰਲਾ, ਸੋਮਨਾਥ ਭਾਰਤੀ ਅਤੇ ਮਨੀਸ਼ ਸਿਸੋਦੀਆ ਨੇ ਉਪ ਰਾਜਪਾਲ ਨਜੀਬ ਜੰਗ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਗ੍ਰਹਿ ਵਿਖੇ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਦਿੱਲੀ ਪੁਲੀਸ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਬੀ ਐਸ ਬਾਸੀ ਅਤੇ ਚਾਰ ਪੁਲੀਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮੁਅੱਤਲ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਵੀ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ।
    ਕਰੀਬ ਇੱਕ ਘੰਟਾ ਚੱਲੀ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਅਤੇ ਮੰਤਰੀਆਂ ਨੇ ਰਾਜਧਾਨੀ ਵਿੱਚ ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਾ ਮੁੱਦਾ ਉਠਾਇਆ ਅਤੇ ਤਿੰਨ ਐਸਐਚਓਜ਼ ਤੇ ਇੱਕ ਏਸੀਪੀ ਨੂੰ ਮੁਅੱਤਲ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਪੁਲੀਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ’ਤੇ ਡਿਊਟੀ ਵਿੱਚ ਲਾਪ੍ਰਵਾਹੀ ਵਰਤਣ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਨਾ ਦੇਣ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਲੱਗੇ ਹਨ।
    ਉਪ ਰਾਜਪਾਲ ਨੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਕੇਸਾਂ ਦੀ ਉੱਚ ਪੱਧਰੀ ਜਾਂਚ ਦੇ ਆਦੇਸ਼ ਦਿੱਤੇ ਪਰ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਬਾਸੀ ਵੱਲੋਂ ਮੁਅੱਤਲੀ ਦੀ ਮੰਗ ਮੰਨਣ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।
    ਇਸੇ ਦੌਰਾਨ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਚਿਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਪੁਲੀਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਯੋਗ ਕਾਰਵਾਈ ਨਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤਾਂ ਉਹ ਸੋਮਵਾਰ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਦਫਤਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਧਰਨਾ ਦੇਵੇਗੀ।  ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਮਨੀਸ਼ ਸਿਸੋਦੀਆ ਨੇ ਕਿਹਾ, ‘‘ਜੇਕਰ ਪੁਲੀਸ ਮੁਲਾਜ਼ਮਾਂ ਨੂੰ ਮੁਅੱਤਲ ਕਰਨ ਦੀ ਮੰਗ ਨਾ ਮੰਨੀ ਗਈ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਸੋਮਵਾਰ ਨੂੰ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਦਫਤਰ ਦੇ ਬਾਹਰ ਧਰਨਾ ਦੇਵਾਂਗੇ।’’

    ਇਸ ਸਾਲ ਕੰਮ ਦੌਰਾਨ ਮਾਰੇ ਗਏ 70 ਪੱਤਰਕਾਰ



  • ਨਿਊਯਾਰਕ-ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਇਕ ਸਮਿਤੀ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸ ਸਾਲ ਦੁਨੀਆਂ ਭਰ 'ਚ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 70 ਪੱਤਰਕਾਰ ਕੰਮ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਮਾਰੇ ਗਏ। ਇਸ 'ਚ ਸੀਰੀਆ ਦੇ ਗ੍ਰਹਿ ਯੁੱਧ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟਿੰਗ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਮਾਰੇ ਗਏ 29 ਪੱਤਰਕਾਰ ਅਤੇ ਇਰਾਕ 'ਚ ਮਾਰੇ ਗਏ 10 ਪੱਤਰਕਾਰ ਵੀ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹਨ। 
    'ਕਮੇਟੀ ਟੂ ਪ੍ਰੋਟੈਕਟ ਜਰਨਲਿਸਟਸ' ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਸੀਰੀਆ 'ਚ ਮਾਰੇ ਗਏ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ 'ਚ ਆਪਣੇ ਗ੍ਰਹਿ ਨਗਰਾਂ 'ਚ ਚੱਲ ਰਹੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟਿੰਗ ਕਰ ਰਹੇ ਕਈ ਨਾਗਰਿਕ ਪੱਤਰਕਾਰ, ਸਰਕਾਰ ਜਾਂ ਵਿਰੋਧੀ ਦੁਆਰਾ ਆਗਿਆ ਪ੍ਰਾਪਤ ਮੀਡੀਆ ਸੰਗਠਨਾਂ ਲਈ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਪ੍ਰਸਾਰਕ ਅਤੇ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਦੇ ਕੁਝ ਪੱਤਰਕਾਰ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹਨ। ਮਾਰੇ ਗਏ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਪ੍ਰੈੱਸ ਦੇ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ 'ਚ ਅਲ ਜਜ਼ੀਰਾ ਦੇ ਰਿਪੋਰਟਰ ਮੁਹੰਮਦ ਅਲ ਮੇਸਲਮਾ ਦਾ ਨਾਮ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੈ ਜਿਸ ਨੂੰ ਇਕ ਬੰਦੂਕਧਾਰੀ ਨੇ ਗੋਲੀ ਮਾਰ ਦਿੱਤੀ ਸੀ। ਮਿਸਰ 'ਚ 6 ਪੱਤਰਕਾਰ ਮਾਰੇ ਗਏ। ਇਨ੍ਹਾਂ 'ਚੋਂ ਅੱਧੇ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪੱਤਰਕਾਰ ਰਾਸ਼ਟਰਪਤੀ ਮੁਹੰਮਦ ਮੁਰਸੀ ਨੂੰ ਸੱਤਾ ਤੋਂ ਹਟਾਉਣ ਦਾ ਵਿਰੋਧ ਕਰ ਰਹੇ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨਕਾਰੀਆਂ 'ਤੇ ਸਰਕਾਰੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਬਲਾਂ ਦੁਆਰਾ 14 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਾਰਵਾਈ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟਿੰਗ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਮਾਰੇ ਗਏ। 
    ਸਮਿਤੀ ਦੇ ਉਪ-ਨਿਰਦੇਸ਼ਕ ਰੂਪਰਟ ਮੈਹੋਨੇ ਨੇ ਇਕ ਬਿਆਨ 'ਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੱਛਮੀ ਏਸ਼ੀਆ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਲਈ ਮੌਤ ਦਾ ਮੈਦਾਨ ਬਣ ਗਿਆ ਜਿਥੇ ਕੁਝ ਥਾਵਾਂ 'ਤੇ ਕੰਮ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਮਾਰੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਦੀ ਸੰਖਿਆ 'ਚ ਕਮੀ ਆਈ ਉਥੇ ਹੀ ਸੀਰੀਆ ਦੇ ਗ੍ਰਹਿ ਯੁੱਧ ਅਤੇ ਇਰਾਕ 'ਚ ਦੁਬਾਰਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਏ ਸੰਪਰਦਾਇਕ ਹਮਲਿਆਂ ਨੇ ਨਿਰਾਸ਼ਾਜਨਕ ਰੂਪ ਨਾਲ ਇਥੇ ਸੰਖਿਆ ਵਧਾ ਦਿੱਤੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਮੁਦਾਏ ਨੂੰ ਸਾਰੀਆਂ ਸਰਕਾਰਾਂ ਅਤੇ ਹਥਿਆਰਬੰਦ ਸਮੂਹਾਂ ਨਾਲ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਦੇ ਨਾਗਰਿਕ ਦੇ ਤੌਰ 'ਤੇ ਸਨਮਾਨ ਕਰਨ ਅਤੇ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਦੇ ਹੱਤਿਆਰਿਆਂ ਨੂੰ ਸਜ਼ਾ ਦਿਵਾਉਣ ਲਈ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਨਿਊਯਾਰਕ ਸਥਿਤ ਇਸ ਸਮਿਤੀ ਨੇ 1992 ਤੋਂ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਅਤੇ ਪ੍ਰਸਾਰਕਾਂ ਦੀਆਂ ਮੌਤਾਂ 'ਤੇ ਨਜ਼ਰ ਰੱਖੀ ਹੋਈ ਹੈ।

    ਬੱਬੀ ਬਾਦਲ ਵੱਲੋਂ ਲੋਹੜੀ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਦੌਰਾਨ ਹੋਣਹਾਰ ਵਿਦਿਆਰਥਣਾਂ ਦਾ ਸਨਮਾਨ

