चंडीगढ़. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) चुनावों में अब सहजधारी सिख भी वोट डाल सकेंगे। सहजधारी सिखों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली अधिसूचना को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने वापस ले लिया है।
वीरवार को केंद्र की तरफ से वकील हरभगवान सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कहा कि केंद्र ने इस बारे में आठ अक्टूबर 2003 की अधिसूचना को वापस लेने का फैसला लिया है। यह अधिसूचना बिना सोचे समझे जारी की गई थी। एसजीपीसी ने इस बारे में 30 मार्च 2002 को प्रस्ताव पारित किया, जिस पर गृह मंत्रालय ने बिना विचार अधिसूचना जारी कर दी।
इसके बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एम.एम. कुमार, जस्टिस आलोक सिंह व जस्टिस गुरदेव सिंह की खंडपीठ ने वीरवार को अधिसूचना को खारिज करने की मांग याचिकाओं को निरस्त कर दिया।
नेशनल सहजधारी सिख फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. परमजीत सिंह रानू व दो अन्य याचिकाओं में 18 सितंबर को होने जा रहे एसजीपीसी चुनावों पर रोक लगाने की मांग की गई।
आडवाणी की माया
वर्ष 2003 में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने नोटिफिकेशन जारी कर सहजधारी सिखों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया था। मालूम हो कि 2003 में केंद्र में भाजपा की सरकार थी। 2003 में ही केंद्र सरकार के इस नोटिफिकेशन को सहजधारी सिख फेडरेशन के अध्यक्ष नानू ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
गड़बड़ाए समीकरण
एसजीपीसी चुनावों में अब तक शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवारों ने बाजी मारी है। इसका एक बड़ा कारण है कि सीधे सीधे एसजीपीसी को कोई चुनौती न मिलना। सहजधारी सिखों को मतदान का अधिकार मिलने के बाद अब इन उम्मीदवारों को एक बड़ी चुनौती मिलने के आसार बन गए हैं। एक बड़ा वोट बैंक जो अब तक नजरअंदाज किया जा रहा था, वह अब इन चुनावों की दिशा तय करेगा।
हमारे आंतरिक मामलों में दखल दिया जा रहा है। आठ साल बाद इस मुद्दे को उस समय उछाला गया है, जब चुनाव सिर पर हैं। इस फैसले से सिखी मर्यादाओं को आघात पहुंचेगा और सिखी का वजूद खतरे में पड़ेगा। हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
अवतार सिंह मक्कड़, एसजीपीसी प्रधान
इसके लिए अकाली-भाजपा सरकार दोषी है। सरकार एसजीपीसी में सहजधारियों की वोटों के जरिए आरएसएस व भाजपा का दखल चाहती है। गुरु साहिबानों ने सिखी के लिए एक मर्यादा और मानक तय किया था। उसे भंग किया जा रहा है।
परमजीत सिंह सरना, डीजीपीसी प्रधान
अदालत का यह फैसला दुखद है। एसजीपीसी चुनावों में सहजधारियों को वोट देने के अधिकार का मतलब सिखी की पहचान को खतरा पैदा करना है। अदालत में याचिका दायर करने वाला परमजीत सिंह राणू खुद ही सिख नहीं है।
मनजीत सिंह कलकत्ता, वरिष्ठ पंथक नेता