Monday, June 20, 2016

कैराना के घरों में लटकते तालों के पीछे ये है असली कहानी.

  2017 में अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में राज्य का कोई भी छोटा-बड़ा मुद्दा सियासी रूप ले सकता है। इस परिस्थिति में बात अगर जाति-धर्म से जुड़ी हो तो फिर वो मुद्दा राजनीति से कैसे अछूता रह सकता है। ऐसा ही कुछ हो रहा है उत्तर प्रदेश के कैराना में, जहां अलग अलग सूत्रों के माध्यम से अलग-अलग खबरें चल रही है। कुछ रिपोर्टों का मानना है कि कई हिंदू परिवारों ने दहशत में आकर वहां से पलायन किया है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों के मुताबिक यह महज चुनावी लाभ लेने के लिए एक मुद्दा है। आइए जानते हैं क्या है कैराना सच....
क्या है यह पूरा विवाद- इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब स्थानीय बीजेपी सासंद हुकुम सिंह 346 हिंदू परिवारों की सूची सौंपते हुए यह आरोप लगाया कि कैराना को कश्मीर बनाने की कोशिश की जा रही है। हुकुम सिंह ने कहा कि यहां हिंदुओं को धमकाया जा रहा है, जिससे हिंदू परिवार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। हुकुम सिंह के इतना कहते ही बीजेपी ने अखिलेश सरकार पर हमला बोल दिया। बीजेपी ने न सिर्फ अखिलेश सरकार के कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए बल्कि इसे सोची समझी रणनीति भी करार दिया। बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने कैराना से पलायन करने वाले हर घर का सत्यापन कराया है, जबकि इस लिस्ट में ऐसे भी नाम शामिल हैं जो आर्थिक और कारोबारी वजह से पलायन कर चुके थे। इनके पलायन का संबंध न किसी आतंकी माहौल से था और न ही मुस्लिम समुदाय के खौफ से। मामला बढ़ने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दखल देते हुए राज्य सरकार को नोटिस भेजकर चार हफ्ते के अंदर जवाब की मांग की है। दूसरी तरफ, बीजेपी ने 9 सदस्यीय जांच कमेटी बनाकर सियासी गरमाहट और बढ़ा दी है. कमेटी आज कैराना पहुंचेगी और हिंदुओं के पलायन के बारे में जानकारी जुटाएगी।
क्या है हकीकत- कुल मिलाकर अब यह पूरी तरह सियासी मुद्दा बन चुका है और इस मुद्दे पर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी भी की जा रही है। सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया गया है कि पिछले पांच सालों में कैराना में हिन्दुओं की आबादी 22 फीसदी कम हो गई है। अब तक की पड़ताल में जो सबसे अहम बात सामने आई है वो यह है कि इलाक़े में बिगड़ती कानून व्यवस्था की वजह से कुछ मुस्‍लिम परिवार भी इलाके से पलायन कर चुके हैं। एक तरफ जहां ऐसा कहा जा रहा है कि यहां व्यापारियों से रंगदारी मांगी जाती है तो दूसरी तरफ पिछले आठ से दस सालों में कैराना से लोग बेहतर कमाई और नौकरी के लिए बाहर जाते जाते रहे हैं जिसमें  मुस्लिम परिवार भी शामिल हैं। बीजेपी द्वारा दी गई सूची में कुछ लोग ऐसे हैं जो सालों पहले मर चुके हैं तो कुछ ने कभी कैराना छोड़ा ही नहीं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जो कारोबार, रोजगार और बेहतर भविष्य के लिए बाहर गए हैं।
बीजेपी ने क्यों उठाया मुद्दा- बीजेपी कैराना के मुद्दे को उत्तर प्रदेश में होने वाली आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान भुनाना चाहती है। जाहिर है कैराना मुद्दे से पूरे राज्य में ध्रुवीकरण करने में सहायता मिलेगी। जाहिर है कि बीजेपी ने इलाहाबाद में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में स मुद्दे को जोर शोर से उठाते हुए यह साफ कर दिया कि पश्चिम यूपी में यह बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। ऐसे में चुनावी बिगुल फूंकते ही कैराना का मुद्दा पार्टी के हाथ लगा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कैराना के मुद्दे को जिस प्राथमिकता से उठाया है, निश्चित रूप से उसके दूरगामी संकेत है।
पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गज नेता और मंत्री इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोल रहे है। कैराना मुद्दे की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अखिलेश सरकार को घेरने वालों में बीजेपी के योगी आदित्यनाथ,  अमित शाह, राजनाथ सिंह और किरन रिजिजू जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हैं।यह मुद्दा बीजेपी के लिए दादरी और अयोध्या से भी बढ़कर हैं इसलिए भी है क्योंकि यह पश्मिमी यूपी का अहम हिस्सा तो है ही साथ में यहां मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है। मुस्लिम औऱ जाट आबादी के मद्देनजर से यह इलाका काफी अहम हो जाता है।
आपको बता दें कि 1980 में इसी इलाके से चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए किसी भी तरह के कर्ज और टैक्स के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। पश्चिमी यूपी में अजगर (अहिर, जाट, गुज्जर,राजपूत) वोट बैंक पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की अच्छी पैठ थी और इसने सभी राजनीतिक दलों को अपनी तरफ झुकने के लिए मजबूर किया। मुलायम सिंह भी पश्चिमी यूपी में अच्छी पकड़ रखते हैं और मुलायम ने मुस्लिमों को भी इस गुट में जोड़ लिया था।
इससे पहले मुजफ्फरनगर के दंगों ने इलाके की शांति को लंबे समय तक के लिए खत्म करके रख दिया था। हालांकि मुजफ्फरनगर दंगों का सियासी फायदा बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में लिया था। ऐसे में बीजेपी पश्चिमी यूपी को नजरअंदाज नहीं कर सकती है और वह पूरी कोशिश में जुटी है कि उसे एक बड़े वर्ग का वोट हासिल हो सके। ऐसे में अगर वोटों का ध्रुवीकरण होता है तो पार्टी को जबरदस्त सफलता हासिल हो सकती है।2014 के लोकसभा चुनाव में सभी 19 संसदीय क्षेत्र जोकि पश्चिमी यूपी की जाट बेल्ट में थे जिसमें सहारनपुर,फतेहपुर सीकरी शामिल हैं भाजपा के खाते में गई थी। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद भाजपा को बड़ी संख्या में हिंदुओं की विभिन्न जातियों का वोट मिला था।
क्या है कैराना का इतिहास-  पंडित भीमसेन जोशी और रोशन आरा बेगम जैसे बड़े शास्त्रीय संगीतकार देने वाले कैराना को प्राचीन काल में कर्णपुरी के नाम से जाना जाता था और माना जाता है कि महाभारत काल में कर्ण का जन्म यहीं हुआ था। हालांकि इसका कोई ऐतिहासिक आधार नहीं मिला है। यह कहानी भी कम प्रचलित नहीं है कि कैराना का नाम ‘कै और राणा’ नाम के राणा चौहान गुर्जरों के नाम पर पड़ा और माना जाता है कि राजस्थान के अजमेर से आए राणा देव राज चौहान और राणा दीप राज चौहान ने कैराना की नींव रखी।  कैराना के आस-पास कलश्यान चौहान गोत्र के गुर्जर समुदाय के 84 गांव हैं। सोलहवीं सदी में मुग़ल बादशाह जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुज़ुक-ए-जहांगीरी में कैराना की अपनी यात्रा के बारे में लिखा है। माना जाता है कि अपने समय के महान संगीतकार मन्ना डे जब किसी काम से कैराना पहुंचे थे तो कैराना की सीमा में घुसने से पहले महान संगीतकारों के इस क्षेत्र के सम्मान में उन्होंने अपने जूते उतारकर हाथ में रख लिए थे।
राजधानी दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश के मुझफ्फरनगर से 50 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिम में हरियाणा की सीमा पर यमुना किनारे बसा कैराना का ऐतिहासिक महत्व रहा है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले का कैराना तहसील पहले मुजफ्फरनगर जिले की तहसील थी। 2011 में मायावती ने शामली को एक अलग जिला घोषित किया, जिसमें कैराना भी शामिल हो गया। कैराना एक लोकसभा और विधानसभा सीट भी है। पिछड़ा इलाका होने के कारण बरसों से यहां के लोग पानीपत, मेरठ, दिल्ली सहित अन्य आस पास के जगहों पर काम की तलाश में जाते रहे है।
क्या है जातीय समीकरण- 2011 जनगणना के मुताबिक कैराना तहसील की की जनसंख्या एक लाख 77 हजार 121है जिसमें कैराना नगर पालिका की आबादी करीब 90 हजार है। कैराना नगर पालिका परिषद के इलाक़े में 81 फीसदीमुस्लिम, 18 फीसदी  हिंदू और अन्य धर्मों को मानने वाले लोग 1 फीसदी हैं। यूपी में साक्षरता दर 68 फीसदी है लेकिन कैराना में 47 फीसदी लोग ही साक्षर हैं। शामली के कांधला, कैराना, झिंझाना, आसपास के गांव के अलावा कैराना के आलकला, कायस्थवाड़ा, गुंबद, लालकुआं, बेगमपुरा, दरबारखुर्द, आर्यपुरी, कांधला अड्डा पानीपत रोड में हिंदू-मुस्लिम मिश्रित आबादी है।
क्या कहा गया पुलिस रिपोर्ट में- इस मुद्दे पर कैराना प्रकरण पर सहारनपुर रेंज के डीआईजी एके राघव की रिपोर्ट सामने आई है। खबरों के अनुसार राघव ने डीजीपी मुख्यालय को भेजे अपनी रिपोर्ट में बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राघव ने कहा कि अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों में लाभ के लिए बीजेपी हिंदुओं में कथित असुरक्षा की भावना को मुद्दा बनाकर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण करना चाहती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सांसद हुकुम सिंह ने भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर जीत हासिल की थी। अब वो अपनी बेटी को भी इसी रास्ते चुनावी मैदान में उतारना चाहता है।
रिपोर्ट मे कहा गया है कि बीजेपी और हिंदू संगठन विधानसभा चुनावों में लाभ लेने के उद्देश्य से हिंदुओं में कथित असुरक्षा की भावना को मुद्दा बनाकर हिंदू मतों का ध्रुवीकरण कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में व्यापारी और किसान अपनी उन्नति के लिए कस्बा छोड़कर चले गए हैं। डीआईजी ने अपनी रिपोर्ट में किसी बड़े सांप्रदायिक घटना से भी इंकार नहीं किया है। इस पूरे मामले ने अब जोर पकड़ लिया है। बड़े स्तर पर सत्यापन का कर्य जारी है। डीएम खुद अलग से टीमें लगाकर सत्यापन की क्रास चेकिंग करवा रहे हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन ने भी सत्यापन में माना है कि सूची में शामिल कुछ परिवारों को दहशत के कारण ही कैराना छोड़ना पड़ा। जरूरत इस बात की है कि यूपी सरकार और केंद्र सरकार दोनों को मामले की निष्पक्ष जांच करवा कर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