    ਅਜੀਤਗੜ੍ਹ,  -ਲੋਹੜੀ ਦੇ ਸ਼ੁਭ ਦਿਹਾੜੇ 'ਤੇ ਮਾਤਾ ਗੁਜਰੀ ਐਜੂਕੇਸ਼ਨ ਸੁਸਾਇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਮਾਤਾ ਗੁਜਰੀ ਕਾਲਜ (ਲੜਕੀਆਂ) ਮਾਣਕਪੁਰ ਵਿਖੇ ਰੰਗਾਰੰਗ ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਦੌਰਾਨ ਮੁੱਖ ਮਹਿਮਾਨ ਦੇ ਤੌਰ 'ਤੇ ਪਹੁੰਚੇ ਯੂਥ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦੇ ਕੌਮੀ ਮੁੱਖ ਬੁਲਾਰੇ ਹਰਸੁਖਇੰਦਰ ਸਿੰਘ ਬੱਬੀ ਬਾਦਲ ਵੱਲੋਂ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਖੇਤਰਾਂ 'ਚ ਨਾਮਣਾ ਖੱਟਣ ਵਾਲੀਆਂ ਵਿਦਿਆਰਥਣਾਂ ਦਾ ਸਨਮਾਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ | ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮਾਤਾ ਗੁਜਰੀ ਐਜੂਕੇਸ਼ਨ ਸੁਸਾਇਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਇਹ ਉਪਰਾਲਾ ਬਹੁਤ ਹੀ ਸਲਾਹੁਣਯੋਗ ਹੈ | ਇਸ ਮੌਕੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਜਤਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਰੋਮੀ, ਪਿ੍ੰ. ਸਰਬਜੀਤ ਕੌਰ, ਸੂਬੇਦਾਰ ਬਚਨ ਸਿੰਘ, ਜੋਗਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸਰਪੰਚ, ਹਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸਰਪੰਚ, ਗੁਰਚਰਨ ਸਿੰਘ ਅਬਰਾਵਾਂ ਸੀਨੀ. ਮੀਤ ਪ੍ਰਧਾਨ, ਅਮਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਸਰਕਲ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮਾਣਕਪੁਰ, ਬਹਾਦਰ ਸਿੰਘ ਸਰਪੰਚ, ਨਗਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਵੀਲਾ, ਜਗਤਾਰ ਸਿੰਘ ਘੜੂੰਆਂ ਨਿੱਜੀ ਸਕੱਤਰ ਬੱਬੀ ਬਾਦਲ, ਸੁੱਖੀ ਬੱਲੋਮਾਜਰਾ ਆਦਿ ਹਾਜ਼ਰ ਸਨ |

    ਪੰਜਾਬੀ ਫ਼ਿਲਮ 'ਕਿਰਪਾਨ ਦਾ ਸਵੋਰਡ ਆਫ਼ ਆਨਰ' ਦਾ ਸੰਗੀਤ ਰਿਲੀਜ਼

    ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ, 18 ਜਨਵਰੀ (ਅਜੀਤ ਬਿਊਰੋ) - ਫ਼ਿਲਮ ਲੇਖਕ ਅਮਰੀਕ ਗਿੱਲ ਦੀ ਪਲੇਠੀ ਪੰਜਾਬੀ ਫ਼ਿਲਮ 'ਕਿਰਪਾਨ, ਦਾ ਸਵੋਰਡ ਆਫ਼ ਆਨਰ' ਦਾ ਸੰਗੀਤ ਅੱਜ ਇਥੇ ਜਾਰੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ | 7 ਫ਼ਰਵਰੀ ਨੂੰ ਜਾਰੀ ਹੋ ਰਹੀ ਇਸ ਫ਼ਿਲਮ ਦੇ ਸੰਗੀਤ ਰਿਲੀਜ਼ ਸਮਾਰੋਹ ਮੌਕੇ ਫ਼ਿਲਮ ਦੇ ਨਾਇਕ ਤੇ ਗਾਇਕ ਰੌਸ਼ਨ ਪਿ੍ੰਸ, ਮਾਸਟਰ ਸਲੀਮ, ਸੰਗੀਤਕਾਰ ਗੁਰਮੀਤ ਸਿੰਘ, ਗੀਤਕਾਰ ਅਮਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਗਿੱਲ, ਫ਼ਿਲਮ ਦੇ ਨਿਰਮਾਤਾ ਰਜਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਬਣਵੈਤ, ਮਿਊਜ਼ਿਕ ਕੰਪਨੀ ਸ਼ਿਮਾਰੋ ਦੇ ਮਾਲਕ ਬਬਲੀ ਸਿੰਘ ਤੇ ਫ਼ਿਲਮ ਵਿਤਰਕ ਮੁਨੀਸ਼ ਸਾਹਨੀ ਮੌਜੂਦ ਸਨ | ਫ਼ਿਲਮ ਦਾ ਸੰਗੀਤ ਜਾਰੀ ਕਰਨ ਦੀ ਰਸਮ ਪੰਜਾਬੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਪਟਿਆਲਾ ਦੇ ਵਾਈਸ ਚਾਂਸਲਰ ਡਾ. ਜਸਪਾਲ ਸਿੰਘ, ਗੁਰਮਤਿ ਕਾਲਜ ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਹਰਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ, ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਤੇ ਸੈਰ ਸਪਾਟਾ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਪਿ੍ੰ. ਸੈਕਟਰੀ ਐਸ.ਐਸ. ਚੰਨੀ ਤੇ ਭਾਈ ਬਲਬੀਰ ਸਿੰਘ ਨੇ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ 'ਤੇ ਅਦਾ ਕੀਤੀ | ਇਸ ਮੌਕੇ ਫ਼ਿਲਮ ਦੇ ਨਿਰਮਾਤਾ ਰਜਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਬਨਵੈਤ ਤੇ ਸੰਗੀਤਕਾਰ ਗੁਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਇਸ ਫ਼ਿਲਮ ਦੇ ਸੰਗੀਤ ਵੱਲ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਧਿਆਨ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ | ਫ਼ਿਲਮ ਵਿੱਚ 8 ਗੀਤ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਮਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਗਿੱਲ, ਕੁਮਾਰ ਤੇ ਜੱਗੀ ਸਿੰਘ ਨੇ ਲਿਖਿਆ ਹੈ | ਫ਼ਿਲਮ 'ਚ ਇਕ ਸ਼ਬਦ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਦੀ ਰਚਨਾ 'ਚੋਂ ਵੀ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ | ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੀਤਾਂ ਨੂੰ ਰੌਸ਼ਨ ਪਿ੍ੰਸ, ਮਿਸ ਪੂਜਾ, ਮਾਸਟਰ ਸਲੀਮ, ਮੀਕਾ ਸਿੰਘ, ਸੁਨਿਧੀ ਚੌਹਾਨ, ਮੀਨੂੰ ਸਿੰਘ, ਈਦੂ ਸ਼ਰੀਫ਼ ਤੇ ਭਾਈ ਸਾਹਬ ਭਾਈ ਬਲਬੀਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਨੇ ਆਵਾਜ਼ ਦਿੱਤੀ ਹੈ | ਫ਼ਿਲਮ 'ਚ ਮੁੱਖ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਣ ਵਾਲੇ ਰੌਸ਼ਨ ਪਿ੍ੰਸ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਫ਼ਿਲਮ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲਈ ਬੇਹੱਦ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ | ਦਰਸ਼ਕਾਂ ਨੇ ਇਸ ਫ਼ਿਲਮ ਵਰਗਾ ਸੰਗੀਤ ਵੀ ਪਹਿਲਾਂ ਕਦੇ ਨਹੀਂ ਸੁਣਿਆ ਹੋਵੇਗਾ | ਇਸ ਮੌਕੇ ਹਾਜ਼ਰ ਬੁਲਾਰਿਆਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ 'ਕਿਰਪਾਨ ਦਾ ਸਵੋਰਡ ਆਫ਼ ਆਨਰ' ਵਰਗੀਆਂ ਫ਼ਿਲਮਾਂ ਦੀ ਪੰਜਾਬੀ ਸਿਨੇਮੇ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲੋੜ ਹੈ, ਤਾਂ ਹੀ ਸਾਡੀ ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨੂੰ ਕੋਈ ਸੇਧ ਮਿਲ ਸਕੇਗੀ | ਇਸ ਫ਼ਿਲਮ 'ਚ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੀ ਇੱਕ ਰਚਨਾ ਨੂੰ ਆਵਾਜ਼ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਸ੍ਰੀ ਦਰਬਾਰ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਰਾਗੀ ਭਾਈ ਸਾਹਬ ਭਾਈ ਬਲਬੀਰ ਸਿੰਘ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਗੱਲ ਦੀ ਖੁਸ਼ੀ ਹੈ ਕਿ ਰਜਿੰਦਰ ਪਾਲ ਸਿੰਘ ਬਨਵੈਤ ਨੇ ਆਪਣੀ ਫ਼ਿਲਮ 'ਚ ਕੁਝ ਇਤਿਹਾਸਕ ਪੱਤਰੇ ਫ਼ਰੋਲੇ ਹਨ | 

    ਢੀਂਡਸਾ ਵੱਲੋਂ 7 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਕੰਮਾਂ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ

    ਮਾਲੇਰਕੋਟਲਾ,  ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦੇ ਜਨਰਲ ਸਕੱਤਰ ਅੇ ਮੈਂਬਰ ਰਾਜ ਸਭਾ ਸ.ਸੁਖਦੇਵ ਸਿੰਘ ਢੀਂਡਸਾ ਨੇ ਮਾਲੇਰਕੋਟਲਾ ਨਗਰ ਕੌਾਸਲ ਸੀਮਾ ਅੰਦਰ ਵਸੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਵਾਰਡਾਂ 'ਚ 7 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਅੱਜ ਨਵੇਂ ਵਿਕਾਸ ਕੰਮਾਂ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ | ਸਥਾਨਕ ਵਿਸ਼ਵਕਰਮਾ ਮੰਦਰ ਨੇੜੇ ਨਵੀਂ 18 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਬਣਨ ਵਾਲੀ ਸੜਕ ਦੇ ਕੰਮ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਕਰਨ ਮਗਰੋਂ ਜੁੜੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦਿਆਂ ਢੀਂਡਸਾ ਨੇ ਦੋਸ਼ ਲਗਾਇਆਂ ਕਿ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਗੁਆਂਢੀ ਰਾਜਾਂ ਦੀ ਸਨਅਤ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਹੂਲਤਾਂ ਦੇ ਕੇ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਨਅਤਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਅਜਿਹੀਆਂ ਸਹੂਲਤਾਂ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰਕੇ ਇੱਥੋਂ ਦੇ ਸਨਅਤੀ ਵਿਕਾਸ ਨੂੰ ਤਾਰਪੀਡੋ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ | ਢੀਂਡਸਾ ਦੇ ਭਾਸ਼ਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਇੱਥੇ ਆਉਣ 'ਤੇ ਸਵਾਗਤ ਕਰਦਿਆਂ ਪੰਜਾਬ ਵਕਫ਼ ਬੋਰਡ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਜਨਾਬ ਇਜ਼ਹਾਰ ਆਲਮ ਨੇ ਦੱਸਿਆਂ ਅੱਜ ਨਗਰ ਕੌਾਸਲ ਵੱਲੋਂ ਅੱਜ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਵਾਏ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਕੰਮਾਂ ਵਿਚ ਇਕ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਪੰਜ ਨਵੇਂ ਟਿਊਬਵੈੱਲ, ਚਾਰ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਨਵੀਆਂ ਸਾਫ਼ ਪਾਣੀ ਦੀਆ ਲਾਈਨਾਂ, ਪੰਜਾਹ ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਸਰੌਦ ਰੋਡ ਦੀ ਸੜਕ ਨੂੰ ਚੌੜੀ ਕਰਨ ਅਤੇ ਸੀਵਰੇਜ ਲਾਈਨਾਂ ਦਾ ਕੰਮ, 25 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਨਾਲ ਧੂਰੀ ਰੋਡ ਦੀਆਂ ਸੀਵਰੇਜ ਲਾਈਨਾਂ ਅਤੇ 22 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਦੁਲਮਾਂ ਰੋਡ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੈ | ਇਸ ਮੌਕੇ ਜਸਵੀਰ ਸਿੰਘ ਦਿਉਲ, ਚੇਅਰਮੈਨ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਪ੍ਰੀਸ਼ਦ, ਜ.ਜੈਪਾਲ ਸਿੰਘ ਮੰਡੀਆਂ, ਹਰਦੇਵ ਸਿੰਘ ਸੇਹਕੇ, ਜ.ਅਜੀਤ ਸਿੰਘ ਚੰਦੂਰਾਈਆਂ, ਮੁਨਸ਼ੀ ਮੁਹੰਮਦ ਅਸਰਫ, ਜ.ਹਰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਖਟੜਾ, ਸ.ਸੁਖਜੀਵਨ ਸਿੰਘ ਸਰੌਦ ਪ੍ਰਧਾਨ ਟਰਕ ਯੂਨੀਅਨ, ਮੁਬੱਸ਼ਰ ਅਲੀ ਖਾਂ, ਮੁਮਤਾਜ਼ ਅਹਿਮਦ ਟੋਨੀ, ਸ਼ਰੀਫ ਬੌਸ, ਐਸ.ਆਜ਼ਾਦ ਸਿੱਦੀਕੀ, ਮੁਹੰਮਦ ਤਨਵੀਰ ਅਤੇ ਸ਼ਫੀਕ ਬੌਸ ਦੇ ਨਾਂਅ ਜ਼ਿਕਰਯੋਗ ਹਨ |

    ਭਾਰਤ ਪਾਸ ਕੁੱਲ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਦਾ 2.4 ਫਿਸਦੀ ਜੱਦਕਿ ਅਬਾਦੀ 17.5 ਫਿਸਦੀ


