Thursday, August 25, 2011

पंजाब में बाढ़ के पीछे पाकिस्तान!

  
 
 
 
चंडीगढ़ . पाकिस्तान के सुलेमान हेडवर्क्‍स के गेट पूरे न खुले होने के कारण पंजाब के फिरोजपुर और फाजिल्का इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। यहां हजारों एकड़ फसल और इन्फ्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो गया है।

पर्याप्त पानी जाने के लिए पाकिस्तान हेडवर्क्‍स के पूरे गेट खोले, इसके लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है। बादल ने कहा है कि इंडस वाटर कमीशन (जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं) को इस बारे में ताकीद किया जाए कि वह पानी के प्राकृतिक बहाव को न रोका जाए।

हरिके हेडवर्क्‍स पर जहां सतलुज और ब्यास दरिया मिलते हैं, से आगे फाजिल्का के पास सुलेमान चौकी से होता हुआ दरिया पाकिस्तान में दाखिल करता है। पाकिस्तान वहां से पानी को सिंचाई के लिए पौंड बनाकर हेडवर्क्‍स के जरिए दूसरे इलाकों में भेजता है। इस समय ब्यास में 60 हजार क्यूसिक और सतलुज में 39 हजार क्यूसिक अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है, इसलिए इसकी मात्रा काफी अधिक है। इसके अलावा रास्ते में पड़ने वाले छोटे नदी नाले और ड्रेनों का पानी में इसमें मिलता है। इसलिए अपने इलाकों को बाढ़ से बचाने के लिए पाकिस्तान हेडवर्क्‍स से केवल 35 हजार क्यूसिक पानी ही आगे छोड़ रहा है।

इसका नुकसान यह हो रहा है कि सुलेमान हेडवर्क्‍स से पानी वापस पंजाब की ओर आ रहा है और फाजिल्का और फिरोजपुर जिलों में नुकसान पहुंचा रहा है। ड्रेनेज विभाग का कहना है कि यदि पानी अपने नेचुरल फ्लो में निकलता रहे तो पंजाब के हिस्से में बाढ़ नहीं आएगी।

आजादी का जज्बा



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आजादी की लड़ाई में सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का योगदान कौन भूल सकता है। इस दल को आजादी के लिए सशस्त्र प्रतिरोध से परहेज नहीं था। बोल्शेविज्म से प्रभावित इस दल में चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारी सम्मिलित थे।

8 अप्रैल 1929 को इस दल के भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने पब्लिक सेफ्टी बिल व ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में सेंट्रल असेंबली में धमाका किया।

जब उन्हें पकड़ने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बच निकलने की कोई कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य किसी को हताहत करना नहीं, लेकिन बहरी हुकूमत तक हमारी आवाज पहुंचाने के लिए यह धमाका जरूरी था।

केस की सुनवाई के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। नवंबर १९३क् को लाहौर सेंट्रल जेल से भगत सिंह ने अपने साथी बटुकेश्वर दत्त को जो पत्र लिखा, वह आजादी के दीवानों के जज्बे की मिसाल है।

भगत सिंह ने कहा : मैं तो मृत्यु का अंगीकार कर रहा हूं, लेकिन साथी तुम्हें जीवित रहकर अपने दायित्वों का निर्वाह करना है। हम दुनिया को बता देना चाहते हैं कि क्रांतिकारी अपने आदर्शो के लिए मर भी सकते हैं और जी भी सकते हैं। ऐसे ही जज्बे की वजह से देश को आजादी मिल पाई थी।

मनमोहन का घर घेरेंगे अन्‍ना समर्थक, दिल्‍ली पुलिस ने बंद करवाए 4 मेट्रो


मनमोहन का घर घेरेंगे अन्‍ना समर्थक, दिल्‍ली पुलिस ने बंद करवाए 4 मेट्रो 

  
 

 
नई दिल्‍ली.  जन लोकपाल बिल पारित कराए जाने की मांग के लिए टीम अन्‍ना को अपना आंदोलन और तेज करना पड़ रहा है। गुरुवार को अन्‍ना के अनशन का दसवां दिन है, पर सरकार की ओर से उन्‍हें कुछ हासिल नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह जरूर कहा कि सदन में टीम अन्‍ना सहित सभी के लोकपाल बिल पर चर्चा हो।


सरकार की ओर से नाउम्‍मीद टीम अन्‍ना ने गुरुवार शाम पांच बजे पीएम हाउस के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसके मद्देनजर दिल्‍ली पुलिस ने चार मेट्रो स्‍टेशन बंद करवा दिए हैं। जोरबाग, खान मार्केट, उद्योग भवन और रेस कोर्स मेट्रो स्‍टेशन से यात्री न तो बाहर निकल सकेंगे और न अंदर जा सकेंगे। स्‍टेशन तीन बजे से 'अगले आदेश तक' के लिए बंद हैं।

समाधान निकलता नहीं देख टीम अन्‍ना ने एक बार फिर अल्‍टीमेटम भी दे दिया है। अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि अगर शनिवार तक इस मुद्दे का हल नहीं निकलता है तो देश भर से लोग दिल्ली पहुंचें। उन्होंने दिल्ली चलो का आह्वान किया। इसके तत्‍काल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आश्‍वासन दिया है कि लोकपाल बिल का जिसने, जो भी ड्राफ्ट बनाया है, सब पर चर्चा होगी। चर्चा के बाद सभी सुझाव स्‍टैंडिंग कमेटी को भेजे जाएंगे। 

इस बीच, किसान नेता भी अन्‍ना के समर्थन में आ गए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने रामलीला मैदान पहुंचकर अन्ना के समर्थन का ऐलान करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में किसान अन्ना का समर्थन करने के लिए जल्द ही रामलीला मैदान पहुंचने वाले हैं।



जन लोकपाल के मुद्दे पर सरकार ने अपना रुख कड़ा कर लिया है तो टीम अन्‍ना ने भी कड़े तेवर अपनाने के संकेत दिए हैं। गुरुवार को टीम अन्‍ना ने सरकार से बातचीत भी नहीं की। कहा गया कि सरकार लिखित तौर पर अपनी मंश बताए, तब बातचीत होगी। दोनों पक्षों में दोपहर 12 बजे बातचीत तय थी।लेकिन कोर कमेटी का मानना है कि सरकार बात से पीछे हट रही है। टीम अन्‍ना का मानना है कि ऐसे में बातचीत का कोई मतलब नहीं है। सरकार के पास बिल का ड्राफ्ट है। अगर सरकार का कोई सुझाव हो तो वह हमें बता सकती है।  

वैसे भी अब तक जो बातचीत हुई है, उसमें सरकार का मुख्‍य जोर अन्‍ना का अनशन तुड़वाने पर रहता है, न कि जनलोकपाल बिल पारित कराने को लेकर किरण बेदी ने ट्विटर पर आरोप लगाया है कि सरकार के यू-टर्न की वजह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति है।

क्‍या है जनलोकपाल? बिल पारित हुआ तो इन 10 तरीकों से रुकेगा भ्रष्‍टाचार

  

क्‍या है जनलोकपाल? बिल पारित हुआ तो इन 10 तरीकों से रुकेगा भ्रष्‍टाचार 

 
 
अन्ना हजारे जन लोकपाल बिल पारित कराने के लिए आमरण अनशन कर रहे हैं। उन्‍होंने सरकार को इसके लिए 30 अगस्‍त तक का अल्‍टीमेटम दिया है। तब तक बिल पारित नहीं हुआ है तो वह 'जेल भरो' आंदोलन चलाएंगे।

अन्‍ना जो बिल पारित कराना चाहते हैं, उसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संतोष हेगड़े, वकील प्रशांत भूषण और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने मिलकर तैयार किया है। आइए जानते हैं कि यह बिल पास हो गया तो क्‍या होगा...    
- भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्य में लोकायुक्तों की नियुक्ति होगी।    
- लोकपाल और लोकायुक्‍तों के कामकाज में सरकार और नौकरशाही का कोई दखल नहीं होगा।    
- भ्रष्टाचार की कोई शिकायत मिलने पर लोकपाल और लोकायुक्तों को साल भर में जांच पूरी करनी होगी।    
- अगले एक साल में आरोपियों के खिलाफ केस चलाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।    
- भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने वालों से नुकसान की भरपाई भी कराई जाएगी।    
- अगर कोई भी अफसर वक्त पर काम नहीं करता जैसे राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनाता तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा।    
- 11 सदस्यों की एक कमेटी लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति करेगी।    
- लोकपाल और लोकायुक्तों के खिलाफ आरोप लगने पर भी फौरन जांच होगी।    
- जन लोकपाल बिल में सीवीसी और सीबीआई के एंटी करप्शन डिपार्टमेंट को आपस में मिलाया जाएगा।    -       
 भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। 