क्या जानते हैं आप कैराना का इतिहास, यहीं हुआ था दानवीर कर्ण का जन्म!

कैराना से परिवारों के पलायन की खबरें सामने आते ही इस शहर के बारे में लोग जानकारी लेने को उत्सुक दिखाई दे रहे हैं। अब जब पलायन की खबर ने देश की राजनीति के केंद्र में कैराना को ला दिया है। इन सबके बीच इस शहर को समझने की कोशिश करते हैं-
- ऐसा माना जाता है कि पुरातन काल में कैराना में ही दानवीर कर्ण का जन्म हुआ था और कैराना को कर्ण की नगरी भी कहा जाता है।
किसी जमाने में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कैराना भारतीय शास्त्रीय संगीत के मशहूर किराना घराना के लिए जाना जाता था, जिसकी स्थापना महान शास्त्रीय गायक अब्दुल करीम खां ने की थी।
-माना जाता है कि अपने समय के महान संगीतकार मन्ना डे जब किसी काम से कैराना पहुंचे थे तो कैराना की सीमा में घुसने से पहले इस क्षेत्र का सम्मान करने के लिए उन्होंने अपने जूते उतारकर हाथों में पकड़ लिए थे। इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि यह धरती महान संगीतकारों की है और इस धरती पर वो जूतों के साथ नहीं चल सकते।
- भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पंडित भीमसेन जोशी भी कैराना घराने के गायक हैं।
- इतिहास के पन्नों में कैराना का महत्व सदियों पुराना है और इस जगह का संगीत से गहरा रिश्ता है। लेकिन बड़े दुख की बात है कि आज ऐतिहासिक महत्व वाले इस शहर में आतंक और रंगदारी की वजह से परिवार पलायन कर रहे हैं।