     chandigarh
    ਨੈਸ਼ਨਲ ਜਿਓਗ੍ਰਾਫਿਕ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਮੁਤਾਬਕ ਕੁੱਲ ਅਬਾਦੀ ਦਾ 5 ਫਿਸਦੀ ਹਿੱਸਾ ਕੁੱਲ ਉਰਜਾ ਦਾ 23 ਫਿਸਦੀ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰਦੇ ਹਨ। 13 ਫਿਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪੀਣ ਦਾ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ ਤੇ 38 ਫਿਸਦੀ ਨੂੰ ਟਾਇਲਟ ਦੇ ਵੀ ਸਹੀ ਪ੍ਰਬੰਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਹਨ। ਵੱਧਦੀ ਅਬਾਦੀ ਗਲੋਬਲ ਵਾਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੱਡਾ ਕਾਰਣ ਹੈ। ਧਰਤੀ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਘੱਟ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਕਟਾਅ ਵੱਧਿਆ ਹੈ, ਗਲੇਸ਼ੀਅਰ ਪਿਘਲ ਰਹੇ ਹਨ, ਕਈ ਜੀਵਾਂ ਦੀਆਂ ਪ੍ਰਜਾਤੀਆਂ ਤੁਪਤ ਹੋ ਰਹੀਆਂ ਹਨ।
    ਦੁਨੀਆਂ ਦੀ ਅਬਾਦੀ 7 ਬੀਲੀਅਨ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਤੇ ਹਰ ਅਗਲੇ ਪਲ ਨਾਲ ਇਸ ਅਬਾਦੀ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਇਜਾਫਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਹ ਅਬਾਦੀ ਕਈ ਦੇਸ਼ਾਂ ਲਈ ਇੱਕ ਵੱਡੀ ਮੁਸੀਬਤ ਬਣ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹਨਾਂ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਬੇਰੋਜਗਾਰੀ, ਭੁਖਮਰੀ ਅਤੇ ਹੋਰ ਕਈ ਸਮਸਿਆਵਾਂ ਨੇ ਜਕੜ ਲਿਆ ਹੈ। ਦੇਸ਼ਾਂ ਦਾ ਖੇਤਰਫਲ ਤਾਂ ਉਹੀ ਹੈ ਪਰ ਪਿਛਲੇ ਕੁੱਝ ਦਹਾਕਿਆਂ ਤੋਂ ਅਬਾਦੀ ਵਿੱਚ ਕਾਫੀ ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਅਬਾਦੀ ਵਾਲੇ ਤਿੰਨ ਦੇਸ਼ ਹਨ ਚੀਨ 1.34 ਬੀਲੀਅਨ, ਭਾਰਤ 1.21 ਬੀਲੀਅਨ ਤੇ ਯੂ ਐਸ ਏ 308.7 ਮੀਲੀਅਨ। ਇਹ ਤਿੰਨ ਦੇਸ਼ ਹੀ ਰੱਲ ਕੇ ਦੁਨੀਆ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਦਾ 40 ਫਿਸਦੀ ਹਿੱਸਾ ਸਮੇਟੇ ਬੈਠੇ ਹਨ। ਭਾਰਤ ਪਾਸ ਕੁੱਲ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਦਾ 2.4 ਫਿਸਦੀ ਜੱਦਕਿ ਅਬਾਦੀ 17.5 ਫਿਸਦੀ। ਕਈ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦਾ ਹਾਲ ਤਾਂ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਖੇਤਰਫਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਦਾ ਅੰਤਰ ਕਈ ਗੁਣਾ ਹੈ। ਵੱਧ ਰਹੀ ਅਬਾਦੀ ਹਰ ਰੋਜ ਕਈ ਨਵੀਂ ਸਮਸਿਆ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦੇ ਰਹੀ ਹੈ।
    2011 ਦੀ ਮਰਦਮ ਸ਼ੁਮਾਰੀ ਦੇ ਮੁਤਾਬਕ 35 ਰਾਜ ਤੇ ਯੂ ਟੀ, 640 ਜਿਲ•ੇ, 5924 ਉਪ ਜਿਲ•ੇ, 7935 ਨਗਰ, 640867 ਪਿੰਡ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤੇ ਗਏ ਜੱਦਕਿ 2001 ਦੀ ਮਰਦਮ ਸੁਮਾਰੀ ਵਿੱਚ 593 ਜਿਲ•ੇ, 5463 ਉਪ ਜਿਲ•ੇ, 5161 ਨਗਰ, 638588 ਪਿੰਡ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤੇ ਗਏ ਸਨ। ਯਾਨੀ 2011 ਵਿੱਚ 47 ਜਿਲ•ੇ, 461 ਉਪ ਜਿਲ•ੇ, 2774 ਨਗਰ, 2279 ਵੱਧ ਪਿੰਡ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤੇ ਗਏ। ਪਿਛਲੇ ਦਹਾਕੇ ਵਿੱਚ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਦੀ ਦਰ 17.64 ਫਿਸਦੀ ਹੈ ਜੋਕਿ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ 12.18 ਫਿਸਦੀ ਤੇ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ 31.80 ਫਿਸਦੀ ਹੈ। ਬਿਹਾਰ ਵਿੱਚ ਇਹ ਦਰ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ 23.90 ਫਿਸਦੀ ਰਹੀ ਹੈ ਜੱਦਕਿ ਸਭ ਤੋਂ ਘੱਟ ਨਾਗਾਲੈਂਡ ਵਿੱਚ -0.47 ਫਿਸਦੀ ਹੈ ਤੇ 4.86 ਫਿਸਦੀ ਨਾਲ ਕੇਰਲ ਦੂਜੇ ਨੰਬਰ ਤੇ ਆਉਂਦਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਦੀ ਅਬਾਦੀ 1901 ਵਿੱਚ 238.4 ਮੀਲੀਅਨ ਸੀ ਜੋਕਿ 110 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਚਾਰ ਗੁਣਾ ਤੋਂ ਵੀ ਜਿਆਦਾ ਵੱਧ ਕੇ 1210 ਮੀਲੀਅਨ ਹੋ ਗਈ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਅਬਾਦੀ ਵਾਲਾ ਰਾਜ ਹੈ ਉਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਜਿੱਥੇ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਹੈ 19,95,81,447 ਤੇ ਜੇਕਰ ਕੇਂਦਰ ਸ਼ਾਸਤ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਘੱਟ ਅਬਾਦੀ ਵਾਲਾ ਰਾਜ ਹੈ ਸਿਕੱਮ। ਭਾਰਤ ਦੇ ਕੁੱਝ ਰਾਜਾਂ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਵਿਸ਼ਵ ਦੇ ਕੁੱਝ ਛੋਟੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਤੋਂ ਵੀ ਜਿਆਦਾ ਹੈ। ਜਿਵੇਂਕਿ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਬ੍ਰਾਜ਼ੀਲ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਦੇ ਵੱਖ ਵੱਖ ਰਾਜਾਂ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਇਸ ਤਰਾਂ• ਹੈ -
    ਜੰਮੂ ਅਤੇ ਕਸ਼ਮੀਰ 1,25,48,926 ਹਿਮਾਚਲ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ 68,56,509 ਪੰਜਾਬ 2,77,04,236
    ਚੰਡੀਗੜ• 10,54,686
    ਉਤਰਾਖੰਡ 1,01,16,752 ਹਰਿਆਣਾ 2,53,53,081
    ਦਿੱਲੀ 1,67,53,235
    ਰਾਜਸਥਾਨ 6,86,21,012
    ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ 19,95,81,477 ਬਿਹਾਰ 10,38,04,637
    ਸਿੱਕਮ 6,07,688
    ਅਰੁਣਾਚਲ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ 13,82,611 ਨਾਗਾਲੈਂਡ 19,80,602
    ਮਨੀਪੁਰ 27,21,756
    ਮਿਜੋਰਮ 10,91,014
    ਤ੍ਰਿਪੁਰਾ 36,71,032
    ਮੇਘਾਲਿਆ 29,64,007
    ਅਸਮ 3,11,69,272
    ਪੱਛਮੀ ਬੰਗਾਲ 9,13,47,736 ਝਾਰਖੰਡ 3,29,66,238
    ਉੜੀਸਾ 4,19,47,358
    ਛੱਤੀਸਗੜ• 2,55,40,196 ਮੱਧਿਆ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ 7,25,97,565 ਗੁਜਰਾਤ 6,03,83,628
    ਦਮਨ ਤੇ ਦਿਉ 2,42,911
    ਦਾਦਰਾ ਤੇ ਨਗਰ ਹਵੇਲੀ 3,42,853
    ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ 11,23,72,972, ਆਂਦਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ 8,46,65,533 ਕਰਨਾਟਕ 6,11,30,704
    ਗੋਆ 14,57,723
    ਲਕਸ਼ਦੀਪ 64,429
    ਕੇਰਲ 3,33,87,677
    ਤਮਿਲਨਾਡੁ 7,21,38,958 ਪਾਂਡੁਚੇਰੀ 12,44,464
    ਅੰਡੇਮਾਨ ਤੇ ਨਿਕੋਬਾਰ 3,79,944
    ਖੇਤਰਫਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਘਣਤਾ ਵਾਲਾ ਪ੍ਰਾਂਤ ਹੈ ਦਿੱਲੀ ਜਿੱਥੇ ਪ੍ਰਤੀ ਵਰਗ ਕਿਲੋਮੀਟਰ 11,297 ਵਿਅਕਤੀ ਹਨ ਜੱਦਕਿ ਪ੍ਰਤੀ ਵਰਗ ਕਿਲੋਮੀਟਰ 17 ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਨਾਲ ਅਰੁਣਾਚਲ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਸਭ ਤੋਂ ਘੱਟ ਘਣਤਾ ਵਾਲਾ ਪ੍ਰਾਂਤ ਹੈ।
    ਪਿਛਲੇ ਕੁੱਝ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਦੁਨੀਆ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਵਿੱਚ ਖਾਸਾ ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਹੈ ਖਾਸ ਕਰ ਤੀਸਰੇ ਵਿਸ਼ਵ ਦੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ। ਇਹ ਸਾਰੇ ਹੀ ਦੇਸ਼ਾਂ ਲਈ ਖਾਸਾ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁਨੀਆਂ ਦੇ ਕੁਦਰਤੀ ਸੰਸਾਧਨਾਂ ਤੇ ਭਾਰ ਵੱਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਕੀੜੇ ਮਕੋੜਿਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਧਰਤੀ ਦੇ ਅਤੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਜੀਵ ਅਤੇ ਮਨੁੱਖ ਸਭ ਰੱਲ ਕੇ ਭੋਜਨ ਦੀ ਇੱਕ ਕੜੀ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹਨ। ਸਾਡੇ ਕੁਦਰਤੀ ਸੰਸਾਧਨ ਤਾਂ ਨਿਸ਼ਚਤ ਹਨ ਪਰ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਨਾਲ ਹਰ ਜੀਵ ਦੇ ਹਿੱਸੇ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸੰਸਾਧਨ ਘੱਟਦੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਵੱਧਦੀ ਅਬਾਦੀ ਵਾਤਾਵਰਣ ਤੇ ਮਾੜਾ ਅਸਰ ਪਾਉਂਦੀ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਸਿਰਫ ਜਿਆਦਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਸਗੋਂ ਇਸ ਦੀ ਵੰਡ ਵੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਬੇਤਰਤੀਬ ਹੈ। ਕਿਸੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਤਾਂ ਉਸਦੇ ਖੇਤਰਫਲ ਤੇ ਸੰਸਾਧਨਾਂ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਜਿਆਦਾ ਹੈ ਤੇ ਕਿਸੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸੰਸਾਧਨਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਅਬਾਦੀ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ ਬਹੁਤ ਹੀ ਘੱਟ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤੀ ਵਿਅਕਤੀ ਭੁਮਿ ਦਾ ਅਨੁਪਾਤ 30 ਏਕੜ ਹੈ ਜੱਦ ਕਿ ਇਹੋ ਅਨੁਪਾਤ ਮੈਕਸੀਕੋ ਵਿੱਚ 6.6 ਏਕੜ ਹੈ। ਅਮੀਰ ਤੇ ਗਰੀਬ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਅਨੁਪਾਤ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਅੰਤਰ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਇਲਾਕੇ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਊਥੋਂ ਦੇ ਇਲਾਕੇ ਜਾਂ ਵਾਤਾਵਰਣ ਦੇ ਸੰਭਾਲਣ ਦੀ ਤਾਕਤ ਤੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਨੂੰ ਅਬਾਦੀ ਦਾ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣਾ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਸਥਿਤੀ ਜਾਂ ਤਾਂ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਨਾਲ ਤੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਸੰਸਾਧਨਾਂ ਦੇ ਘੱਟਣ ਨਾਲ ਪੈਦਾ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਮਨੁੱਖੀ ਅਬਾਦੀ ਵਿੱਚ ਬੇਹਿਸਾਬ ਵਾਧਾ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਨ ਤੇ ਆਵਾਜਾਈ ਦੇ ਸਾਧਨਾਂ ਦੀ ਭੀੜ ਦਾ ਕਾਰਣ ਬਣਦਾ ਹੈ। ਤਕਨੀਕੀ ਤੇ ਆਰਥਿਕ ਬਦਲਾਅ ਇਸ ਸਥਿਤੀ ਨੂੰ ਵਿਗਾੜ ਵੀ ਸਕਦਾ ਹੈ ਤੇ ਸੁਧਾਰ ਵੀ। ਵੈਸੇ ਦੇਖਿਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਾਰੀ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਮਨੁੱਖੀ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਦੀ ਦਰ ਵਿੱਚ ਕਮੀ ਆਈ ਹੈ। 1962-63 ਵਿੱਚ ਆਏ ਸਾਲ 2.20 ਫਿਸਦੀ ਦੇ ਅਨੁਪਾਤ ਤੋਂ ਘੱਟ ਕੇ ਇਹ ਦਰ ਹੁਣ 1.1 ਫਿਸਦੀ ਰਹਿ ਗਈ ਹੈ। ਸੀ ਆਈ ਏ ਵਰਲਡ ਫੈਕਟਬੁਕ ਮੁਤਾਬਕ ਦੁਨੀਆਂ ਦੀ ਜਨਮਦਰ 1.91 ਫਿਸਦੀ ਹੈ ਤੇ ਮੌਤ ਦੀ ਦਰ 0.81 ਫਿਸਦੀ ਹੈ। ਜਿਸ ਨਾਲ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਦੀ ਦਰ 1.1 ਫਿਸਦੀ ਤੇ ਬੈਠਦੀ ਹੈ। ਜੱਦਕਿ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਇਹ ਦਰ 1.58 ਫਿਸਦੀ ਹੈ। ਪਿਛਲੀ ਇੱਕ ਸਦੀ ਵਿੱਚ ਦੁਨੀਆਂ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਵਿੱਚ ਖਾਸਾ ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਹੈ ਤੇ ਇਸ ਦਾ ਮੁੱਖ ਕਾਰਣ ਡਾਕਟਰੀ ਸਹੁਲਤਾਂ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਤੇ ਹਰਿਤ ਕ੍ਰਾਂਤੀ ਸਦਕਾ ਖੇਤੀ ਦੇ ਉਦਪਾਦਨ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੋਣਾ ਹੈ। ਅਬਾਦੀ ਵੱਧਣ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਅੋਸਤ ਉਮਰ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੋਇਆ ਹੈ। 1960 ਵਿੱਚ ਜੋ ਅੋਸਤ ਉਮਰ 53 ਸਾਲ ਸੀ ਉਹ ਹੁਣ ਵੱਧ ਕੇ 2010 ਵਿੱਚ 69 ਸਾਲ ਹੋ ਗਈ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਅੋਸਤ ਉਮਰ 66 ਸਾਲ ਤੇ ਮਰਦਾਂ ਦੀ 64 ਸਾਲ ਹੈ।
    ਜਿੱਥੇ ਕਈ ਦੇਸ਼ ਵੱਧਦੀ ਅਬਾਦੀ ਤੋਂ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਹਨ ਉਥੇ ਕਈ ਦੇਸ਼ ਅਜਿਹੇ ਵੀ ਹਨ ਜਿੱਥੇ ਅਬਾਦੀ ਦੀ ਦਰ ਨੈਗੇਟਿਵ ਹੈ ਯਾਨੀ ਅਬਾਦੀ ਵੱਧਣ ਦੀ ਥਾਂ ਘੱਟ ਰਹੀ ਹੈ ਖਾਸ ਕਰ ਪੁਰਵੀ ਯੁਰੋਪ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਜਨਮਦਰ ਮਰਣ ਦੀ ਦਰ ਤੋਂ ਘੱਟ ਹੈ। ਇਸੇ ਤਰਾਂ ਦੱਖਣੀ ਅਫਰੀਕਾ ਵਿੱਚ ਬਿਮਾਰੀ ਕਾਰਣ ਮੌਤ ਦੀ ਦਰ ਜਿਆਦਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਦੀ ਦਰ ਕਾਫੀ ਘੱਟ ਹੈ। 2005 ਤੋਂ ਜਪਾਨ ਦੀ ਅਬਾਦੀ ਵੀ ਘੱਟ ਰਹੀ ਹੈ।
    ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਨਾਲ ਇੱਕ ਜਿਹੜੀ ਮੁੱਖ ਸਮਸਿਆ ਸਾਮਣੇ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਉਹ ਹੈ ਸ਼ਹਿਰੀਕਰਣ ਦੀ। ਪਿੰਡਾਂ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਲੋਕ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵੱਲ ਨੂੰ ਵੱਧ ਰਹੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਤੇ ਅਬਾਦੀ ਦਾ ਦਬਾਅ ਵੱਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। 2008 ਵਿੱਚ ਮਨੁੱਖੀ ਇਤਿਹਾਸ ਵਿੱਚ ਇਹ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਹੋਇਆ ਜਦੋਂ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਿੰਡਾਂ ਤੋਂ ਵੱਧ ਅਬਾਦੀ ਸੀ। ਇੱਕ ਅਨੁਮਾਨ ਮੁਤਾਬਕ 2050 ਵਿੱਚ ਦੁਨੀਆ ਦੀ 70 ਫਿਸਦੀ ਅਬਾਦੀ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇਗੀ ਤੇ ਭਾਰਤ ਚੀਨ ਨੂੰ ਪਿਛਾੜਦੇ ਹੋਏ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੇ ਨੰਬਰ ਤੇ ਆ ਜਾਵੇਗਾ।
    ਸਮਸਿਆ ਸਿਰਫ ਅਬਾਦੀ ਦੀ ਨਹੀਂ ਇਸਦੇ ਸੰਤੁਲਨ ਦੀ ਵੀ ਹੈ। ਨੈਸ਼ਨਲ ਜਿਓਗ੍ਰਾਫਿਕ ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਮੁਤਾਬਕ ਕੁੱਲ ਅਬਾਦੀ ਦਾ 5 ਫਿਸਦੀ ਹਿੱਸਾ ਕੁੱਲ ਉਰਜਾ ਦਾ 23 ਫਿਸਦੀ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰਦੇ ਹਨ। 13 ਫਿਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪੀਣ ਦਾ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦਾ ਤੇ 38 ਫਿਸਦੀ ਨੂੰ ਟਾਇਲਟ ਦੇ ਵੀ ਸਹੀ ਪ੍ਰਬੰਧ ਪ੍ਰਾਪਤ ਨਹੀਂ ਹਨ। ਵੱਧਦੀ ਅਬਾਦੀ ਗਲੋਬਲ ਵਾਰਮਿੰਗ ਦਾ ਵੱਡਾ ਕਾਰਣ ਹੈ। ਧਰਤੀ ਤੋਂ ਪਾਣੀ ਘੱਟ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਕਟਾਅ ਵੱਧਿਆ ਹੈ, ਗਲੇਸ਼ੀਅਰ ਪਿਘਲ ਰਹੇ ਹਨ, ਕਈ ਜੀਵਾਂ ਦੀਆਂ ਪ੍ਰਜਾਤੀਆਂ ਤੁਪਤ ਹੋ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਆਉਂਦੇ ਦਹਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ 2 ਬੀਲੀਅਨ ਅਬਾਦੀ ਹੋਰ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗੀ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜਿਆਦਾ ਅਬਾਦੀ ਗਰੀਬ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇਗੀ ਤੇ ਜੇ ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਵੀ ਅਮੀਰ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਾਂਗ ਜੰਗਲ ਕਟਣੇ, ਕੋਲਾ ਤੇ ਤੇਲ ਬਾਲਣੇ ਤੇ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਖਾਦਾਂ ਤੇ ਰਸਾਇਣਾਂ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਤਾਂ ਕੁਦਰਤੀ ਸੰਸਾਧਨਾਂ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਹੋਰ ਵੀ ਖਰਾਬ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ।
    ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਨਾਲ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲੀ ਸਮਸਿਆ ਉਸਦੇ ਰਹਿਣ ਦੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਦੂਜੀ ਖਾਣ ਤੇ ਪੀਣ ਦੇ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਦੀ। ਵੱਧਦੀ ਅਬਾਦੀ ਦੀ ਰਿਹਾਇਸ਼ ਲਈ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਨਾ ਤੇ ਜੰਗਲ ਕੱਟੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ ਤੇ ਖੇਤੀ ਬਾੜੀ ਦੀ ਜਮੀਨ ਤੇ ਵੀ ਮਕਾਨ ਤੇ ਉਦਯੋਗਿਕ ਇਮਾਰਤਾਂ ਉਸਾਰੀਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਖਾਣ ਵਾਲੇ ਇੰਨਸਾਨ ਤਾਂ ਵੱਧ ਰਹੇ ਹਨ ਪਰ ਖਾਣਾ ਪੈਦਾ ਕਰਣ ਵਾਲੀ ਜਮੀਨ ਦਿਨ ਪਰ ਦਿਨ ਘੱਟ ਰਹੀ ਹੈ। ਵੱਧ ਰਹੀ ਅਬਾਦੀ ਨਾਲ ਤੇਜੀ ਨਾਲ ਕੁੜਾ/ਕਰਕਟ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਇਸ ਕੁੜੇ ਨਾਲ ਨਿਬੜਨ ਲਈ ਅਜਿਹੇ ਤਰੀਕੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਵਾਤਾਵਰਣ ਤੇ ਘੱਟੋ ਘੱਟ ਮਾੜਾ ਅਸਰ ਪਵੇ ਤੇ ਮਨੁੱਖ ਦੀ ਸਹਿਤ ਤੇ ਵੀ ਬੁਰਾ ਪ੍ਰਭਾਅ ਨਾ ਪਵੇ।
    ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਸਮਸਿਆ ਸਿਰਫ ਅਬਾਦੀ ਦੇ ਵੱਧਣ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕੁਦਰਤੀ ਸੰਸਾਧਨਾਂ ਦੇ ਇਸਤਮਾਲ ਦੇ ਸਹੀ ਪ੍ਰਬੰਧ ਨਾ ਹੋਣਾ ਵੀ ਹੈ ਜੋ ਕਈ ਸਮਸਿਆਵਾਂ ਦੀ ਜੜ• ਹੈ। ਕਈਆਂ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨੇ ਇਸ ਨਾਲ ਲੜਣ ਲਈ ਤਕਨੀਕਾਂ ਵਿਕਸਿਤ ਕਰ ਲਈਆਂ ਹਨ ਪਰ ਕਈ ਦੇਸ਼ ਅਜੇ ਵੀ ਪੈਸੇ ਤੇ ਵਸੀਲਿਆਂ ਦੀ ਕਮੀ ਕਾਰਣ ਬਹੁਤ ਪਿਛੜੇ ਹੋਏ ਹਨ।
    ਵਿਸ਼ਵ ਦੇ ਸਮੂਹ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਵੱਧ ਰਹੀ ਅਬਾਦੀ ਤੇ ਕੰਟਰੋਲ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਂਝੇ ਉਪਰਾਲੇ ਕਰਨੇ ਪੈਣਗੇ ਤਾਂ ਜੋ ਇਹ ਸਮਸਿਆ ਦਾ ਹਲ ਨਿਕਲ ਸਕੇ।