अन्‍ना को भ्रष्‍टाचारी और 'तुम' कह कर बुलाने वाले मनीष तिवारी ने मांगी माफी



अन्‍ना को भ्रष्‍टाचारी और 'तुम' कह कर बुलाने वाले मनीष तिवारी ने मांगी माफी

 
 
  
 
 
नई दिल्ली. लोकसभा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नरम रुख के बाद अब कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने देर आए, दुरुस्त आए की तर्ज पर अन्ना हजारे से माफी मांग ली है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले तिवारी ने एक प्रेसवार्ता में अन्ना पर जमकर हमला बोला था। जिसके बाद से पूरे देश में उनके खिलाफ  प्रदर्शन तो हुआ ही था, साथ में कांग्रेस ने भी उनके बयान को व्यक्तिगत मानते हुए पल्ला झाड़ लिया था।
 
बढ़ते विवाद के बाद लुधियाना के सांसद मनीष तिवारी परदे के पीछे चल गए थे। लेकिन आज वह मीडिया के सामने आए और अन्ना से अपने बयान के लिए माफी मांगते हुए अनशन खत्म करने की अपील की।
यह था विवादित बयान
हम किशन बाबू राव हजारे उर्फ अन्ना से पूछना चाहते हैं कि कि तुम किस मुंह से भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन की बात करते हो। ऊपर से नीचे तक तुम भ्रष्टाचार से लिप्त हो।

दूसरी ओर,अन्ना समर्थकों ने तिवारी तक अपना विरोध पहुंचाने का नया व हाइटेक फार्मूला ढूंढ लिया था। उन्होंने तिवारी पर फेसबुक व एसएमएस अटैक कर दिया और तिवारी पर माफी मांगने के लिए नैतिक दबाव बनाया। 
इंडिया अगेनस्ट करप्शन व युनाइटेड यूथ ऑर्गेनाइजेशन के सदस्यों ने फेसबुक पर बुधवार को 'मनीष तिवारी जी से सॉरी टू अन्ना एंड होल इंडिया' नाम से पेज बना दिया, जिस पर अन्ना हजारे के समर्थक अपने कमेंट दे रहे हैं।

Wednesday, August 17, 2011

http://www.youtube.com/user/drrakeshpunj?feature=mhee#p/u/0/mbZhbB9I8KE

ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ (ਬਾਦਲ) ਨੂੰ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਕਮੇਟੀ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਲੜਨ ਦਾ ਕੋਈ ਅਧਿਕਾਰ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ : ਜਸਟਿਸ ਸੋਢੀ



ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ, 14 ਅਗਸਤ (pp)- ਦਿੱਲੀ ਹਾਈ ਕੋਰਟ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਜੱਜ, ਜਸਟਿਸ ਆਰ.ਐਸ. ਸੋਢੀ ਨੇ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਕਮੇਟੀ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ (ਬਾਦਲ) ਵਲੋਂ ਹਿੱਸਾ ਲਏ ਜਾਣ ’ਤੇ ਸੁਆਲੀਆ-ਨਿਸ਼ਾਨ ਲਾਉਂਦਿਆਂ ਹੋਇਆਂ ਕਿਹਾ ਹੈ, ਕਿ ਧਰਮ-ਨਿਰਪੇਖ ਹੋਣ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਕਰ, ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਅਤੇ ਲੋਕ ਸਭਾ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਲੜਨ ਵਾਲੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪਾਰਟੀ ਨੂੰ ਧਰਾਮਿਕ ਸਿੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੀ ਚੋਣ ਲੜਨ ਦਾ ਅਧਿਕਾਰ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇ ਅਜਿਹਾ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਸ ਨਾਲ ਧਾਰਮਿਕ ਮਾਨਤਾਵਾਂ ਦਾ ਘਾਣ ਹੋਵੇਗਾ। ਜਸਟਿਸ ਸੋਢੀ ਨੇ ਇਸ ਸੰਬੰਧ ਵਿੱਚ ਜਾਰੀ ਆਪਣੇ ਬਿਆਨ ਵਿੱਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ (ਬਾਦਲ) ਨੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਮੁੱਖ ਕਮਿਸ਼ਨ ਦੇ ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇ ਜਿਸ ਸੰਵਿਧਾਨ ਨੂੰ ਜਮ੍ਹਾ ਕਰਵਾਕੇ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਅਤੇ ਲੋਕਸਭਾ ਆਦਿ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਲੜਨ ਲਈ ਮਾਨਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਹੋਈ ਹੈ, ਉਸ ਵਿੱਚ ਸਪੱਸ਼ਟ ਰੂਪ ਵਿਚ ਕਿਹਾ ਹੋਇਆ ਹੈ ਕਿ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਇੱਕ ਧਰਮ-ਨਿਰਪੇਖ ਤੇ ਲੋਕਤੰਤਰਿਕ ਜਥੇਬੰਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਕਾਰਣ ਉਸਨੂੰ ਇੱਕ ਧਾਰਮਿਕ ਸੰਸਥਾ, ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਕਮੇਟੀ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਲੜਨ ਦਾ ਕੋਈ ਅਧਿਕਾਰ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ। ਜਸਟਿਸ ਸੋਢੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦਲ ਦੇ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸਰੂਪ ਨੂੰ ਮਾਨਤਾ ਦਿੰਦਿਆਂ ਜੇ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਚੋਣ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਬਾਦਲ ਦਲ ਵਲੋਂ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ ਖੜੇ ਕੀਤੇ ਗਏ ਉਮੀਦਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਬਾਦਲ ਦਲ ਦੇ ਉਮੀਦਵਾਰ ਸਵੀਕਾਰ ਕਰ ਉਸ ਲਈ ਰਾਖਵਾਂ ਚੋਣ-ਚਿੰਨ੍ਹ ਅਲਾਟ ਕਰਦਾ ਅਤੇ ਉਸ ਪੁਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਚੋਣ ਲੜਨ ਦਾ ਅਧਿਕਾਰ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਇੱਕ ਤਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਫਰਾਡ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਦੂਸਰਾ ਭਾਰਤੀ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੀਆਂ ਮਾਨਤਾਵਾਂ ਦੀ ਵੀ ਉਲੰਘਣਾ ਹੋਵੇਗੀ। ਤੀਜਾ, ਇਸ ਨਾਲ ਕਾਂਗ੍ਰਸ, ਕਮਿਉਨਿਸਟਾਂ ਤੇ ਭਾਜਪਾਈਆਂ ਸਮੇਤ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਹਿੰਦੀ-ਕਹਾਉਂਦੀ ਧਰਮ-ਨਿਰਪੇਖ ਪਾਰਟੀ ਨੂੰ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ ਹਿਸਾ ਲੈਣ ਤੋ ਨਹੀਂ ਰੋਕਿਆ ਜਾ ਸਕੇਗਾ, ਜਿਸਦੇ ਫਲਸਰੂਪ ਇੱਕ ਖਤਰਨਾਕ ਪਰੰਪਰਾ ਹੋਂਦ ਵਿੱਚ ਆ ਜਾਇਗੀ।
ਜਸਟਿਸ ਆਰ.ਐਸ. ਸੋਢੀ ਨੇ ਆਪਣੇ ਬਿਆਨ ਵਿੱਚ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਚੋਣ ਕਮਿਸ਼ਨ ਨੂੰ ਜਾਂ ਤਾਂ ਬਾਦਲ ਦਲ ਦੇ ਟਿਕਟ ਪੁਰ ਚੋਣ ਲੜਨ ਦਾ ਦਾਅਵਾ ਕਰ ਰਹੇ ਸਾਰੇ ਉਮੀਦਵਾਰਾਂ ਦੇ ਨਾਮਜ਼ਦਗੀ ਪੇਪਰ ਰੱਦ ਕਰ ਦੇਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਜਾਂ ਫਿਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਆਜ਼ਾਦ ਉਮੀਦਵਾਰ ਹੋਣ ਦੀ ਮਾਨਤਾ ਦੇ ਕੇ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬਾਦਲ ਦਲ ਲਈ ਰਾਖਵਾਂ ਚੋਣ-ਚਿੰਨ੍ਹ ਦੇਣ ਦੀ ਬਜਾਏ ਆਜ਼ਾਦ ਉਮੀਦਵਾਰਾਂ ਲਈ ਰਖੇ ਗਏ ਚੋਣ-ਚਿੰਨ੍ਹ ਅਲਾਟ ਕਰਨੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ।