कैराना में धारा 144 लागू, किसी भी यात्रा पर पश्चिमी यूपी में रोक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कैराना में हिंदुओं के पलायन के मुद्दे पर जमकर राजनीति हो रही है। जिस तरह से कैराना राजनैतिक सरगर्मियां तेज हुई हैं उसे देखते हुए पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गयी है। कैराना में धारा 144 लागू करने के साथ ही पूरे इलाके में जबरदस्त सुरक्षा के इंतजाम किये ये हैं और इसे छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कैराना पलायन- जेल के भीतर से जल रहा हैं आतंक का खेल यूपी के डीजीपी जावीद अहमद ने कहा कि कैराना के सांप्रदायिक सौहार्द को बनाये रखने के लिए धारा 144 लागू किया गया है। जावीद अहमद ने कहा कि हम इस इलाके का माहौल नहीं बिगड़ने देंगे। इसे देखते हए पश्चिमि यूपी में किसी भी तरह की यात्रा पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गयी है। वहीं भाजपा विधायक संगीत सोम ने कहा कि हुकुम सिंह हमारे वरिष्ठ नेता हैं ऐसे में पलायन को रोकने के लिए भी जिस भी तरह का फैसला लिया जाएगा हम उसका साथ देंगे। सोम ने कहा कि हम कैराना में किसी तरह का दंगा कराने नहीं जा रहे हैं बल्कि पलायन करने वाले हिंदु परिवारों को यह भरोसा दिलाने जा रहे हैं कि हम उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि मैं उस इळाके में जाउंगा और सरकार के फैसले के सामने नहीं झुकेंगे। पीएम खुद नजर रख रहे हैं कैराना पलायन पर, गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट संगीत सोम ने कहा कि हिंदुओं के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दुंगा। दरअसल सरधना से कैराना तक 42 किलोमीटर तक संगीत सोम के निर्भय यात्रा ने इलाके में तनाव को बढ़ा दिया है। जिसे देखते हुए इस पूरे इलाके में किसी भी तरह की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कैराना मुद्दे पर भाजपा में दो तरह के मत निकलकर सामने आ रहे हैं। एक तरफ संगीत सोम ने बिना हुकुम सिंह की इजाजत के यह यात्रा निकाली तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि वह फिलहाल कैराना नहीं जा रहे हैं और ना ही उनका ऐसी कोई योजना है। कैराना पलायन पर पूर्व मंत्री नकुल दुबे का कहना है कि इस सदी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि भाजपा ओछी राजनीति कर रही है। उन्होने कहा कि मायावती के कार्यकाल में प्रदेश मे शांति कायम थी।
 

Friday, June 3, 2016

मथुरा हिंसा: जानिए जवाहरबाग के कब्जाधारियों की मांगे

 Friday, June 3, 2016, मथुरा। मथुरा के राजकीय उद्यान जवाहरबाग को कब्जाकर सत्याग्रह की आड़ में समानांतर सरकार चलाने वाले उपद्रवियों ने गुरुवार को मौत का जो नंगा नाच किया उसकी जितनी भी आलोचना की जाए कम है। इस उपद्रव में यूपी पुलिस के दो बहादुर अफसर सहित कुल 21 लोगों की मौत हुई है। अब तक 124 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यही है रामवृक्ष यादव जिसके इशारे पर मथुरा में मचा मौत का तांडव सुभाष चंद्र बोस और सत्याग्रह के नाम पर इन उपद्रवियों ने मथुरा में एक आतंक बना रखा था। इतना ही नहीं उनकी एक अलग मांग थी। जी हां आजाद भारत विधिक वैचारिक सत्याग्रही नाम के इस संस्था की मांगे जानकर आप सोच में पड़ जाएंगे। वाहियात मांगे भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द किया जाए।  इस समय की प्रचलित मुद्रा की जगह आजाद हिंद फौज करेंसी शुरू की जाए।  एक रुपये में 60 लीटर डीजल और एक रुपये में ही 40 लीटर पेट्रोल की बिक्री शुरू की जाए।  प्रणव मुखर्जी और नरेन्द्र मोदी को गैर भारतीय घोषित किया जाए।  चूंकी इस संस्था के लोग सुभाष चन्द्र बोस के अनुयायी हैं, इसलिए उन्हें सेनानी का दर्जा दिया जाए।  उनको पेंशन के साथ ही जवाहरबाग में स्थायी निवास दिया जाए। देश में सोने के सिक्कों का प्रचलन किया जाए। आजाद हिंद फौज के कानून माने जाएं। इसी की सरकार देश में शासन करे। जयगुरुदेव का मृत्यु प्रमाण पत्र दिया जाए। आजाद हिंद बैंक करेंसी से लेन-देन शुरू की जाए। सत्‍याग्रहियों' के बीच में पुलिस कोई कार्रवाई न करे। देश में अंग्रेजों के समय से चल रहे कानून खत्‍म किए जाएं। पूरे देश में मांसाहार पर बैन लगाया जाए। मांसाहार करने वालों को सजा दी जाए।

Thursday, February 25, 2016

हाफिज सईद कुछ भारतीय पत्रकारों को टेस्ट करने के चक्कर में

अब तक भारत में अपने नापाक मंसूबों से सफल न होने से बौखलाई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। अब उसका पयास है भारत के युवाओंपत्रकारों व कुछ संगठनों तक अपनी पहुंच बनाने का। अब आईएसआई सोशल मीडिया को भी हथियार बना रही है। आईएसआई अंगूठा छाप लश्कर चीफ हाफिज सईद के ट्विटर और फेसबुक एकाउंट चलाकर भारत के खिलाफ जहर उगल रही है। सूत्रों के अनुसार अब तक भारत में अपने नापाक मंसूबों में असफल होने के बाद आईएसआई अपने जेहादी पोपेगेंडा के साथ युवाओं को भड़काने और उन तक पहुंच बनाने के अलावा कुछ संगठनों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए ट्विटरफेसबुक और यू-ट्यूब जैसे एकाउंट का सहारा ले रही है। यह भी खबर है कि हाफिज सईद ने भारतीय इलैक्ट्रॉनिक चैनलों के कुछ पत्रकारों व एंकरों के बारे में भी जानकारी लेना शुरू कर दी है ताकि उन्हें एपोच कर अपने पोपेगेंडा के लिए उन्हें माध्यम बनाया जाए। इन पत्रकारों व एंकरों का बैक ग्राउंड छाना जा रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जो मोदी सरकार के खिलाफ हैं और अक्सर मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाते रहते हैं। यह देखा जा रहा है कि इनमें से कौन-कौन एपोचेबल हो सकता है। आईएसआई ने आतंकी संगठन लश्कर के चीफ हाफिज सईद के एकाउंट चलाने और उस पर भारत में अस्थिरता पैदा करनेयुवाओं को भड़काने और जेहादी बातों को अपलोड करना शुरू कर दिया है। चूंकि अगूंठा छाप हाफिज सईद को अपनी भाषा के अलावा और कोई भी भाषा बोलनी-लिखनी नहीं आतीलिहाजा आईएसआई ने उसके ट्विटरफेसबुक और यू-ट्यूब जैसे एकाउंट चलाने का जिम्मा ले लिया है। सूत्रों के अनुसार भारत ने अब तक हाफिज के इस तरह के करीब दो दर्जन एकाउंट बंद कराए हैं। इसके बाद आईएसआई ने भी रणनीति बदलते हुए कमान अपने हाथ में ले ली है। सूत्रों के अनुसार कहने को हाफिज सईद का साइबर सेल हैजो भारतीय पत्रकारों का एक डाटा बैंक तैयार कर रहा है। इनमें पत्रकारों के मोबाइल नंबर-मेल और ट्विटर एकाउंट का लेखा-जोखा है। इसके अलावा कुछ छात्र संगठनों व कुछ अन्य संगठनों का भी डाटा बैंक तैयार किया जा रहा हैताकि हाफिज के नाम पर सोची समझी रणनीति के तहत अपनी बातों को इस एकाउंट पर डाला जा सके। अगर सूत्रों की मानें तो कुछ दिन पहले हाफिज सईद ने कुछ भारतीय पत्रकारों से ट्विटर के माध्यम से संपर्क भी साधा था। हाफिज के तथाकथित एकाउंट पर आ रहे संतोषजनक जवाब ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। सुरक्षा एजेंसी उन भारतीय पत्रकारों से भी संपर्क करने वाली है जो ट्विटर के माध्यम से लश्कर सरगना हाफिज सईद से जुड़े हैं। आईएसआई की इस खतरनाक रणनीति पर अविलंब रोक लगाना जरूरी 

जेएनयू की बिसात पर रोटियां सेंकते सियासी दल

पिछले कई दिनों से जारी जेएनयू विवाद के लिए गुनहगार कौन-कौन हैं यह तो अब अदालतें ही तय करेंगी लेकिन सियासी दल बहरहाल इस मुद्दे को लेकर अपने सियासी फायदे नफे-नुकसान के लिए अपनी रोटियां सेंकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रद्रोह के पाले खींचकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। दरअसल कटु सत्य तो यह है कि जिस दिन से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने उसी दिन से एक तरफ कांग्रेस पार्टी और मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ हो गया। आप पिछले दो साल देख लें शायद ही कोई ऐसा मुद्दा हो जब कांग्रेस व इस अल्पसंख्यक वर्ग ने मोदी का विरोध नहीं किया हो। जहां तक वामपंथियों का सवाल है लगभग सारी दुनिया में सिमट चुके वामदलों को भी मौके की तलाश थीजब वह अपनी खोई जमीन वापस हासिल कर सकें। इनकी मदद कर रहे हैं इलैक्ट्रॉनिक चैनल के कुछ एंकर व मैनेजमेंट। टीवी पर रोज यह किसी न किसी बहाने मोदी और उनकी सरकार को घेरने का प्रयास करते हैं। आज इलैक्ट्रॉनिक चैनल भी दो खेमों में बंट गए हैं। कुछ खुलकर विरोध कर रहे हैं तो कुछ खुलकर समर्थन। इस सियासी जंग में असल मुद्दे दब रहे हैं। जेएनयू में नौ फरवरी को क्या हुआनौ फरवरी को जेएनयू में एक सभा में पाकिस्तान जिन्दाबादकश्मीर की आजादी और भारत की बर्बादी तक जैसे नारे लगे। इस सभा में और नारेबाजी में बाहर से आए लोगों के साथ न सिर्प जेएनयू के छात्र-छात्राएं थीं बल्कि उस असैम्बली में कन्हैया कुमार भी मौजूद था। सो सभा तो हुई और उसमें राष्ट्र विरोधी नारे लगे यह तो तय है। अब सवाल उठता है कि कन्हैया ने नारे लगाए या नहींक्या उस पर देशद्रोह का केस होना चाहिए था या नहींदिल्ली पुलिस के कमिश्नर भीम सेन बस्सी ने कई बार दोहराया है कि पुलिस के पास कन्हैया के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं जो अदालत में पेश कर दिए गए हैं। वीडियो रिकार्डिंग सही है या नहीं निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच से ही तय हो पाएगा। इसका पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस भारत विरोधी नारों के टेप और कन्हैया कुमार की आवाज की फोरेंसिक जांच करा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल अलग-अलग वीडियो में कन्हैया कुमार के राष्ट्र विरोधी नारे लगाने और नहीं लगाने के दावे किए जा रहे हैं। फोरेंसिक जांच से साफ हो पाएगा कि भारत विरोधी नारों में कन्हैया की आवाज थी या नहींदिल्ली पुलिस का दावा है कि वीडियो टेप के अलावा पुलिस के पास 17 गवाह हैं। उन्होंने पुलिस के सामने कन्हैया के खिलाफ बयान दर्ज कराए हैं। ज्यादातर ने कहा कि कन्हैया देश विरोधी नारे लगा रहा था। वह उस कार्यक्रम का हिस्सा था जिसमें देश विरोधी नारे लगे। कन्हैया ने न तो नारों को रोकने के लिए कहा और न ही सभा से हटा। 17 गवाहों में ज्यादातर जेएनयू के हैं। पर यह सियासी दल कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं करना चाहते और कन्हैया को बेकसूर साबित करने में लगे हुए हैं। हम कहते हैं कि अगर कन्हैया ने देशद्रोह नहीं किया और उन पर जबरन यह चार्ज लगाया गया है तो अदालतें हैं वह उसे राष्ट्रद्रोह से मुक्त कर देंगी। हमारी लड़ाई जेएनयू से नहीं है। जेएनयू ऐसा नहीं कि वह एक महान संस्थान नहीं पर मुट्ठीभर छात्रों की वजह से वह आज निशाने पर आ गया है। अगर आज जेएनयू गलत कारणों से सुर्खियों में है तो इसके लिए सरकारयूनिवर्सिटी प्रशासन और जेएनयू के छात्र सभी जिम्मेदार हैं। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए जेएनयू में गिरफ्तारी भले ही पहली बार हुई होलेकिन अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में ऐसी हरकतें वहां लगातार होती रही हैं। भारत के टुकड़े करने की नारेबाजी इसकी चरम परिणति थी। यदि पहले ही ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती तो यह दिन न देखना पड़ता। 80 के दशक में जेएनयू कैम्पस में इंदिरा गांधी के खिलाफ नारेबाजी को सियासी विरोध मानकर भले भुला दिया जाएलेकिन 2000 में कारगिल में लड़ने वाले वीर जवानों के साथ जो हुआउसे कतई भुलाया नहीं जा सकता है। कारगिल युद्ध खत्म होने के बाद ही जेएनयू कैम्पस में भारत-पाकिस्तान मुशायरा का आयोजन किया गया। मुशायरे का आनंद लेने के लिए कारगिल में पाकिस्तान के साथ लड़ने वाले सेना के मेजर केके शर्मा और मेजर एलके शर्मा भी पहुंच गए। एक पाकिस्तानी शायर की भारत विरोधी शायरी का कारगिल के दोनों हीरो ने विरोध किया। इस पर जेएनयू के छात्रों ने उल्टा उन दोनों की बुरी तरह पिटाई कर दी। अधमरी हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। उस समय यह मुद्दा संसद में भी उठा और तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीस घायल मेजरों को देखने अस्पताल भी गए। लेकिन छात्र संघ और शिक्षकों के विरोध के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। सरकार ने एक जांच कमेटी भी बनाई पर इसको जेएनयू में घुसने नहीं दिया। 2010 में पूरा देश जब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हाथों 76 जवानों के मारे जाने का शोक मना रहा थातब जेएनयू में इसकी खुशी में पार्टी दी जा रही थी। अखबारों में इसकी खबर छपने के बावजूद तत्कालीन संप्रग सरकार ने कोई कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। इसके बाद जेएनयू के कुछ छात्रों के सीधे नक्सलियों के साथ संबंध भी मिले और गढ़चिरौली में जेएनयू छात्र हेम मिश्रा को गिरफ्तार भी किया गया। पुलिस की जांच से साफ हो गया है कि भारत की बर्बादी के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की साजिश रचने वाला उमर खालिद भी हेम मिश्रा की तरह डीएसयू का सदस्य है। आज दुर्भाग्य है कि जेएनयू के कुछ छात्रों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की जगह कुछ सियासी दल अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं।