    प्रताप सिंह बाजवा २० को बरनाला में


    बरनाला - पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा २० जनवरी को दोपहर १२ बजे नजदीकी गांव ठीकरीवाला में मनाई जा रही शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला की बरसी पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंच रहे हैं। यह जानकारी कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष परमजीत सिंह मान ने दी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर पूर्व सीएम बीबी रजिंदर कौर भट्ठल, सांसद विजयइंदर सिंगला, विधायक केवल सिंह ढिल्लों, विधायक बीबी हरचंद कौर घनौरी, मोहम्मद सदीक, सुरिंदरपाल सिंह सिबिया आदि भी मौजूद रहेंगे।

    शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला की बरसी समागम आजशहीद का जन्मस्थान बना खंडहर, डिप्टी सीएम की घोषणा के बाद भी नहीं बना शहीद का यादगार स्थलशहीद का जन्मस्थल बना खंडहर, सीएम व डिप्टी सीएम के वादे आज...

      बरनाला 
    शहीद सेवा सिंह की 80वीं बरसी पर एक बार फिर शनिवार से राजनेताओं का जमावड़ा लगेगा। इस बार भी पिछले सालों की तरह लोगों से वादे किए जाएंगे जो चुनावी घोषणाएं बन कर रह जाएगी।
    गौरतलब है कि मुगल सरकार का मुकाबला करने के लिए गुप्त योजनाओं को तैयार करने के लिए जंग-ए-आजादी में अहम भूमिका अदा करने वाले सिख इतिहास के महान जरनैलों का रक्षा केन्द्र यहां से 10 किमी दूर गांव ठीकरीवाला है। जहां शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाल की शनिवार से तीन दिवसीय राज्यस्तरीय बरसी मनाई जाएगी। शहीद ठीकरीवाला ने अपनी जीवनकाल में अकाली दल की सेवा की थी। 18 अप्रैल 1934 से भूख हड़ताल के बाद सेवा सिंह 19-20 जनवरी की मध्यरात्रि शहीद हो गए थे। 
    वादे पूरे नहीं करने से ग्रामीणों में रोष:ग्रामीण कुलदीप सिंह, मेजर सिंह, शेर सिंह, गुरदेव सिंह, गिंदर सिंह, जोरा सिंह, आक्रमण सिंह, हरनेक सिंह, कर्मजीत सिंह, नेक सिंह, नाजर सिंह, साधु सिंह तथा निर्मल सिंह ने कहा कि सीएम परकाश सिंह बादल एक करोड़ रुपए ग्रांट देने का ऐलान किया था जबकि डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने गांव ठीकरीवाला में यादगार स्थल बनाने, लड़कियों का कॉलेज बनाने और एक करोड़ रुपए देने का वादा किया था लेकिन यह वादा सिर्फ चुनावी वादा ही रह गया। 
    गांव सेवा सिंह ठीकरीवाला में जिस जगह शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला ने जन्म लिया था। इस इमारत खंडहर का रूप धारण कर चुकी है। वर्षों से वीरान पड़ी इस इमारत के अंदर रुडिय़ों के ढेर लगे है। शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला का परवरिश स्थल जन्मस्थल से 40 गज की दूरी पर सामने स्थित है। यह इमारत शहीद के चचेरे परिवार के सदस्य वकील नरदेव सिंह बठिंडा के पास है। हैरत की बात है कि शहीद का जन्मस्थल जो पूरी तरह से खंडहर बन चुका है, जिसे अकाली विगत 79 वर्षों में ऐतिहासिक धरोहर बनाने में नाकाम रहे है। 
    खंडहर इमारत की कोई  सुध नहीं ले रहा है

    केजरीवाल बोले- कांग्रेस पछताएगी समर्थन क्यों दिया, थोड़ा इंतजार कीजिए

    नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि कॉमनवेल्थ घोटाले की जांच के आदेश जल्द ही दिए जाएंगे। शनिवार को उन्होंने कहा- 'मैंने आज दिनभर कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी फाइलें ही पलटी है। दो दिन से जल बोर्ड की फाइल देख रहा था। थोड़ा इंतजार करिए फिर कांग्रेस वाले भी पछताएंगे कि क्यों किया था समर्थन'।
    केजरीवाल ने कहा कि जिसने भी भ्रष्टाचार किया है किसी को भी नहीं छोड़ेंगे। साथ ही दोहराया कि सोमवार को दिल्ली सरकार तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग को लेकर धरने पर बैठेगी। केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव लडऩे को लेकर भी रुख साफ किया। बोले- 'मेरी इच्छा लोकसभा चुनाव लडऩे की नहीं है। लेकिन यदि पार्टी फैसला करेगी तो मैदान में उतरूंगा।' यह पूछे जाने पर कि क्या वे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे? केजरीवाल ने कहा- 'मैं प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तो क्या मंत्री तक नहीं बनना चाहता।' इस बीच आम आदमी पार्टी ने भी छोटे राज्यों का समर्थन किया है। पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने कहा कि पार्टी तेलंगाना राज्य बनाने के फैसले के साथ है।

    विनोद कुमार बिन्नी का धमाका, 'कांग्रेस के इशारे पर चलने वाले केजरीवाल हैं घमंडी और तानशाह'

    नई दिल्ली - कल तक अरविंद केजरीवाल के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले विनोद कुमार बिन्नी ऐसे बागी हुए कि अपने साथी को घमंडी और तानाशाह तक कह दिया | गुरुवार को 'आप' की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई | बागी हुए बिन्नी ने अपनी ही सरकार और उसके मुखिया केजरीवाल पर जमकर हमला बोला | बिन्नी ने आरोप लगाया कि 'आप' की सरकार ने हर मुद्दे पर दिल्ली की जनता के साथ वादाखिलाफी की | चाहे वह पानी और बिजली बिल में कटौती का मुद्दा हो या फिर जनलोकपाल या भ्रष्टाचार का | पार्टी के नेता सत्ता का सुख भोगना चाहते हैं | इशारे कांग्रेस दे रही है और नाम के लिए 'आप' की सरकार चल रही है |

    आम आदमी पार्टी की करनी और कथनी में फर्क आ गया 

    आम आदमी पार्टी का गठन किसी को मुख्यमंत्री, विधायक और सांसद बनाने के लिए नहीं हुआ था | लोग भ्रष्टाचार और उत्पीड़न से परेशान थे | फिर अन्ना का आंदोलन हुआ | जिसके बाद आम आदमी पार्टी का गठन हुआ | शायद इन्हीं सिद्धांतों के कारण पार्टी को दिल्ली चुनाव में अच्छे नतीजे मिले है | पर अचानक ही सबकुछ बदल गया है | सरकार में आते ही करनी-कथनी में बहुत फर्क आ गया है |

    मुफ्त पानी का मुद्दा

    'चुनाव प्रचार में हमने कहा था कि हर परिवार को ७०० लीटर साफ पानी मुफ्त दिया जाएगा | पर अचानक ही सरकार ने ऐसा फैसला किया जो चौंकाने वाला था | ७०१ लीटर से ज्यादा पानी इस्तेमाल करने वालों के लिए सरचार्ज के साथ बिल देने का फैसला कर दिया | यह तो जनता के साथ धोखा है |'

    बिल नहीं भरने वाले १० लाख ५२ हजार लोगों का क्या हुआ?

    आप सभी को याद होगा कि दिल्ली सरकार के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने सुंदर नगरी इलाके में अनशन किया था | मुद्दा था पानी और बिजली बिल में भ्रष्टाचार का | लोग ज्यादा बिल आने से परेशान थे | केजरीवाल ने इस दौरान लोगों से बिल नहीं देने की अपील की थी | कइयों ने ऐसा ही किया | करीबन १० लाख ५२ हजार लोगों ने एक अप्लीकेशन पर साइन करके अपना विरोध दर्ज कराया था | केजरीवाल ने वादा किया था कि जब हम सत्ता में आएंगे सारे बिल माफ कर दिए जाएंगे | किसी पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी | पर आज सरकार बने हुए १५ दिन से ज्यादा बीत गए पर उन १० लाख ५२ हजार लोगों के साथ किये वादे का क्या हुआ | किसी को नहीं पता | हजारों लोगों के ऊपर चोरी के केस बने हुए हैं | लाखों रुपये का बकाया है | यहां भी कथनी और करनी में फर्क है |

    बिजली दर में कटौती पर भी पलटे

    जब हम चुनाव लड़ रहे थे तो हर जगह यही वादा करते थे | बिजली दर में ५० फीसदी की कटौती कर दी जाएगी | यानी १ लाख रुपये का बिजली बिल देने वाले को ५० हजार का बिल देना पड़ेगा. उसमें ४०० यूनिट वाला कंडिशन नहीं लगा था | कमर्शियल, इंडस्ट्रियल, घरेलू और झुग्गी-झोपड़ी में बिजली इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए अलग-अलग दरें होंगी, ये बात हमने कभी नहीं कही | पर सरकार ने वही किया | चंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए हड़बड़ी में सब्सिडी का खेल किया गया इस कारण से दिल्ली की ९० फीसदी जनता छला हुआ महसूस कर रही है | सच तो ये है कि सरकार को अपने दफ्तर में मौज काट रही है पर मुझ जैसे विधायक को जनता का सामना करना पड़ता है |

    सरकार बने 19 दिन हो गए, जनलोकपाल बिल कहां?

    जनलोकपाल बिल पार्टी के गठन का एक अहम मुद्दा था | पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में यह वादा किया था कि सरकार बनने के १५ दिन के अंदर लोकपाल बिल पास किया जाएगा यानी २९ दिसंबर को | सरकार २८ दिसंबर को बनी, आज १९ दिन बीत चुके हैं | पर लोकपाल बिल पर कोई चर्चा नहीं है | यह तो जनता के साथ धोखा है | आपने तो १५ दिन का वादा किया था | इनकी मंशा साफ है | किसी तरह से दो महीने बीत जाएं | फिर लोकसभा चुनाव की वजह से आचार संहिता लागू हो जाएगी | हम सत्ता का सुख भोगेंगे |

    महिला सुरक्षा के मुद्दे पर क्या हुआ?