ਅੰਨਾ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ, ਰਿਹਾਈ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ

* ਰਿਹਾਅ ਕਰਨ ’ਤੇ ਜੇਲ੍ਹ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਜਾਣੋਂ ਇਨਕਾਰ, ਕਿਹਾ-ਸ਼ਰਤਾਂ ਨਾਲ ਰਿਹਾਈ ਕਬੂਲ ਨਹੀਂ,

ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ, 17 ਅਗਸਤ (pp)-ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਖਿਲਾਫ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਦਾ ਅੰਦੋਲਨ ਮੰਗਲਵਾਰ ਨੂੰ ਉਸ ਵੇਲੇ ਦੇਸ਼ ਵਿਆਪੀ ਅੰਦੋਲਨ ਬਣ ਗਿਆ ਜਦੋਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਭੁੱਖ ਹੜਤਾਲ ’ਤੇ ਬੈਠਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕਰ ਲਿਆ ਗਿਆ। ਕੋਰਟ ’ਚ ਪੇਸ਼ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਅਦਾਲਤੀ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਜ਼ਮਾਨਤ ’ਤੇ ਰਿਹਾਅ ਹੋਣ ਲਈ ਕਿਹਾ ਗਿਆ ਪਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਜ਼ਮਾਨਤ ’ਤੇ ਜਾਣ ਤੇ ਮੁਚਲਕਾ ਦੇਣ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੇਰ ਰਾਤ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਰਿਹਾਅ ਹੋਣ ਦਾ ਮੌਕਾ ਵੀ ਦਿਤਾ ਗਿਆ ਪਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਇਹ ਕਹਿ ਕੇ ਰਿਹਾਅ ਹੋਣੋਂ ਨਾਂਹ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਰਤਾਂ ਸਣੇ ਰਿਹਾਈ ਮਨਜ਼ੂਰ ਨਹੀਂ ਹਜ਼ਾਰੇ ਦੀ ਸਾਥੀ ਕਿਰਨ ਬੇਦੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੰਨਾ ਨੇ ਜੇਲ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਆਉਣ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇ ਪ੍ਰਸਤਾਵਿਤ ਮਰਨ ਵਰਤ ਲਈ ਸ਼ਰਤਾਂ ਨਾ ਹਟਾਈਆਂ ਗਈਆਂ ਤਾਂ ਉਹ ਬਾਹਰ ਨਹੀਂ ਆਉਣਗੇ।
ਹਜ਼ਾਰੇ ਇਸ ਗੱਲ ’ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਰਹੇ ਹਨ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਸ਼ਰਤ ਜੇਪੀ ਪਾਰਕ ਜਾਂ ਜੰਤਰ ਮੰਤਰ ’ਤੇ ਭੁੱਖ ਹੜਤਾਲ ਕਰਨ ਦੀ ਇਜਾਜ਼ਤ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ। ਅੰਨਾ ਨੂੰ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਜਨਰਲ ਜੇਲਾਂ ਦੇ ਦਫਤਰ ਵਿਚ ਬਿਠਾ ਕੇ ਰਿਹਾਈ ਲਈ ਮਨਾਏ ਜਾਣ ਦੇ ਯਤਨ ਕੀਤੇ ਗਏ। ਪੁਲਸ ਅੰਨਾ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਜੱਦੀ ਪਿੰਡ ਭੇਜੇ ਜਾਣ ਦੀ ਯੋਜਨਾ ਬਣਾ ਰਹੀ ਸੀ। ਇਸ ਤੋਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 7 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਨਿਆਇਕ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਤਿਹਾੜ ਜੇਲ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਅੰਨਾ ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਅਮਨ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿਗੜਨ ਦੇ ਖਦਸ਼ੇ ਅਤੇ ਕਾਨੂੰਨ ਤੋੜਨ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਵਿਚ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਅੰਨਾ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਹਮਾਇਤ ’ਤੇ ਅੰਦੋਲਨ ਛਿੜ ਗਿਆ ਹੈ ਤੇ ਲੋਕ ਸੜਕਾਂ ’ਤੇ ਉਤਰ ਆਏ ਹਨ। ਇਧਰ ਅੰਨਾ ਨੇ ਆਪਣੇ ਸੰਦੇਸ਼ ’ਚ ਕਿਹਾ ਹੈ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੀ ਦੂਜੀ ਲੜਾਈ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਤੇ ਲੋਕ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਰਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਹੀ ਇਸ ਸੰਘਰਸ਼ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸ਼ਾਂਤਮਈ ਰੱਖਣ ਦੀ ਨਸੀਹਤ ਦਿੰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਸ ਅੰਦੋਲਨ ਦੌਰਾਨ ਲੋਕ ਕਿਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਵੀ ਹਿੰਸਾ ਤੋਂ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪਰਹੇਜ਼ ਕਰਨ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਜਾਇਦਾਦ ਜਾਂ ਕਿਸੇ ਦੀ ਨਿੱਜੀ ਸੰਪਤੀ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦਾ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਨਾ ਪਹੁੰਚਾਇਆ ਜਾਵੇ। ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਵੇਰੇ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਨਾਲ ਅਰਵਿੰਦ ਕੇਜਰੀਵਾਲ ਅਤੇ ਮਨੀਸ਼ ਸਿਸੋਦੀਆ ਨੂੰ ਦਿੱਲੀ ਸਥਿਤ ਮਿਊਰ ਵਿਹਾਰ ’ਚ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਘਰੋਂ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਲੈਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੁਲਸ ਉਨ੍ਹਾਂ ਅਲੀਪੁਰ ਰੋਡ ਸਿਵਲ ਲਾਈਨਜ਼ ਪੁਲਸ ਦੀ ਆਫੀਸਰਜ਼ ਮੈ¤ਸ ’ਚ ਲੈ ਗਈ। ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਕਿਰਨ ਬੇਦੀ ਅਤੇ ਮਸ਼ਹੂਰ ਵਕੀਲ ਸ਼ਸ਼ੀ ਭੂਸ਼ਣ ਨੂੰ ਵੀ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਲੈ ਕੇ ਇਥੇ ਲਿਆਂਦਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅੰਨਾ ਸਮੇਤ ਪੰਜਾਂ ਜਾਣਿਆਂ ਨੂੰ ਸਰਕਾਰੀ ਕੰਮ ’ਚ ਵਿਘਨ ਪਾਉਣ ਦੇ ਦੋਸ਼ ਵਿਚ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕਰ ਲਿਆ ਗਿਆ। ਛੱਤਰਸਾਲ ਸਟੇਡੀਅਮ ’ਚ ਅਸਥਾਈ ਜੇਲ ਬਣਾਈ ਗਈ ਅਤੇ ਇਥੇ ਹੀ ਅੰਨਾ ਨੂੰ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ। ਅੰਨਾ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ’ਤੇ ਸਫਾਈ ਦਿੰਦਿਆਂ ਗ੍ਰਹਿ ਸਕੱਤਰ ਆਰ. ਕੇ ਸਿੰਘ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਗਾਂਧੀਵਾਦੀ ਨੇਤਾ ਨੇ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਸੀ ਕਿ ਉਹ ਧਾਰਾ 144 ਦੇ ਸਰਕਾਰੀ ਆਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਕਰਨਗੇ। ਕੇਂਦਰੀ ਸੂਚਨਾ ਤੇ ਪ੍ਰਸਾਰਣ ਮੰਤਰੀ ਅੰਬਿਕਾ ਸੋਨੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿਗੜਨ ਦੇ ਖਦਸ਼ੇ ਕਾਰਨ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਕਰਨੀ ਆਮ ਗੱਲ ਹੈ। ਇਸ ਦੀ ਐਮਰਜੈਂਸੀ ਨਾਲ ਤੁਲਨਾ ਕਰਨਾ ਗਲਤ ਗੱਲ ਹੈ।
ਜੇਲ ’ਚ ਹੀ ਅੰਨਾ ਨੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਮਰਨ ਵਰਤ : ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟੀਮ ਅੰਨਾ ਦੇ ਇਕਲੌਤੇ ਮੈਂਬਰ ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਭੂਸ਼ਣ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੰਨਾ ਨੇ ਜੇਲ ’ਚ ਹੀ 10 ਵਜੇ ਮਰਨ ਵਰਤ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਅੰਨਾ ਨੇ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿ ਜੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਤਾਂ ਉਹ ਜੇਲ ’ਚ ਹੀ ਮਰਨ ਵਰਤ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਣਗੇ। ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਭੂਸ਼ਣ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਮਰੱਥਕਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਾਂਤਮਈ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰਨ ਤੋਂ ਰੋਕਣ ਲਈ ਕੀਤੀ ਗਈ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਨੂੰ ਚੁਣੌਤੀ ਦੇਣ ਲਈ ਉਹ ਛੇਤੀ ਸੁਪਰੀਮ ਕੋਰਟ ’ਚ ਪਟੀਸ਼ਨ ਦਾਇਰ ਕਰਨਗੇ।
ਤਿਹਾੜ ਜੇਲ ਭੇਜਿਆ : ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਵਲੋਂ ਨਿੱਜੀ ਮੁਚਲਕਾ ਦੇਣ ਅਤੇ ਜ਼ਮਾਨਤ ਲੈਣ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 7 ਦਿਨ ਦੀ ਨਿਆਇਕ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਤਿਹਾੜ ਜੇਲ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਬਾਅਦ ਦੁਪਹਿਰ 3 ਵਜੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਕਾਰਜਕਾਰੀ ਜੱਜ ਸਾਹਮਣੇ ਪੇਸ਼ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਜਿਥੇ ਮਾਣਯੋਗ ਜੱਜ ਨੇ ਅੰਨਾ ਨੂੰ ਸੱਤ ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਨਿਆਇਕ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਭੇਜਣ ਦਾ ਹੁਕਮ ਸੁਣਾਇਆ। ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਪੁਲਸ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਵੀ. ਕੇ. ਗੁਪਤਾ ਨੇ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਨਾਲ ਗੱਲਬਾਤ ਕਰਦਿਆਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੁਲਸ ਅੰਨਾ ਨੂੰ ਨਿਆਇਕ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਨਹੀਂ ਸੀ ਭੇਜਣਾ ਚਾਹੁੰਦੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜੇ ਅੰਨਾ ਪਾਬੰਦੀ ਦੇ ਹੁਕਮਾਂ ਦੀ ਉਲੰਘਣਾ ਨਾ ਕਰਨ ਸਬੰਧੀ ਹਲਫਨਾਮਾ ਦੇ ਦਿੰਦੇ ਤਾਂ ਪੁਲਸ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਨਿੱਜੀ ਮੁਚਲਕੇ ’ਤੇ ਰਿਹਾਅ ਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਸੀ।
ਸੂਤਰਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਕਿਉਂਕਿ ਹਜ਼ਾਰੇ ਨੇ ਹਲਫਨਾਮਾ ਦੇਣ ਤੋਂ ਨਾਹ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਲਿਹਾਜ਼ਾ ਜੱਜ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸੱਤ ਦਿਨ ਲਈ ਜੇਲ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ। ਅੰਨਾ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕੁਝ ਸਮਰਥਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਛੱਤਰਸਾਲ ਸਟੇਡੀਅਮ ’ਚ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ। ਰਾਜਘਾਟ ’ਚ ਬਾਪੂ ਦੀ ਸਮਾਧੀ ’ਤੇ ਸ਼ਰਧਾਂਜਲੀ ਦੇਣ ਪੁੱਜੀ ਟੀਮ ਅੰਨਾ ਦੀ ਮੈਂਬਰ ਕਿਰਨ ਬੇਦੀ ਨੂੰ ਵੀ ਪੁਲਸ ਨੇ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਲੈ ਲਿਆ ਸੀ।