शत्रु बोले, भाजपा मेरी पहली और आखिरी पार्टी

हैदराबाद। भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि "भाजपा उनकी पहली और आखिरी पार्टी" है। उन्होंने बिहार के पार्टी नेताओं द्वारा उन्हें पार्टी मामलों की आलोचना करने के कारण पार्टी छोडने की सलाह देने के लिए निशाने पर लिया। 

अभिनेता-नेता ने कहा कि उनके मन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए काफी सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह कौन लोग कह रहे हैं, वही लोग जो बिहार (विधानसभा चुनाव) में मिली शर्मनाक हार के लिए जिम्मेदार हैं। जो खुद बाहर जाने की राह पर हैं, जो अपना चेहरा दिखाने के लायक नहीं बचे हैं। वे केवल अपनी हताशा जाहिर कर रहे हैं। सिन्हा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि इन नेताओं को पहले अपनी साख पर ध्यान देना चाहिए।  

यूपी: अमित शाह ने प्रदेश कार्यालय का उद्घाटन किया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने पूरी तरह से कार्पोरेट लुक अपना लिया है। भाजपा ने प्रदेश कार्यालय का जीर्णोद्धार कराया, जिसका गुरूवार सुबह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उद्घाटन किया। नए कार्यालय के उद्घाटन के बाद शाह ने कहा, "यहां का कार्यालय आधुनिक तकनीक से बना है। मैंने प्रभारी रहते हुए इस बारे में सोचा था। अब इस कार्यालय में सभी सुविधाएं मौजूद हैं।" पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि इस साल दिसंबर तक देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर पार्टी कार्यालय के लिए जमीन खरीद ली जाएगी। उत्तर प्रदेश में 40 जिलों में जमीन खरीद ली गई है। शाह ने कहा, "केंद्र में भाजपा की सरकार बनने का पूरा श्रेय उत्तर प्रदेश को जाता है सभी कार्यकर्ता मिलकर भाजपा की विचारधारा को आगे बढ़ाएं।" उन्होंने कहा कि हमारे सामने उत्तर प्रदेश में 2017 में सरकार बनाने की चुनौती है। भाजपा के नए कार्यालय में कुशाभाउ ठाकरे सभागार, माधव सभागार के नाम से दो ऑडीटोरियम बनाए गए हैं। कुशभाउ ठाकरे सभागार में 200 लोगों के एक बैठने की व्यवस्था है। चुनाव प्रबंधन रूम, विवेकानंद रूम, महामना लाइब्रेरी, आईटी सेल, सोशल मीडिया सेल, रिसर्च विंग भी अलग से बनाए गए हैं। इसके अलावा मीडिया कांफ्रेंस रूम को भी नया लुक दिया गया है। बाहरी नेताओं के ठहरने के लिए अलग से फाइव स्टार कमरों की व्यवस्था भी की गई है। उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष से लेकर हर पदाधिकारी के लिए अलग-अलग कमरों की व्यवस्था की गई है। 