    महिला सुरक्षा का विषय सबसे अहम है | आज हर अखबार में नई दिल्ली स्टेशन के पास डेनमार्क की महिला के साथ गैंगरेप की खबर छपी है | चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार के एक मंत्री का इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं है | अगर दिल्ली में किसी दूसरी पार्टी सरकार होती तो आम आदमी पार्टी विरोध प्रदर्शन करके मुद्दा खड़ा कर देती | पर सरकार में आ गए तो महिला सुरक्षा का मुद्दा गौन हो गया | महिला कमांडो फोर्स के गठन की बात थी पर एक सर्कुलर तक नहीं जारी किया गया |

    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शीला दीक्षित और उनके मंत्रियों पर

    ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ समझौता कर लिया है | पार्टी जब चुनाव लड़ रही थी तब तो यही कहा जाता था कि जैसे ही हम सरकार बनाएंगे तो शीला दीक्षित और उनके भ्रष्टाचारी मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे | पर हुआ क्या? कार्रवाई तो छोड़िए जांच के लिए एक आदेश तक नहीं दिए गए | सबसे ज्यादा दुख तब हुआ जब विधानसभा में केजरीवाल ने डॉ. हर्षवर्धन से कहा कि आप शीला और उनके मंत्रियों के खिलाफ सबूत महैया कराएं | सवाल यह है कि जब आपके सबूत नहीं थे तो सार्वजनिक मंच से इतने गंभीर आरोप क्यों लगा रहे थे |

    केजरीवाल तानाशाह और घमंडी हैं

    अरविंद केजरीवाल तानाशाह किस्म के हैं | वे अपने सामने किसी दूसरों की नहीं सुनते | अगर आप उनसे सहमत हैं तो उनके साथ हैं वरना आप चुप रहे तो बेहतर है | जब वे गुस्सा होते हैं उनकी आंखें लाल हो जाती हैं | पार्टी के सारे फैसले ४-५ लोग बंद कमरे में करते हैं | सारे फैसले केजरीवाल करते हैं और बाकी लोग हां में हां मिलाते हैं | अगर आप केजरीवाल के फैसले से असहमत होते हैं तो वे पहले समझाते हैं और फिर गुस्सा हो जाते हैं | आम आदमी पार्टी ने अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और किरण बेदी का इस्तेमाल किया | मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और कुमार विश्वास पुराने साथी हैं | सत्ता में आने के बाद केजरीवाल घमंडी हो गए हैं |  वे तानाशाह की तरह बर्ताव करते हैं |

    'आप' में घमासान, अपने ही साधने लगे निशाना

    नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल होने वाले लोगों का जल्दी ही इससे मोहभंग भी होने लगा है। प्रख्यात उद्योगपति कैप्टन गोपीनाथ ने खुल कर पार्टी की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा है कि इसके भी दूसरी पार्टियों की तरह दिखने का खतरा पैदा हो गया है। इसी तरह टीना शर्मा नाम की कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि पार्टी में लोकसभा की टिकटें पहले ही तय हो गई हैं और लोगों से बेवजह आवेदन मंगवाए जा रहे हैं।
    भारत में सस्ती हवाई यात्रा सेवा शुरू करने वाले कैप्टन गोपीनाथ ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार के फैसले पर खुल कर सवाल उठा दिया है। उन्होंने खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) पर रोक लगाने वाले दिल्ली सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे किसी का भला नहीं होगा। बल्कि छोटे कारोबारियों को भी नुकसान ही होगा। पार्टी जिस तरह के फैसले ले रही है, उससे इसके भी दूसरी पार्टियों की तरह सस्ती लोकप्रियता के लिए कदम उठाने वाली पार्टी में बदल जाने का खतरा पैदा हो रहा है।
    इस बीच, हाल ही में पार्टी में जुड़ी टीना शर्मा नाम की एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि पार्टी ने दिल्ली से लोकसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवार पहले ही तय कर लिए हैं। इनके मुताबिक यहां से केजरीवाल ने गोपाल राय, शाजिया इल्मी, आशुतोष, आशीष तलवार व दिलीप पांडे का नाम पहले से तय किया हुआ है। लेकिन लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए टिकट के आवेदन मंगवाए जा रहे हैं।
    वहीं, टीना का बयान आने के थोड़ी ही देर में आप समर्थकों ने उनकी वो तस्वीरें भी सामने ला दीं, जिनमें वह प्रशांत भूषण पर हमला करने वाले विष्णु गुप्ता के साथ प्रदर्शनों में भाग लेती दिखाई दे रही हैं।

    Friday, January 17, 2014

    AAP में एक और विधायक बागी? सुरेंद्र ने बिन्‍नी पर कार्रवाई का किया विरोध



    AAP में एक और विधायक बागी? सुरेंद्र ने बिन्‍नी पर कार्रवाई का किया विरोध
    नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) में बगावत की आंधी चल रही है। गुरुवार शाम को पार्टी के विधायक सुरेंद्र कुमार ने खुलकर बागी विनोद कुमार बिन्नी का समर्थन कर दिया। उन्‍होंने कहा- बिन्‍नी ने जो मुद्दे उठाए हैं, वह सही हैं, लेकिन उनका तरीका गलत है। उन्‍होंने पार्टी से कहा कि बिन्‍नी पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुरेंद्र ने कहा कि यह परिवार का मामला है और इसे आपस में मिल-बैठ कर सुलझा लेना चाहिया था। इससे पहले विनोद कुमार बिन्नी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर (तस्वीर में) आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर जबर्दस्त हमले किए। आम आदमी पार्टी ने विनोद कुमार बिन्नी के आरोपों पर जवाब देते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी की ओर से मीडिया से मुखातिब हुए मुख्य प्रवक्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि आप में अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं है। आम आदमी पार्टी के ताज़ा रुख का जवाब देते हुए बिन्नी ने कहा है कि अगर मुद्दे उठाना अनुशासनहीनता है तो वे 100 बार ऐसा करेंगे।
    योगेंद्र ने कहा कि बिन्नी ने बीजेपी की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। इसी वजह से वे अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। योगेंद्र ने यह भी कहा कि पार्टी की बैठकों में बिन्नी ने अपनी चिंताएं कभी जाहिर नहीं कीं। शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अब तक शुरू नहीं होने पर योगेंद्र यादव ने सफाई दी, 'दिल्ली में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसकी जांच के लिए एक प्रक्रिया चल रही है। हम किसी एक व्यक्ति के खिलाफ जांच नहीं करेंगे। अगर हम किसी एक के पीछे पड़ जाएं तो आप लोग (मीडिया) ही हमारे पीछे पड़ जाएंगे।' 
    इससे पहले लक्ष्मी नगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने गुरुवार की सुबह 'आप' की सरकार पर जनता से वादाखिलाफी का आरोप लगाया और अपनी कुछ मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में अनशन करने की धमकी दी। उन्‍होंने कहा कि शब्‍दों के खेल के जरिए अरविंद केजरीवाल दिल्‍ली की जनता से धोखा कर रहे हैं। बिन्नी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल कांग्रेस की कठपुतली हैं। बिन्नी ने आरोप लगाया कि इनदिनों पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस के सांसद संदीप दीक्षित से केजरीवाल की नजदीकियां हैं। जो दीक्षित कहते हैं वही अरविंद करते हैं। 
    बिन्नी ने कहा कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे 27 जनवरी से जंतर मंतर पर अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि अगर बिजली के बिल आधे नहीं हुए, पानी मुफ्त नहीं हुआ, महिलाओं की सुरक्षा के लिए कमांडो दस्ते नहीं बने और जन लोकपाल बिल पास नहीं हुआ तो वे अनशन पर बैठेंगे। बिन्नी ने कहा कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ये मांगें पूरी की जाएं। पानी, बिजली, जन लोकपाल पर किए गए वादों को पूरा न करने पर भी बिन्नी ने तीखी आलोचना की। 

    'आप' में बागी और नाराज नेताओं की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। इन नेताओं ने जिन मुद्दों को उठाया है, ये वही मुद्दे हैं, जिन्‍हें आधार बना कर पार्टी खुद को कांग्रेस और भाजपा जैसे दलों से अलग बता रही है। 13 महीने पुरानी 'आप' ने जिन सिद्धांतों के आधार पर राजनीति को स्‍वच्‍छ करके भ्रष्‍टाचार मुक्‍त शासन का जो वादा किया है, उस पर अरविंद केजरीवाल की पार्टी के ही नेताओं ने प्रश्‍नचिन्‍ह खड़ा कर दिया है। आज 'आप' को लेकर आम लोगों के मन में जिन बातों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वे कुछ इस तरह से हैं:
     
    पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र: 'आप' के नेता कैप्‍टन अभिमन्‍यु, मल्लिका साराभाई, विनोद कुमार बिन्‍नी और टीना शर्मा ने पार्टी पर बंद कमरों में फैसले लेने का आरोप लगाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्‍या कांग्रेस में गांधी परिवार, भाजपा में नरेंद्र मोदी और सपा में मुलायम सिंह की तरह 'आप' में सिर्फ केजरीवाल व उनके करीबी सभी फैसले ले रहे हैं? 
     
    भाई-भतीजावाद: विनोद कुमार बिन्‍नी पर मनीष सिसोदिया को तरजीह, शाजिया इल्‍मी, कुमार विश्‍वास पर आरोपों के बाद भी पार्टी उन्‍हें टिकट देने को तैयार है। क्‍या केजरीवाल 'आप' में अलग तरह से भाई-भतीजावाद चला रहे हैं? 
     
    भ्रष्‍टाचार पर नरम रुख: दिल्‍ली में सरकार बनाने के बाद केजरीवाल शीला दीक्षित पर अप्रत्‍याशित रूप से नरम पड़ गए हैं। सरकार बनाने से पहले बड़े-बड़े घोटालों का खुलासा करने वाले केजरीवाल घोटालों पर अचानक चुप क्‍यों हो गए हैं? 
     