ਪੰਜਾਬ ’ਚ ਵੀ ਅੰਨਾ ਦੇ ਹੱਕ ’ਚ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ

ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ,-ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਵਿਰੁੱਧ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਿੱਸਿਆਂ ’ਚ ਵੀ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕੀਤੇ ਗਏ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਨੂੰ ਲੋਕਤੰਤਰ ਵਿਰੋਧੀ ਕਰਾਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਨੇ ਇਥੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਦਾ ਵਿਰੋਧ ਕਰ ਰਹੇ ਸਿਵਲ ਸੁਸਾਇਟੀ ਦੇ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੇ ਕਈ ਥਾਈਂ ਆਵਾਜਾਈ ਨੂੰ ਠੱਪ ਕੀਤਾ। ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਿਸਿਆਂ ’ਚ ਬਾਰਿਸ਼ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਲੋਕ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਦੇ ਦੌਰਾਨ ਸੜਕਾਂ ’ਤੇ ਬੈਠ ਗਏ ਅਤੇ ਆਵਾਜਾਈ ਠੱਪ ਕੀਤੀ। ਸੈਕਟਰ 7 ਅਤੇ 8 ਵਿਚ ਐਨ. ਜੀ. ਓ. ਆਵਾਜ਼ ਦੇ ਵਰਕਰਾਂ ਨੇ ਯੂ. ਪੀ. ਏ. ਸਰਕਾਰ ਖਿਲਾਫ ਨਾਅਰੇ ਲਗਾਏ। ਕੇਂਦਰੀ ਮੰਤਰੀ ਕਪਿਲ ਸਿੱਬਲ ਦੀ ਸੈਕਟਰ 5 ਸਥਿਤ ਕੋਠੀ ਦਾ ਘਿਰਾਓ ਕਰਨ ਦੀ ਵੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ, ਪਰ ਪੁਲਸ ਦੀ ਚੌਕਸੀ ਕਾਰਨ ਉਹ ਸਫਲ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕੇ। ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਦੇ ਹਮਾਇਤੀਆਂ ਨੇ ਬੁੱਧਵਾਰ ਨੂੰ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਅੰਬਾਲਾ ਰੋਡ ’ਤੇ ਜਾਮ ਲਾਉਣ ਦਾ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਲੁਧਿਆਣਾ ’ਚ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਵਰਕਰਾਂ ਨੇ ਰਾਤ ਨੂੰ ਮੋਮਬੱਤੀ ਮਾਰਚ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਵਲੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੇ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਵਿਰੋਧੀ ਅੰਦੋਲਨ ਨੂੰ ਸਮਰਥਨ ਦਿੱਤਾ।
ਇਨ੍ਹਾਂ ਸੰਗਠਨਾਂ ਨੇ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਸ਼ਹੀਦ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਨਗਰ ਵਿਚ ਧਰਨਾ ਦਿੱਤਾ। ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਕਾਂਗਰਸ ਦੇ ਬੁਲਾਰੇ ਮਨੀਸ਼ ਤਿਵਾੜੀ ਦੇ ਘਰ ਦੇ ਲਾਗੇ ਵੀ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕੀਤਾ। ਪਟਿਆਲਾ ’ਚ ਮੁਜ਼ਾਹਾਰਾ ਕਰ ਰਹੇ 70 ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਲਿਆ ਗਿਆ।
ਕਿਰਨ ਬੇਦੀ ਨੇ ਜ਼ਮਾਨਤ ਤੋਂ ਕੀਤੀ ਨਾਂਹ
ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ : ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਨਾਲ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਲਈ ਗਈ ਸਾਬਕਾ ਆਈ. ਪੀ. ਐ¤ਸ. ਅਧਿਕਰਾਰੀ ਕਿਰਨ ਬੇਦੀ ਨੇ ਮੰਗਲਵਾਰ ਨੂੰ ਰਿਹਾਈ ਲਈ ਨਿੱਜੀ ਜ਼ਮਾਨਤ ਦੇਣ ਤੋਂ ਨਾਹ ਕਰ ਦਿੱਤੀ। ਕਿਰਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੈਨੂੰ ਜ਼ਮਾਨਤ ਲੈਣ ਨੂੰ ਕਿਹਾ ਗਿਆ ਪਰ ਮੈਂ ਇਸ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਮੈਨੂੰ ਨਿਆਂ ਹਿਰਾਸਤ ’ਚ ਤਿਹਾੜ ਜੇਲ ਭੇਜਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਰਾਜਘਾਟ ਤੋਂ ਹਿਰਾਸਤ ਵਿਚ ਲਿਆ ਗਿਆ ਸੀ। ਹਜ਼ਾਰੇ ਪੱਖ ਦੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਭੂਸ਼ਨ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਹਜ਼ਾਰੇ ਸਮੇਤ ਕੋਈ ਵੀ ਮੁੱਖ ਕਾਰਕੁੰਨ ਜ਼ਮਾਨਤ ਨਹੀਂ ਮੰਗੇਗਾ।
 

ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਮੀਡੀਏ ’ਚ ਛਾਏ ਅੰਨਾ

ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ : ਮਹਾਤਮਾ ਗਾਂਧੀ ਦੇ ਰਾਹ ’ਤੇ ਚੱਲਣ ਵਾਲੇ ਅੰਨਾ ਹਜ਼ਾਰੇ ਵੱਲ ਇਸ ਵੇਲੇ ਸਾਰੇ ਮੀਡੀਏ ਦੀਆਂ ਨਜ਼ਰਾਂ ਲੱਗੀਆਂ ਹਨ। ਮੰਗਲਵਾਰ ਦੀ ਸਵੇਰੇ ਅੰਨਾ ਦੀ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰੀ ਦੀ ਖਬਰ ਦੁਨੀਆ ਭਰ ’ਚ ਇੰਟਰਨੈ¤ਟ-ਮੀਡੀਆ ’ਚ ਸੁਰਖੀਆਂ ਨਾਲ ਨਸ਼ਰ ਹੋਈ। ਸਵੇਰੇ ਜਿਓਂ ਹੀ ਅੰਨਾ ਨੂੰ ਗ੍ਰਿਫਤਾਰ ਕੀਤਾ ਗਿਆ, ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸਮਾਚਾਰ ਵੈੱਬਸਾਈਟਾਂ ’ਤੇ ਇਹ ਖਬਰ ਪ੍ਰਮੁੱਖਤਾ ਨਾਲ ਨਸ਼ਰ ਕੀਤੀ ਗਈ। ਬੀ. ਬੀ. ਸੀ. , ਸੀ. ਐ¤ਨ. ਐ¤ਨ. ਨਿਊਜ਼ ਇੰਟਰਨੈਸ਼ਨਲ, ਵਾਲ ਸਟਰੀਟ ਜਨਰਲ, ਵਾਸ਼ਿੰਗਟਨ ਪੋਸਟ ਅਤੇ ਬਲੂਮਬਰਗ ਸਮੇਤ ਕਈ ਖਬਰਾਂ ਦੀਆਂ ਸਾਈਟਾਂ ’ਤੇ ਅੰਨਾ ਛਾ ਗਏ। ਹਰ ਥਾਂ ’ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅੰਦੋਲਨ ਦੀਆਂ ਖਬਰਾਂ ਹਨ।

Sunday, August 7, 2011

देवका का सूर्य मंदिर





   
EC.SBhatiphotosNew-FolderkalakarPicturelanga-002बाड़मेर   पुरातत्व विभाग ने राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के देवका गांव में स्थित बारहवीं शताब्दी के जीर्ण-शीर्ण ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के संरक्षण के लिए कार्ययोजना बनाई है। बाड़मेर-जैसलमेर मार्ग पर स्थित देवका का सूर्य मंदिर इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें शिव, कुबेर और विष्णु के मंदिर विद्यमान हैं। सूर्य पूजा के प्राचीन महत्व को दर्शानेवाले इस मंदिर के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग ने 2004 में लगभग चार लाख रुपए की राशि खर्च की थी। इससे मंदिर परिसर के चारों ओर चार दीवारी के निर्माण के साथ टूटी दीवारों की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन बजट की कमी के कारण संरक्षण का बाकी काम पूरा नहीं हो सका था। इस पूर्वाभिमुख शिखरवाले सूर्य मंदिर के भीतर गर्भगृह और आगे सभामंडप बना हुआ है। सभामंडप के उत्तर और दक्षिण में मकर तोरण हैं, जिनकी बनावट अत्यंत सुंदर है। सभामंडप के एक स्तम्भ पर संवत 1631 फाल्गुन सुदी 7 और बाईं ओर संवत 1674 के लेख उत्कीर्ण हैं।सूर्य मंदिर के शिखर पर छोटे-छोटे छिद्र हैं और इसे लघुपट्टिकाओं के जोड़ से बनाया गया है। शिखर के ऊपर गोलाकार पाषाण है, जिस पर रेखाएं अंकित हैं। इसके पीछे पश्चिम में परशुराम, उत्तर में कुबेर और दक्षिण में ब्रह्माजी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन मूर्तियों के पास कुछ और मूर्तियां भी हैं, जो जीर्ण-शीर्ण होने के कारण पहचान में नहीं आती हैं।मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटी देवकुलिकाएं अंकित हैं। इसके उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में दो देवलियां विद्यमान हैं। उत्तराभिमुखी देवली कुबेर की है, जिसके बाहरी भाग पर पूर्व में शिव-पार्वती, पश्चिम में ब्रह्मा और दक्षिणी भाग में सपत्नीक कुबेर की मूर्तियां बनी हैं। अग्रिम भाग में मूल देवली के प्रवेश द्वार पर कुबेर की लघु आकृतियां बनी हुई हैं। इसके सामने बनी शिव देवली के बाहरी भाग पर पूर्व में गणेश और दक्षिण में सूर्य की मूर्तियां हैं। मंदिर के पार्श्व भाग की पट्टी पर नवगृह और मध्यम में शिव की मूर्तियां विद्यमान हैं। टूटी-फूटी सीढिय़ों से नीचे उत्तर की ओर गोवर्धन स्तम्भ पर उमा, महेश, सूर्य, गणेश और गोवर्धन पर्वत धारा किए कृष्ण की मूर्तियां हैं।
         सूर्य मंदिर और विष्णु मंदिर आमने-सामने हैं। विष्णु मंदिर की प्रवेश द्वार पट्टिका पर ब्रह्मा, सूर्य, नवग्रहों, राहु-केतु और विष्णु की मूर्तियां बनी हुई हैं। परिक्रमा स्थल पर भी मूर्तियां बनी हैं, लेकिन उनकी आकृतियां अस्पष्ट हैं। समीप ही प्राचीन शिलालेख विद्यमान है, जो पुरातत्ववेत्ताओं के लिए खोज का विषय है।सूर्य मंदिर के चारों कोनों पर चार अप्रधान मंदिर पालीवालों ने बनवाए थे। इस मंदिर के परिसर में दो और मंदिर हैं, जिनमें एकल पत्थर पर बनी गणेशजी की मूर्तियां बहुत सुंदर लगती हैं।

नैना देवी के आये चाले, उमड़े भगत मतवाले




  
Mata_Naina_Devi_Jiचंडीगढ़    नव दुर्गा स्वरुप्नी 52 शक्ति पीठ वर दात्री माता नैना देवी जी के सावन भादों के चाले जोरों शोरों से जारी हैं। भगत सुभाष भास्कर के अनुसार माता नैना देवी के चाले भगतों के लिये नव जीवन स्फूर्ति दाई होते है। भगत मन्नतें मुरादें मांगते हैं और जिनकी मुरादें पूरी हुई होती हैं वह दंड वत प्रणाम करते हुए या गाजे बजे सहित माता नैना देवी के दरवार में हाजिरी भरते हैं। पंडित राजिन्द्र शर्मा मोहाली वाले बताते हैं कि इन चालों में जो चल कर भौण  पर पहुंचता है उसको कभी टांगों और हाथों में पीड़ा नहीं होती है। स्वस्थ जीवन जीता है। माता रानी दियां कन्याएं पूजने से लाखों पापों का नाश होता है घर में माता रानी का वास होता है। दुर्बलता दूर होती है और शक्ति का सामराज्य स्थापित होता है। सुभाष भास्कर हर वर्ष माता दे चाले साइकिल या पैदल करते हैं। उनका ब्राह्मण जत्था हर साल फेरा डालता है और अपने क्षेत्र और देश की सुख शांति की कामना करते है। घर में मेट के कीर्तन आयोजित किये जा रहे हैं। महिलाएं माता रानी के गुणगान करती सुनाई देती हैं। चारों और माता दे जयकारे सुनाई देते हैं। अनेकों परिवार कन्या पूजन आयोजित करते है। ये नारी महिमा के बखान के महीने है, जो माँ बहिन पुत्री और पत्नी के प्रति आपके कर्तव्य और नैतिक जबावदेही की याद दिलाते हैं। नैना देवी के मन्दिर में इन दिनों पंजाब से हजारों सिख आस्थावान जत्थों के रूप में चाले पुरे करते हैं। माता नैना देवी के सिवा पंजाब  जैसे प्रांत में जो कभी अजेय हिमाचल नरेश  के विशाल राज्य का भाग होता था में सिर्फ एक ही शक्ति पीठ है। इसी कारण नैना देवी माता मन्दिर और शक्ति स्वरुप्नी माता जी की पूजा और गुणगान पंजाबियों के घरों में हिन्दुओं जैसा होता है जो हमारी धार्मिक आस्था की कहानी कहता है और धार्मिक एकता का प्रतीक भी है।