6 साल के मासूम की किडनैप कर की थी हत्या, जज बोले मरते दम जेल में ही रहना

मोहाली। शहर के चर्चित महरम किडनैपिंग व मर्डर केस में एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज तरसेम मंगला की कोर्ट में आरोपी तेजिंदर सिंह उर्फ गंजू को ताउम्र कैद की सजा सुनाई डाली। अपना फैसला सुनाते हुए जज तरसेम मंगला ने भरी अदालत में आरोपी को कहा कि वह मरते दम तक जेल में रहे। पढ़ें क्या था पूरा मामला ...
-बता दें कि 27 अक्टूबर को फेज-9 में पार्क से छह वर्षीय महरम सिंह अगवा हो गया था। परिजनों ने पुलिस को इसकी शिकायत दी थी।
-बच्चे की मां ने बच्चे के दादा पर ही उसे किडनैप करने का शक जताया था। बच्चे की मां हरिंदर कौर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि बच्चे का पिता ऑस्ट्रेलिया में रहता है, जबकि उसके ससुर खरड़ में रहते हैं।
-उसका पति से तलाक का केस चल रहा है और वह फेज-9 में रह रही थी। महरम फेज-11 के नामी प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था। उस दिन शाम करीब 6.15 बजे के करीब महरम पार्क में खेल रहा था।
-वहीं से वह अचानक लापता हो गया। उन्होंने महरम की काफी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद उसने पुलिस को बच्चे के लापता की सूचना दी गई थी। थोड़े दिनों बाद महरम का शव सेक्टर 69 में कूड़ेदान के पास मिला था।
-चिकित्सीय जांच में शव की पहचान हो चुकी थी। डीएसपी नवरीत विर्क ने शव महरम का होने की पुष्टि कर दी थी। सेक्टर 69 में रखे कूड़ादान में कूड़ा डालने आए व्यक्ति ने ने मिट्टी में एक शूज़ निकला हुआ देखा।
-किसी अनहोनी की आशंका से उसने तुरंत पुलिस को फोन किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की और कुछ दिन में पाया कि फेज-9 में उनके पड़ोसी तेजिंदर सिंह उर्फ गंजू ने ही किडनैप कर मर्डर किया था। पुलिस ने गंजू को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर दिया था।  

200 करोड़ से होगा बरनाला शहर का कायाकल्प: राजिंदर गुप्ता

बरनाला| ---पंजाब योजना बोर्डपंजाब के वाइस चेयरमैन, शिअद महासचिव एवं ट्राइडेंट के संस्थापक पद्मश्री राजिंदर गुप्ता ने कहा कि राजनीति में आने का उनका मकसद जिला बरनाला को मोहाली, लुधियाना, पटियाला बठिंडा जैसे शहरो की कतार में खड़ा करना है। 

उन्होंने कहा कि बरनाला शहर का 200 करोड़ की लागत से कायाकल्प किया जाएगा। शहर में सरकारी कॉलेज, टैक्सटाइल हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे। प्रदेश के डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल से उनकी नजदीकी का फायदा हरेक शहरवासी को मिलेगा। एक सवाल के जवाब में राजिंदर गुप्ता ने कहा कि शहर में जो बी काम अधूरे पड़े हैं उन्हें पुरा करवाया जा रहा है और जो नींव पत्थर रखे गए हैं उन पर भी काम जल्द शुरू होगा। 

जोधपुर में पतरकारो ने खबर रोकने की मांगी कीमत

जोधपुर : शिव सेना जिला प्रमुख नेमाराम पटेल ने जोधपुर में कार्यरत प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तीन पत्रकारों पर ब्लैकमेल कर पैसे मांगने का लगाया आरोप। नेमाराम ने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर रणबीर चौधरी, मनोज वर्मा और सहारा समय न्यूज़ चैनल के प्रदीप जोशी के खिलाफ महा मंदिर थाने में रिपोर्ट दी। इसमें कहां गया है कि उक्त व्यक्तियों ने उसकी एक वीडियो क्लिपिंग दिखाकर कहा कि यह खबर अखबार और इलेक्टॉनिक मीडिया में आ गई तो तुमारा राजनैतिक कैरियर समाप्त हो जाएगा। अगर तुम चाहते हो कि खबर रोक दी जाए तो हम यह खबर रोकने के एवज में पैसे लेंगे। फिर उन्होंने पहले 60 हजार और उसके बाद इसकी दुगनी राशि रिश्वत में मांगी। शिव सेना नेता की दी हुई इस रिपोर्ट पर महामंदिर पुलिस कर रही है जांच।
यह भी कहा जा रहा है कि दैनिक भास्कर, सहारा समय के अलावा न्यूज़ नेशन और DNA के पत्रकारों ने भी जोधपुर शिवसेना जिला प्रमुख नेमाराम पटेल से खबर दबाने के एवज में 60 हजार रूपये मांगे। मामला 15 जनवरी का है। एक शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे जिला प्रमुख ने अपनी एयर पिस्टल से म्यूजिक सिस्टम पर थिरकते हुए हवाई फायर किये थे। वीडियो का मामला दैनिक भास्कर के रिपोर्टर रणवीर चौधरी और मनोज वर्मा के पास कब पहुंचा, जानकारी नहीं। लेकिन 10 फ़रवरी से शिवसेना जिला प्रमुख को भास्कर एवम सहारा समय, न्यूज़ नेशन की ओर से पटेल का राजनीतिक कैरियर समाप्त करने के लिए फोन आने शुरू हुए और 11 फ़रवरी की सांय 5 बजे तक 60 हजार रूपये पहुंचाने की डेड लाइन दे दी गई।
साथ ही कहा गया कि यदि आपने हमे 60 हजार दे दिए तो 4-5 इलेक्ट्रॉनिक एवं एक प्रिंट मीडिया आपको हीरो बना देगा। ये पैसे हमें नहीं चाहिए, दैनिक भास्कर को देने हैं। हम लोग 12 फ़रवरी तक जवाब का वेट करेंगे नहीं तो देख लेना। 12 / 2 को सांय 5 बजे के बाद दैनिक भास्कर और न्यूज़ नेशन, सहारा समय, दैनिक भास्कर से पटेल के पास फोन आने शुरू हुए। पैसे न होने और डांस वीडियो में कुछ नहीं के चलते उन्होंने कॉल नहीं लिया। 13 /2 की सुबह दैनिक भास्कर ने पेज नम्बर 2 पर नेमा राम की फ़ोटो एयर पिस्टल चलाते हुए खबर छाप दी। 14 / 2 को यही खबर उसी पेज पर फिर छापी गई जो यह साबित करती है कि रिपोर्टरों की नीयत ठीक नही थी।
नेमाराम ने उसी रोज दैनिक भास्कर के चीफ रिपोर्टर मनोज वर्मा, रणवीर चौधरी एवं न्यूज़ नेशन के प्रदीप जोशी के खिलाफ महामंदिर थाने में शिकायत दी। पत्रकरों की ओर से धमकी और माफ़ी मांगने का ऑडियो वायरल हो चुका है। लेकिन पुलिस-मीडिया-माफिया ने आज तक उनकी fir दर्ज नहीं होने दी। नेमाराम ने इन दो रिपोर्टरों के साथ ही जोधपुर दैनिक भास्कर में जमे कारोबारी रिपोर्टर डी डी वैष्णव, भंवर जांगिड़, कमल वैष्णव, प्रवीण धींगरा के बढ़ते कारोबार की जांच की मांग कर भास्कर MD सुधीर अग्रवाल और विजिलेंस को प्रूफ भेजकर नौकरी से निकालने की मांग की है। 