    आरोपों पर नहीं होता एक्‍शन : भ्रष्‍टाचार व अन्‍य मामलों में सिर्फ आरोपों को आधार बना कर कांग्रेस-भाजपा नेताओं से इस्‍तीफे मांगने वाली 'आप' अपने नेताओं पर यह फार्मूला लागू नहीं कर रही है। स्टिंग में फंसे अपने किसी नेता पर 'आप' ने एक्‍शन नहीं लिया। केजरीवाल सोमनाथ भारती के बचाव में खुद आ गए हैं। धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले कुमार विश्‍वास के बयान पर भी केजरीवाल कुछ खास नहीं बोले।   
     
    वोट बैंक की पॉलिटिक्‍स: बरेली के नेता तौफीक रजा से मुलाकात के बाद केजरीवाल की आलोचना हुई थी। हाल में उनसे खाप, नक्‍सलवाद पर प्रश्‍न पूछे गए, जिन्‍हें वह टाल गए। पार्टी के नेता योगेंद्र यादव आरक्षण की बात करते भी दिखे, तो क्‍या पार्टी वोट बैंक की पॉलिटिक्‍स कर रही है?
     
    ‘आप’ को सुशासन का यकीन दिलाना होगा:  
    सच कहूं? मैं तो बहुत खुश हूं कि राजनीति में अस्पष्टता बढ़ती ही जा रही है। नई राजनीति के लिए ऐसी अस्पष्टता अच्छी बात है। वे सारे जो यह सोच रहे थे कि कांग्रेस अपने को संभाल पाएगी उसके पहले ही नरेंद्र मोदी अपनी ‘हिटलर डक वॉक’ पूरी करके विजय रेखा पार कर लेंगे, वे हाल की घटनाओं से घबरा गए हैं। मनमोहन सिंह तो दौड़ से हट गए हैं। (हालांकि थोड़ी देर हो गई। नुकसान तो हो चुका है। उन्हीं का कहना है कि जब उनके आस-पास चीजें घट रही थीं तो उनके बारे में उन्हें कुछ पता नहीं था। उनकी पार्टी के अवसर कम हैं, बहुत ही कम और जब तक कोई चमत्कार नहीं होता उनके लिए मोदी नाम के बुलडोजर की रफ्तार कम करना बहुत कठिन साबित होगा। 
     
    अब यह काम अरविंद केजरीवाल को करना होगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने और राजनीतिक शतरंज में भाजपा को मात देने के बाद अब वे राजनीति के नए दबंग हैं। मीडिया का प्रेम उन पर उमड़ पड़ा है। मोदी के रथ की गडग़ड़ाहट धीमी पड़ गई है। केजरीवाल अब राजनीति के नए सितारे हैं और मुख्य धारा की दो प्रमुख पार्टियों को अकेले चुनौती दे रहे हैं। केजरीवाल की इस कोशिश में बड़ी भूलें भी हुई हैं, लेकिन बदलाव लाने की किसी भी कोशिश में ऐसी भूलों से बचा नहीं जा सकता। ये इस प्रक्रिया का अभिन्न अंग हैं और केजरीवाल बदलाव का ही तो वादा कर रहे है (कांग्रेस से थोड़ी मदद लेकर ताकि भाजपा को दूर रखा जा सके)। 
     
    केजरीवाल के लिए आम आदमी को यह यकीन दिलाना जरूरी होगा कि सिर्फ भ्रष्टाचार के पीछे ही नहीं पड़े रहेंगे। सिर्फ उसी की चर्चा नहीं करते रहेंगे बल्कि वे अच्छा शासन भी दे सकते हैं। नकारात्मक चीजों के लिए वोट मिलना अच्छी बात है, लेकिन उसका असर सीमित होता है। उन्हें उन लोगों को भी आकर्षित करने की जरूरत है, जो नए भारत के लिए नए आइडिया चाहते हैं। ऐसे आइडिया जो हमें वहां ले जाएं जहां हमें होना चाहिए- बदलाव के सबसे अग्रिम मोर्चे पर। इसी के लिए उन्हें एक मजबूत, यकीन दिलाने वाली आर्थिक नीति की जरूरत है।
     अरविंद केजरीवाल पर निजी तौर पर हमला बोलते हुए बिन्नी ने कहा, 'जब वे गुस्सा होते हैं उनकी आंखें लाल हो जाती हैं। पार्टी के सारे फैसले 4-5 लोग बंद कमरे में करते हैं। सारे फैसले केजरीवाल करते हैं और बाकी लोग हां में हां मिलाते हैं। उनका इशारा मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और कुमार विश्वास की तरफ था। हालांकि, इन्‍हें उन्‍होंने अपना पुराना साथी भी बताया।
     
    बिन्‍नी ने कहा कि अगर आप केजरीवाल के फैसले से असहमत होते हैं तो वे पहले समझाते हैं और फिर गुस्सा हो जाते हैं। सत्ता में आने के बाद केजरीवाल घमंडी हो गए हैं। वे तानाशाह की तरह बर्ताव करते हैं।' बिन्नी ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और किरण बेदी का इस्तेमाल किया। 
     
    बिन्नी ने कहा कि विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही कई उम्मीदवारों के टिकट फिक्स थे। जनता से दस्तखत वगैरह कराना, पार्टी के वॉलंटियरों के साथ धोखा देना था। लोकसभा चुनाव से पहले कुमार विश्वास किस तरह अमेठी में चुनाव प्रचार कर रहे हैं, शाजिया इल्मी अपने क्षेत्र में किस हैसियत से प्रचार कर रही हैं। बिन्नी ने शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच न करने पर भी अरविंद केजरीवाल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केजरीवाल डॉ. हर्षवर्धन से शीला दीक्षित के खिलाफ सुबूत क्यों मांग रहे हैं? वे चुनाव से पहले जनता से यह क्यों कहते थे कि उनके पास शीला दीक्षित के खिलाफ सुबूत हैं? अगर उनके पास सुबूत नहीं थे तो वे दिल्ली की जनता से क्यों झूठ बोल रहे थे? और अगर उनके पास सुबूत हैं तो वे जांच क्यों नहीं कर रहे हैं?
     दिल्ली की सीटें तय, दिखावा कर रही 'आप': टीना शर्मा
     
    भाजपा छोड़कर हाल ही में आम आदमी पार्टी में शामिल हुई टीना शर्मा ने भी बुधवार को यह कहते हुए बगावत कर दी कि पार्टी केवल सत्ता के लिए काम कर रही है। टीना ने वादा किया पार्टी ने दिल्ली की सात सीटों में से पांच पर प्रत्याशियों के नाम पहले से ही तय कर लिए हैं, टिकट के लिए फॉर्म भरा जाना तो महज एक दिखावा है। टीना ने बताया कि पार्टी शाजिया इल्मी, गोपाल राय, आशुतोष, आशीष तलवार और दिलीप पांडेय को टिकट देगी तो बाकी लोगों को फॉर्म भरवाने के नाम पर बेवकूफ क्यों बनाया जा रहा है। 
     
    उन्होंने कहा कि पार्टी ने 2013 के घोषणा-पत्र पर अभी तक कोई काम नहीं किया और उसका ध्यान 2014 के घोषणा-पत्र पर है। पार्टी का पूरा ध्यान केवल 2014 के लोकसभा चुनाव पर है। महिला कमांडो का वादा किया गया था? इस संबंध में मैंने सभी नेताओं को मेल किया। चिट्ठी लिखी। लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है। आम आदमी को जो मुद्दे थे वो कहीं गुम हो गए और जब हम जनता के बीच जाते हैं तो उनके सवालों का हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में आजकल एक अजीब सा ट्रेंड बन गया है कि बड़े-बड़े लोग पार्टी में शामिल हो रहे हैं और इसके साथ ही वे अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ने का एलान भी कर देते हैं।
    फिर बिफरे बिन्नी, बोले- झूठे हैं अरविंद केजरीवाल
     
    बुधवार को जब बिन्‍नी ने बागी तेवर दिखाए थे तो अरविंद केजरीवाल खुद सफाई देने सामने आए। उन्होंने कहा, ‘बिन्नी पहले मंत्री का पद मांग रहे थे। अब लोकसभा चुनाव के लिए टिकट मांग रहे हैं। वो इसके लिए मेरे घर भी आए थे। लेकिन पार्टी फैसला कर चुकी है कि कोई विधायक लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगा।’ तब बिन्नी ने भी पलटवार किया। कहा, ‘न तो मैं मंत्री पद मांगने गया था और न ही लोकसभा चुनाव का टिकट मांगने। केजरीवाल ने यदि ऐसा कहा है तो वो झूठ बोल रहे हैं।’ 
     
    बिन्नी ने कहा, ‘पार्टी नेता संजय सिंह ने ही फॉर्म मंगवाया था। ये कहकर कि केजरीवाल ने कहा है। मैं नहीं गया था किसी के पास।’ 
     
    पार्टी नहीं छोड़ेंगे, मुद्दे से भटकने पर विरोध करेंगे 
     
    लक्ष्मी नगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता ने अपना समर्थन दिया था। तब सरकार कह रही थी कि सत्ता में आए तो 15 दिन के भीतर कांग्रेस की भ्रष्ट मुख्यमंत्री व मंत्रियों को जेल में डाल देंगे। आज सरकार उन्हीं के साथ मिलकर सत्ता में है जिनके खिलाफ पार्टी ने चुनाव लड़कर जीता। भ्रष्टाचारियों को जेल में डालना तो दूर अभी तक उन मामलों की जांच तक शुरू करने के आदेश नहीं दिए गए। बिन्नी ने कहा कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे और मुद्दों से भटकने पर इसका विरोध करेंगे। 
     
    उन्‍होंने कहा कि महत्वाकांक्षा बहुत छोटा शब्द है, मैंने तो 15 मार्च को तब पार्टी ज्वाइन की थी जब पार्टी का कोई नामलेवा नहीं था। मैंने पार्टी के लिए 9 महीने खून-पसीना बहाया। आज बहुत से लोग पार्टी में आ रहे हैं

    Uploads by drrakeshpunj

    Popular Posts

    Search This Blog

    Popular Posts

    followers

    style="border:0px;" alt="web tracker"/>