वागड़ में कंकर कंकर है शिवशंकर



Shiv_Vagad_2शिव की उपासना संसार भर में विभिन्न रूपों में आदिकाल से प्रचलित रही है। सभी देवीद्ब्रदेवताओं में विशिष्ट होने से इन्हें महादेव के नाम से पूजा जाता है।
    देवाधिदेव महादेव की उपासना हमारे देश में सर्वत्रा व्याप्त है और शिवालयों की अनन्त श्रृंखला इसे प्रकट करती हैं। देश में कुछ पुण्य क्षेत्रा ऐसे हैं, जहां शिव उपासना प्राचीनकाल से अत्यधिक प्रचलित और चरम उत्कर्ष पर रही है। कैलाश पर्वत पर समाधि में डूबे एकांत प्रिय देवता शिव जैसा कोई देव नहीं। शिव ऐसे देवता हैं जो एकांत/निर्जन स्थान/पर्वतों, गुफाओं और कन्दराओं में निवास करते हैं।
    शिव को अपनी प्रकृति के अनुकूल जैसे राजस्थान, गुजरात और मालवा की लोक संस्कृतिShiv_Vagadयों और नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण पुण्य धरा वाग्वर प्रदेश रास आ गया है। यही कारण है कि इस अंचल में सर्वत्रा भगवान शिव के एक से बढ़ कर प्राचीन और अदभुत महत्व वाले मंदिर  विद्यमान हैं जो यहां शिव उपासना की प्राचीन परंपराओं का बोध कराते नहीं अघाते।
    यह समूचा इलाका कलद्ब्रकल बहती सरिताओं, प्राकृतिक सौंदर्य श्री से परिपूरित पहाड़ों, वनों और सर्पाकार बहती नहरों के कारण महत्वपूर्ण है। यहां हर ओर शिवालयों का उन्नत पताकाएं नभ में शिव उपासना की श्रेष्ठता का संदेश सुनाती प्रतीत होती हैं। इसकी स्पष्ट झलक वनवासी संस्कृति में दृष्टिगोचर होती है। जिस तरह शिव बाबा धूनी रमाये कैलाश पर्वत पर बिराजम्मान रहते हैं, ठीक उसी फक्कड़ शैली में वनवासियों के मस्त मौला जीवन की झांकी मिलती है। वनवासी को न कल की चिंता है न वे किसी भूत के पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होते हैं। वह तो प्रकृति के बीच रह कर दो जून की रोटी कमाकर ही संतोष में रह लेते हैं। अपने हाल में सदा मस्त रहने वालाShiv_Vagad_1 वनवासी औघड़दानी बाबा शिव की ही तरह अलमस्त हैं और वह शिव को ही ख़ास कर अपना उपास्य देव मानते आये  हैं। शिव की उदारता की परंपरा का वनवासी सच्चे शिव भक्त की तरह अनुकरण करता है।
    वागड़ अंचल में एक सिरे से लगाकर किसी भी सिरे तक चले जाएं, हर गांव, शहर, कस्बा आदि सब जगहों पर शिवालय बहुतायत में विद्यमान हैं वहीं शैव मतावलंबियों ने यहां शैव मत, तंत्रा साधना और शैव मूर्तिकला को अतीत में काफी उच्च स्तर तक पहुंचाया, जिसके कारण आज भी हर कहीं अभिषेक शिव मंत्रों और हरद्ब्रहर महादेव या जय महादेव की गंूज टापरे से लगाकर महलों तक शिवत्व का संदेश सुना रही है।
    शिव पूजा की व्यापकता और शिवालयो के बाहुल्य के कारण ही संसार में वाग्वर प्रदेश को लोढ़ी काशी के रूप में मान्यता मिली है। वाराणसी के बाद राजस्थान का यह दक्षिणांचल ही एक मात्रा ऐसा स्थल है, जहां शिव उपासना और शिवालय अति समृ रहे हैं। कंकर-कंकर में शंकर....इसे सही मायनों में वागड़ प्रदेश की सार्थक  कर रहा है। भगवान शिव की सर्वव्यापकता के बारे में कहा गया है:द्ब्र
पातालेचान्तरिक्षे दश दिशि गगनेShiv_Vagad_5
सप्त शैले समुद्रे, भस्मे काष्ठे च लोष्ठे क्षितिजल पवने
स्थावरे जंगमे वा बीजौ सर्वोषधीनां असुर सुरपति
पुष्पपत्रो तृणाग्रे एको व्यापी शिवोहं इति वदति हरि नास्ति देवो द्वितीय।
पुरातन काल से चली आ रही शैव परंपरा में यहां हजारों छोटे-बड़े शिवालय हैं और इनमें से हर बड़े शिवालय के पीछे रोचक किम्वदंती या चमत्कार छुपा हुआ है। यहां हर किस्म के शिवालय हैं। अरथुना और पाराहेड़ा के प्राचीन शिल्प एवं स्थापत्ययुक्त शिवालय कला की दृष्टि से बेजोड हैं तो हर शताब्दी में शिवालय निर्माण की श्रृंखला अनवरत जारी रही, जिसने इस वाग्वर प्रदेश को पूरी तरह शिवमय बना दिया है।
    वाग्वर प्रदेश में अवस्थित शिवालयों में से कई सारे मंदिरों में शिवलिंग किसी के द्वारा प्रतिष्ठापित न होकर स्वत:  प्रादूर्भुत अर्थात स्वयंभू शिवलिंग माने जाते हैं, स्वंयभू शिवलिंगों की उत्पत्ति के पीछे रोचक किम्वदंती है, जिसके अनुसारShiv_Vagad_3 यह गाय के थनों से दुग्धाभिषेक होते वक्त प्रकट हुए और बाद में लोगों ने पूजना आरंभ किया। यह शिवलिंग आदि शिवलिंग हैं जो विभिन्न कालखण्डों में भूमिगत होते रहे और फिर प्रकट होते हैं।
    वाग्वर प्रदेश का अरथुना प्राचीन सभ्यता का पुरातात्विक धाम है जहां का मण्डलेश्वर शिवालय बहुत प्राचीन है। इसका उत्कृष्ट कोटि का शिल्प और स्थापत्य देखने लायक हैं। दीवारों, खम्भों आदि पर सुंदर कारीगरी दृष्टिगोचर होती है। वहां के मंदिरों में लकुलीश संप्रदाय के चिह्न भी देखने को मिलते हैं। इसी तरह के शिवालय यहां कई हैं जो पुरातत्व की अनमोल धरोहर हैं।