Monday, November 16, 2015

साबुनों में चर्बी के प्रयोग पर शिकंजा नहीं कसा तो करेंगे आंदोलन : अनिल बंसल नाणा


गोसेवा संघ पंजाब के महासचिव अनिल बंसल नाणा ने रविवार को बरनाला की अग्रवाल धर्मशाला में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि पंजाब में कई साबुन बनाने की फैक्ट्रियों में नहाने और कपड़े धोने के साबुन में पशु चर्बी खासकर गाय की चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

नाणा ने कहा कि पूरे प्रदेश में पिछले दो माह में 16 ट्रक पशु और चर्बी के पकड़े गए हैं, जिनमें पशु और गाय की चर्बी पाए जाने का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि सभी के सैंपल लेकर टेस्ट के लिए भेजे जा चुके हैं और रिर्पोट आने का इंतजार है। 

उन्होंने बताया कि पंजाब में कुछ साबुन फैक्ट्रियों के मालिक भी लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। नाणा ने कहा कि वैसे तो साबुन में विशेष तेल का इस्तेमाल होता है जोकि विदेश से आता है और 300 रुपए प्रति लीटर की कीमत पर उपलब्ध होता है जबकि इस तेल के प्रयोग की जगह साबुन फैक्ट्रियों के मालिक पशु चर्बी का प्रयोग कर रहे हैं। नाणा ने कहा कि जानकारी के अनुसार जो कंपनी पशु चर्बी सप्लाई कर रही है उसका पंजाब में 55 करोड़ रुपए का व्यापार है। नाणा ने कहा कि इस संबंधी सीएम प्रकाश सिंह बादल से भी बात हो चुकी है और उन्होंने 16 नवंबर को मिलने का समय दिया है। सीएम को इस गौरख धंधे बारे अवगत कराया जाएगा। लुधियाना, जालंधर, राजपुरा, बठिंडा, अमृतसर, पटियाला जैसे शहरों में 50 के करीब ऐसी बड़ी साबुन फैक्ट्रियां हैं जो पशु चर्बी का इस्तेमाल करती हैं। इस मौके पर सचिव वकील चंद गोयल, गोरक्षा दल के वाइस प्रधान मोनू गोयल, सचिव मुनीश मिंटा, विकास जिंदल, सरफराज आदि मौजूद थे। 

Monday, November 9, 2015

बिहार में नितीश लालू ने मरी बाजी ,बीजेपी चारो खाने चिट

पटना. तमाम अटकलों और एग्जिट पोल्स को दरकिनार कर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव में धमाकेदार जीत दर्ज दी। विधानसभा की 243 सीटों में से महागठबंधन ने 178 सीटों पर बंपर जीत हासिल की। आरजेडी को 80, जेडीयू को 71 और महागठबंधन की तीसरी पार्टी कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं। दूसरी ओर, एनडीए को करारी हार का सामना करना पड़ा। दिवाली के ठीक पहले महागठबंधन की इस जीत ने भाजपा गठबंधन को तगड़ा झटका दिया। एनडीए को 58 सीटें हीं मिली।
महागठबंधन को क्लीन स्वीप, भाजपा को सिर्फ पांच
फर्स्ट फेज में पहला बड़ा मुद्दा रहा विशेष पैकेज। पीएम मोदी ने 6 रैलियां की। 36 सीटों तक पहुंचे। वहीं, महागठबंधन ने पैकेज की घोषणा के बहाने बिहारियों की बोली लगाने को मुद्दा बनाया। डीएनए विवाद भी उछाला। एनडीए का अति आत्मविश्वास पहले चरण में ही उसके लिए घातक साबित हुआ। 2010 के परिणाम के आधार पर कुल 49 में से सिर्फ 13 सीटें एनडीए के पाले में थीं। 34 सीटों पर जीत बरकरार रखने की चुनौती महागठबंधन के सामने थी। एनडीए इस मुगालते में रहा कि धुआंधार प्रचार और घटक दलों के कुछ दिग्गजों के चलते पुरानी सीटों के अलावा कम से कम 10 नई सीटें उसके खाते में आ जाएंगी। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस और हम के प्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी मैदान में थे। दोनों हारे।
दूसरा चरण : रिजर्वेशन जैसे मुद्दों ने महागठबंधन को दी बढ़त
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा का बयान क्या दिया, लालू-नीतीश को निर्णायक मुद्दा मिल गया। वहीं, भाजपा ने बीफ पर लालू वाले बयान पर घेरा। शैतान के जवाब में ब्रह्मपिशाच और राक्षस जैसे बयान आए। हम के जीतन राम मांझी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. अरुण कुमार और जहानाबाद के पूर्व सांसद डा. जगदीश शर्मा का प्रभाव क्षेत्र होने के बावजूद एनडीए को सफलता नहीं मिली। इनके दम पर सवर्णों के अलावा महादलित, चंद्रवंशी और कुशवाहा बिरादरी के वोटों का आसरा एनडीए को था, लेकिन यह समीकरण काम नहीं आया।
तीसरा चरण : दाल के मुद्दे पर महंगाई ने बीजेपी को दी पटखनी
दाल की बढ़ती कीमत को महागठबंधन ने मुद्दा बनाया। घर की मुर्गी दाल बराबर जैसे सियासी तीर चले। हरियाणा में दलित बच्चों की मौत पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के बयान का महागठबंधन ने अच्छे से फायदा उठाया। विधानसभा के पिछले चुनाव परिणाम को देखें तो इस फेज में महागठबंधन और एनडीए के बीच बराबरी की टक्कर हो सकती थी। कुल 50 में से 19 सीटें भाजपा के पास थी। जदयू की जीत 23 सीटें थीं। राजद का सात सीटों पर कब्जा था।
चौथा चरण : 56 में 26 लाकर भाजपा ने बचाई लाज
इस फेज में जिन इलाकों में चुनाव हुआ, वो एनडीए के आधार इलाकों में आता है। कुल 55 में से 26 सीटें भाजपा के पक्ष में थी। पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, गोपालगंज और सीवान जिलों से एनडीए को पहले से ज्यादा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। यह नहीं हो सका। बेतिया में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेणु देवी को हार का सामना करना पड़ा। फिर भी चंपारण में एनडीए की इज्जत कुछ हद तक बच पाई। थारुओं के बीच राज्य सरकार की नाराजगी का लाभ एनडीए को मिला। पूर्णमासी राम एवं वैद्यनाथ प्रसाद महतो जैसे दिग्गजों की हार से महागठबंधन को भी झटका।
पांचवां चरण : गाय और ओवैसी का भी नहीं मिला लाभ
मुस्लिम बहुल सीटों वाले इस दौर में भाजपा ने धार्मिक आरक्षण का मुद्दा उठाया। गाय का विवादित विज्ञापन छपवाया। ओवैसी भी मैदान में थे। लेकिन बीजेपी को सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण का कोई फायदा नहीं हुआ। 57 में से 23 सीटों पर भाजपा का कब्जा था। लोजपा के खाते में भी दो सीटें थीं। इस लिहाज से देखें तो अपनी 25 सिटिंग सीटों को बचाने के अलावा कुछ अधिक सीटों पर जीत हासिल करना एनडीए का लक्ष्य था। एनडीए ने बढ़े हुए वोट को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर से जोड़कर अपने पक्ष में माना। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।बिहार में नितीश लालू ने मरी बाजी ,बीजेपी चारो खाने चिट 