    डूंगरपुर के पूर्वोत्तर में प्रावाहमान सोमन् नदी के मुहाने देव सोमनाथ का श्वेतप्रस्तर निर्मित तिमंजिला शिवालय कला का अनूठा उदाहरण है और पत्थरों पर टिका यह मंदिर हर दर्शनार्थी को विस्मय में डाल देता है। इस शिवालय को पूर्व में सोलहवीं शताब्दी में बहुत महत्व प्राप्त था, लेकिन कालांतर में समुचित देखरेख के अभाव में यह जीर्णद्ब्रशीर्ण होता गया। Shiv_Vagad_6
    बेणेश्वर का प्राचीन शिवालय माही, सोम और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम स्थल के बीच बने ऊंचे टापू पर अवस्थित हैं जो जनद्ब्रजन की भारी आस्था के कऌद्र के रूप में प्रख्यात हैं। इस मंदिर में प्राचीन शिवलिंग विद्यमान है।
    बांसवाडा शहर के पूर्वी छोर पर कागदी नदी के किनारे वनेश्वर शिवोपासकों की श्रद्धा का ख़ास केन्द्र रहा है जिसकी गिनती अति प्राचीन शिवालयों में की जाती है। वनेश्वर क्षेत्रा में वनेश्वर के अलावा नीलकण्ठ और धनेश्वर स्वयं भू शिवलिंग हैं, जिनकी उत्पत्ति दैवीय चमत्कारों से हुई है। देश में शायद ही कोई ऐसा स्थान हो जहां तीन स्वयं भू शिवलिंग हों, वनेश्वर शिवालय इस दृष्टि से बेमिसाल है। यहां बारहवीं शताब्दी का मंदिर था, बाद में सत्राहवीं शताब्दी में जीर्णोदार कर नया स्वरूप प्रदान किया गया। वनेश्वर क्षेत्रा एक मंदिर ही नहीं, बल्कि समूचा धर्म क्षेत्रा है, जहां की लंबे चौड़े परिक्षेत्रा में छोटे-बड़े मिलाकर कोई पचास से ज्यादा देव स्थानक हैं। यहां दो प्राचीन ध्यान स्तूप भी हैं। वनेश्वर जनास्था का भारी कऌद्र रहा है, जहां आने वाले हर भक्तजन की मनोकामना भगवान शिव अवश्य ही पूरी कर देते Shiv_Vagad_7हैं। इस मंदिर के शिवलिंगों और क्षेत्रा की अनेक विशेषताएं हैं। यहां जलाभिषेक करने पर शिवलिंग से संगीत का उत्फुटन, सारा का सारा पानी भूमि में समा जाना, विभिन्न रंगों के दिव्य सर्पों का होना, पास के प्राचीन स्नानागार का पानी का वर्ष में अनेक बार रंग बदलना आदि प्रमुख हैं।
    यहां पहले श्मशान घाट था, इस कारण इस क्षेत्रा में घूसते ही हर किसी को असीम आत्मतोष का अनुभव होता है। यहां रोजाना दर्शनार्थियों का जमघट लगा ही रहता है। वर्ष भर यहां धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज बनी रहती है। बांसवाड़ा शहर के त्रायम्बकेश्वर शिवालय को भी बड़ी ख्याति प्राप्त है और यह प्राचीन शिवालयों में गिना जाता है। यहां का शिवलिंग भूगर्भगृह में है व स्वयंभू है। इस मंदिर में काफी शीतलता है।
    मंदिर के बाहर स्थित मूर्तियां, खंभों आदि का शिल्प बेहद सुंदर है। इसका जीर्णोर पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास त्रायम्बक नामक ब्रह्मण द्वारा कराया गया।
    बड़ोदिया के निकट सुरम्य पर्वतीय आंचल में स्थित घोटिया आंबा जगप्रसि है, जहां पाण्डवों ने अपना वनवास बिताया और ऋषियों को भोजन कराया था। महाभारतकालीन युग से संबे घोटिया आंबा तीर्थ पर घोटेश्वर महादेव का पौराणिक एवं प्राचीन मंदिर है, जो एक पहाड़ी पर बना हुआ है। इसमें शिव पार्वती, नंदी के अलावा कुंती, द्रोपदी एवं पांच पाण्डवों की मूर्तियां स्थापित हैं।
    डूंगरपुर जिले के ठाकरडा गांव स्थित सिनाथ महादेव और बांसवाड़ा जिले के परतापुर कस्बे के निकट भगोरा में स्थापित भगोरेश्वर महादेव की ख्याति दूरद्ब्रदूर तक मनोकामनापूर्ति करने वाले देवता के रूप में है। दूरद्ब्रदूर से दर्शनार्थी यहां आकर मनौतियाँ लेते हैं। बांसवाड़ा शहर का भगोरेश्वर महादेव मंदिर जनास्था का धाम है। यहां के शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि इसकी उत्पत्ति भगौने में से हुई है।
    वागड़ क्षेत्रा के पाड़ी स्थित रामेश्वर पुत्रा देने वाले शिव के रूप में प्रसिे हैं। यहां हर ओर सैकड़ों शिवालय हैं, जिनमें सलाखडेश्वर, संगमेश्वर, जगमेश्वर,  क्षीरेश्वर, गवरेश्वर, मदारेश्वर, कपालेश्वर, ताम्बेश्वर, राज राजेश्वर, अंकलेश्वर, धोरेश्वर, नीलकण्ठ, गुप्तेश्वर, पातालेश्वर, मंगलेश्वर, गोकर्णेश्वर, पारसोलिया महादेव, वनाला या वख्तेश्वर, घंटालेश्वर, भैरवानन्देश्वर, अर्केश्वर, केदारेश्वर, गौतमेश्वर, मनकामेश्वर, मण्डलेश्वर आदि प्रमुख हैं।
    इस अंचल में बड़ेद्ब्रबड़े मेले शिवालयों पर ही लगते हैं। शिवरात्रि और श्रावस मास के दौरान तो वागड़ का चप्पा-चप्पा शिवमय हो उठता है और शिवालयों से जय शिव ओंकार...अथवा जय गंगाधर हर शिव... की आरतियों की गूंज रह रहकर वातावरण को दिव्य बनाती है। श्रावण मास में शिव अनुष्ठानों की धूम मची रहती है।
    शिव कल्याण करने वाले हैं और समूचा वागड़ अंचल अपने में शिवालयों को समाये सर्वत्रा शिव के कल्याण मूलमंत्रा का उपदेश देता दिखायी देता है।