Tuesday, November 3, 2015

विदेश भेजने के नाम पर सैकड़ों युवकों से करोड़ों रुपए ठग कर कंपनी भागी

अमृतसर। विदेश भेजने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए इकट्ठे कर मर्चेंट ला ओवरसीज नाम की कंपनी दफ्तर को ताला लगाकर फरार हो गई। इस कंपनी का दफ्तर कोर्ट रोड स्थित दीप काम्प्लैक्स में है, जहां पर अब ताला लगा हुआ है। कंपनी के सभी फोन नंबर भी डिसकनेक्ट कर दिए गए हैं। सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों से आए सौ से ज्यादा युवकों ने अपनी लिखित शिकायत पुलिस कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख को दी है। इन युवकों का कहना है कि इस इमीग्रेशन कंपनी ने अलग-अलग देशों में भेजने और वहां पर काम करवाने का विश्वास दिलवाया। बदले में किसी से 2 लाख रुपए तो किसी से 5 लाख रुपए लिए हैं, लेकिन किसी भी युवक को विदेश नहीं भेजा।

पुलिस कमिश्नर दफ्तर पहुंचे लुधियाना निवासी जसबीर सिंह, मनप्रीत सिंह निवासी तरनतारन, भूपिंदर सिंह निवासी अजनाला रोड, अंकुश शर्मा, इकबाल सिंह निवासी इस्लामाबाद, राजदीप सिंह निवासी नाभा, सुखविंदर सिंह निवासी पठानकोट सहित 100 से ज्यादा युवकों ने बताया कि उक्त कंपनी विभिन्न अखबारों में लगातार इश्तिहार दे रही थी। इनमें लिखा होता था कि न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, कैनेडा, दुबई, यूके आदि देशों में जाने और वहां पर नौकरी करने के लिए संपर्क करें। इसके साथ ही उक्त सभी देशों में पीआर दिलवाने का भी भरोसा दिलवाया जाता था। कंपनी के दफ्तर का पता 27-28 दुकान नंबर दीप काॅम्प्लैक्स कोर्ट रोड बताया गया था। इश्तिहार पढ़कर उन लोगों ने यहां पर फोन कर संपर्क किया तो आगे से कहा गया कि दफ्तर में विजिट करें। उन लोगों ने दफ्तर में विजिट की। वहां पर तैनात स्टाफ ने उन्हें विभिन्न देशों में भेजने और पक्का काम दिलवाने का विश्वास दिलवाया। विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग फीस बताई गई। इस उनसे रुपए ले लिए। आरोपियों ने अपना बैंक अकाउंट नंबर 50200014037085 दिया। इसमें कि पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए कहा गया। उन सभी ने इस खाते में पैसे जमा करवा दिए। उनके पासपोर्ट सारे ओरिजनल दस्तावेज भी अपने पास रख लिए। करीब दो महीने बाद भी उन्हें विदेश भेजा गया। वह फोन पर संपर्क करते तो आगे से जवाब मिलता कि फाइल भेजी हुई है। 31 अक्टूबर को वे सभी कंपनी के दफ्तर पहुंचे तो पता लगा कि आरोपी यहां ताला लगाकर फरार हो गए हैं।

पुलिस कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख ने कहा कि मामले की जांच शुरू करवा दी है। कंपनी को कौन लोग चला रहे थे। इसका पता लगाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इमिग्रेशन कंपनी खोलने से पहले विदेश मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन करवानी पड़ती है। इसलिए वेरिफाई कर लें कि जिस कंपनी को आप पैसे देने जा रहे हैं कि वह मंत्रालय में रजिस्टर्ड हो। बिना किसी पुख्ता जांच के कोई पैसा दिया जाए। इसके अलावा इमीग्रेशन वाले अखबारों में इश्तिहार देकर लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। इसमें पुलिस की भी जिम्मेदारी बनती है कि इस तरह के इश्तिहार देने वाले लोगों की प्रॉपर स्कैनिंग करवाई जाए।

Friday, October 16, 2015

बीफ पर बहस करने से पहले पढ़ें इससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्य

गोमांस के कारण बीफ का मुद्दा देश में गर्माया हुआ है। राजनेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं और उनके गुर्गे आम जनता के बीच एक दूसरे के प्रति जहर घोलने का काम कर रहे हैं। और वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं कि बीफ के मानव शरीर या पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ते हैं। इन सबके बीच संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बीफ नहीं खाने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। आप चौंक जरूर गये होंगे, लेकिन यह सच है। चलिये पर्यावरण से जोड़ कर बीफ से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों से हम आपको रू-ब-रू करवाते हैं। ये तथ्य यूएनईपी और येल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के हवाले से हैं। दिल्ली से आगरा तक कार से जाते हैं, तब जितना कार्बन एमिशन होता है, उतना एक किलोग्राम बीफ से होता है। बीफ के बढ़ते व्यापार के कारण पशुपालन भी बढ़ा यानी पर्यावरण कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ी जो उनके पाद से निकलती है। भारत में ज्यादातर पशुओं का पालन-पोषण उन्हें काटने के लिये नहीं दूध और खेती के लिये किया जाता है। दुनिया में उत्सर्जित होने वाली ग्रीन हाउस गैसों की 18 प्रतिशत तो पशु मांस से ही होती है। जबकि यातायात की वजह से 15%। यूएन कहता है कि बीफ खाने वाले लोग पर्यावरण प्रेमी नहीं होते हैं, लेकिन बीफ खाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गाय या भैंस का 
मीट पर्यावरण के लिये नुकसानदायक होता है। मीट की वजह से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित होती हैं।

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