रक्षा बंधन का आध्यात्मिक रहस्य

 भारत में जितने त्यौहार मनाए जाते हैं उनमें रक्षाबंधन सबसे अधिक पवित्र त्यौहार है, परंतु जिस अर्थ को लेकर त्यौहार शुरू हुआ था, आज उसमें काफी अंतर आ गया है। आज जो रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है उसमें प्राय: बहनें भाई को राखी बांधती हैं। लोग इसका यह अभिप्राय समझते हैं कि इस रस्म के बाद भाई-बहन की रक्षा करने के लिए बाध्य हो जाता है। परंतु हम इस बात पर विचार करेंगे कि क्या रक्षाबंधन का आदि स्वरूप और वास्तविक अभिप्राय यही था।


   
Photo_of_Barahmkumari_05_Aug_2011     क्या रक्षा बंधन शारीरिक रक्षा के लिए है : सोचने और विचार करने की बात है कि शारीरिक रक्षा ही रक्षा बंधन का अभिप्राया होता तो कन्याएं अपने छोटे-छोटे भाईयों को राखी क्यों बांधती? आज हम देखते हैं कि पंद्रह वर्ष की कन्या अपने चार वर्षीय भाई को राखी बांधती हैं। क्या चार वर्षीय बच्चा रक्षा करने में समर्थ है। पांच वर्ष की कन्या अपने दो वर्ष के भाई को राखी बांधती है यद्यपि दोनों को इस रहस्य का पता ही नहीं होता। न तो वे रक्षा करने में समर्थ हैं न ही इस प्रतिज्ञा को समझते हैं। यदि कन्या अपनी रक्षा ही करवाना चाहती हैं तो वह अपने पिता, चाचे, मामे को राखी क्यों नहीं बांधती जबकि वे रक्षा करने में समर्थ हैं।
     पूर्व काल में शैतान लोगों अथवा अत्याचारियों से नागरिकों की रक्षा करना तो राजा का कत्र्तव्य हुआ करता था राजा पूरा न्याय करता था और अपराधियों एवं अत्याचारियों को दंड देता था जिसके परिणाम स्वरूप उन दिनों अपराध बहुत कम होते थे। श्रीमद्भागवत में जिस कंस का वर्णन है उसने तो अपनी बहन देवकी को मारने के लिए तलवार उठा ली थी तो स्पष्ट है कि अगर दृष्टि-वृत्ति ठीक न रहे तो भाई भी कसाई बन जाता है। तब तो मानना पड़ेगा रक्षाबंधन का त्यौहार भाई द्वारा बहन की रक्षा के लिए नहीं था। बल्किे इसके पीछे कोई और रहस्य था।
     रक्षा बंधन का वास्तविक अभिप्राय : 'रक्षाबंधन' त्यौहार के अन्य जो नाम हैं। उनसे रक्षा बंधन का वास्तविक अर्थ स्पष्ट हो जाता है। उदहारण के तौर पर इस पर्व को 'पुण्य प्रदायक पर्व' भी कहते हैं अथवा 'विष तोड़क पर्व' भी कहा जाता है। इससे सिद्ध है इसका संबंध विषय विकारों को छोडऩे तथा पवित्र आत्मा या पुण्य आत्मा बनने से है।
     इस त्यौहार का यह अभिप्राय इस लिए भी हम सही मानते हैं क्योंकि बहनों के अतिरिक्त ब्राह्मण भी अपने यजमानों को राखी बांधते हैं। ब्राह्मण लोग धर्म कार्यों में ही हाथ डालते हैं और पवित्र कार्य करना ही उनके लिए नियम है। वे उस दिन राखी ही नहीं बांधते बल्कि मस्तक पर तिलक भी देते हैं। बहनें भी भाईयों के मस्तक पर चंदन या केसर के तिलक देती हैं। यह तिलक आत्मा को ज्ञान रंग में रंगने अथवा आत्मिक स्मृति में रहने का प्रतीक है। तो स्पष्ट है रक्षा बंधन पवित्रता रूपी धर्म में स्थित होने की प्रतिज्ञा करने एवं काम रूपी विष को तोडऩे का प्रतीक है।
     यों तो तार एक मामूली-सी चीज है, परंतु जब उस तार में बिजली होती है। तब वह तार बहुत काम करती है। एक फ्यूज की तार अपनी जगह से हटा दी जाए तो चलते हुए कारखानों में काम रुक जाता है। हजारों लोग बेकार खड़े हो जाते हैं और सड़कों पर अंधेरा हो जाता है, जिसके कारण अनेक दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
     अपने स्थान पर एक छोटी सी तार कितना बड़ा काम करती है। इस प्रकार राखी भी कुछ धागों की बनी होती है, परंतु उन धागों में जो भाव भरा हुआ होता है। वह भाव जीवन को बहुत ऊंचा बनाने वाला होता है। विचार से ही संसार में बड़े-बड़े परिवर्तन होते हैं। अत: राखी जिस विचार की प्रतीक है। राखी में जो भाव छिपा हुआ है वही मुख्य चीज है। उसे धारण करने के लिए प्रेरणा देना ही राखी की रस्म का मुख्य उद्देश्य है। उससे ही राखी की महिमा है। यदि उसे छोड़ दें तब तो राखी बस रुपये दो रुपये की चीज है।
     लोग जब कहते हैं। गांठ बांध लो तो उसका अभिप्राय यह होता है 'बुद्धि में रख लो' बुद्धि में इस बात को पक्की तरह धारण कर लो, परंतु स्मृति के लिए लोग अपने रूमाल या माताएं अपनी ओढऩी को गांठ बांध लेती हैं। ठीक इसी प्रकार मौली को कलाई पर बांधने का उद्देश्य है। पवित्रता रूपी व्रत को बुद्धि में धारण करना।
     रक्षा बंधन संदेश : आज मनुष्य काम और क्रोध रूपी शत्रुओं से बुरी तरह पीडि़त और आहत है। विकारों की अग्रि से सारी दुनिया झुलस रही है। अत: सृष्टि को इन विकारों रूपी शत्रुओं से बचाना है और यहां सुख-शांति स्थापित करना है। यह तब ही हो सकता है जब पहले मनुष्यात्माएं स्वयं को मन-वचन-कर्म और संबंध की पवित्रता से मधुर बंधन में बांधती हैं।
     जब हम स्वेच्छा से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को त्यागकर, संपूर्ण पवित्रता के बंधन को स्वीकार करते हैं, तब भगवान सभी नकारात्मक प्रभावों से हमारी सुरक्षा करते हैं और हमें सत्य और स्थायी सुख, शांति और दैवी प्रेम के अनुभव की प्राप्ति कराने का वचन देते हैं। परमपिता के बच्चे होने के नाते जब हम सर्व मनुष्यात्माओं से आध्यात्मिक भाईचारे के संबंध में पहचान कर लेते हैं, तो हमारी दृष्टि अपवित्रता, भेदभाव और उग्र स्वभाव से मुक्त हो जाती है। हम सर्व के प्रति पवित्र, सम्मानयुक्त, करूणामयी और कल्याणमूर्त वृत्ति विकसित कर सकते हैं।
     तो आइये इस पावन पर्व पर हम अपनी प्रतिज्ञा को दोहराएं कि हम जीवन में पवित्रता धारण करेंगे और विशेषत: पर्व के प्रति सहनशीलता, करूणा, प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना फैलाकर विश्व बंधुत्व की कड़ी को मजबूत करेंगे।
     मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि विश्व से नकारात्मकता के उन्मूलन के लिए प्रतिदिन प्रात: 5 मिनट का मौन धारण कर विश्व कल्याण के कार्य में सहयोग अवश्य प्रदान करें।

सुखना के गर्भ में दीपक हुआ गर्क

Chandigarh    यहां आत्महत्या का  प्रयास  ना करें। ऐसे सलोग्न सुखना झील में जब जहां पानी कम होता था वहां सुनने और कागजों में अक्सर पढने को मिलते रहते थे। वाक्य ही अब तो बोर्ड लगा देना चाहिए क्योंकि अब तो झील में पानी वाली घास के सिवा कुछ भी तो नहीं रहा। जल की रानी का अकाल देखा जा सकता है। जल मुर्गाबी भी देखने पर नही दिखाई देती है। सुखना झील के पानी का सुख प्रशासन की उदासीनता की बली चढ़ चूका है। पर युवा हैं कि जान देने के लिए अब भी सुखना में कूदना गनीमत समझते हैं, क्यों ये तो कोई नहीं बता सकता। सेक्टर 41 बी के मकान नम्बर 1216 के वासी वकील चंद गर्ग के पुत्र दीपक ने अज्ञात कारणों के चलते सुखना झील में बने  टावर पर चढ़ कर कूद कर जान दे दी। ये वाक्यात कथित तौर पर बुधवार का हैं, क्योंकि वीरवार को ई आर पी एफ़ के हवलदार पाण्डे ने युवा लाश को तकरीबन 4-30 बजे शाम को पानी पर तैरते देखी। लाश को बाहर निकाल कर ग्न्र्ल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाई। मौत का खबर लिखे जाने तक तो कोई कारण सामने नहीं आ सका। युवा मृतक दीपक आई टी पार्क में ड्यूटी करता था। बुधवार को वह घर ना सका था रात भर उसका मोबाइल की बेल बंद रही थी। झील के टावर से या झील में कूद कर आत्म हत्या करने का ये कोई पहला मौका नहीं है। अक्सर युवा अकेले या जोड़ों के रूप में आत्म हत्या के लिए गंदगी से भरी सुखना झील की गोद में समाते हैं। अभी तक की हिस्ट्री में तो सिर्फ कुछेक ही किस्मत वाले होंगे जिनकी जिन्दगी बची होगी।

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लाख करोड़ का सवाल है ...

लाख करोड़ का सवाल है ... भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है. या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है.हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे पढ़े ... और एक आन्दोलन बन जाये ..

73 की उम्र में भी कमसिन हसीना दिखाई देती हैं जेन



73 की उम्र में भी कमसिन हसीना दिखाई देती हैं जेन

 
  
 


उनकी उम्र भले ही 73 साल हो लेकिन वो आज भी किसी कम उम्र लड़की की तरह खुद को महसूस करती हैं। हम बात कर रहे हैं अभिनेत्री जेन फोंडा की।


हार्पर बाजार मैगजीन में प्रकाशित एक तस्वीर को देखकर तो ऐसा ही लगता है कि उम्र के इस पड़ाव में भी जेना किसी कमसिन लड़की की तरह फिट और सेक्सी हैं। इस तस्वीर में उन्होंने ब्लैक कलर की अर्धपारदर्शी ड्रेस पहनी हुई है।

इस उम्र में अपनी छरहरी काया के बारे में बताते हुए जेन कहती हैं कि मेरे हाथ पतले हैं इसलिए मुझे कपड़े पहनते हुए काफी ध्यान रखना पड़ता है कि वह मुझपर अच्छा भी लगेगा या नहीं।

जेन कहती हैं कि लोग अक्सर कहते हैं कि उनमें घमण्ड है और वो भी इस बात का समर्थन करती हैं कि वो घमण्डी हैं। अभिनेत्री जेन ने बताया कि उनकी कमजोरी मर्द हैं। मर्दों को खुश करना उनके लिए बहुत मुश्किल काम है।

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