Saturday, January 29, 2011

धर्मशाला के पास 1500 करोड़ की बेनामी संपत्तियां

धर्मशाला। धर्मशाला के पास सिद्धबाड़ी स्थित करमा कग्यू बौद्ध पंथ के 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के अस्थायी निवास स्थान ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय के कार्यालय में करोड़ों रुपए की देशी और विदेशी मुद्रा बरामद होने से कांगड़ा जिला में बौद्ध मठों के नाम पर बनाई जा रही बेनामी संपत्तियों के मामले का खुलासा हुआ है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बेनामी संपत्तियों के बढ़ते मामलों के चलते इस संबंध में केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने विदेशी धन के इस्तेमाल की आशंका जताई थी। सीआईडी ने धर्मशाला सहित आसपास के क्षेत्रों में 1500 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्तियों को चिह्न्ति कर सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी थी।

इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मैक्लोडगंज सहित जिला कांगड़ा के विभिन्न स्थानों पर बौद्ध मठों के नाम पर खरीदी जा रही बेनामी भू-संपत्तियों के मामलों पर अपनी जांच शुरू की थी। ईडी ने जिला कांगड़ा मुख्यालय धर्मशाला, मैक्लोडगंज, बीड़, गोपालपुर, कोटला सहित अन्य क्षेत्रों में निर्वासित तिब्बतियों की ओर से 5 बौद्ध मठों और संस्थानों के नामों पर खरीदी गई बेनामी संपत्तियों के मामले में जिला राजस्व विभाग से की गई कार्रवाई, भू-राजस्व रिकॉर्ड और मालिकों के नाम और अन्य जानकारियां मांगी थी।

चीन से अमेरिका तक तानाबाना
ईडी के अनुसार इन बेनामी संपत्तियों की खरीद में चीन से आए धन का इस्तेमाल किया गया है। एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत चीन यह राशि पहले बैंकॉक और बैंकॉक से इस धन को अमेरिका हस्तांतरित किया गया है। अमेरिका के माध्यम से इस राशि को भारत में लाया गया है। मैक्लोडगंज स्थित निगमापा सेंटर और डिप छोलिंग सेलुक्पा बौद्ध मठ, 17वें करमापा का अस्थायी निवास स्थान ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय सिद्धबाड़ी, मैक्लोडगंज स्थित जमयांग छोलिंग ननरी और घरोह स्थित शुगसप ननरी के भू मालिकों और इस पर खर्च किए गए धन और त्रिलोकपुर के पास टीएसआर बौद्ध मठ की भूमि के मामले में की गई जांच की रिपोर्ट भी ईडी ने मांगी थी। वीरवार को की गई छापेमारी इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

ढाई हजार कनाल के बेनामी सौदे
धर्मशाला क्षेत्र में लगभग ढाई हजार कनाल के लगभग भूमि बेनामी सौदों के माध्यम से विदेशी या फिर बाहरी उद्योगपतियों की ओर से खरीदी गई है। इन बेनामी संपत्तियों में जहां मात्र एग्रीमेंट्स के माध्यम से ही सैकड़ों कनाल भूमि का लेन-देन होता है, वहीं सरकार को स्टांप ड्यूटी का लाखों रुपए का नुकसान होने के साथ-साथ इस डील में इस्तेमाल किए गए करोड़ों रुपए के धन के न तो स्रोतों की जानकारी मिल पाती है और न ही इन पर किसी तरह का टैक्स देय होता है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुलप्रकाश के नाम पर धर्मशाला के आसपास खाता नंबर 368 में 660.65 वर्ग मीटर जबकि सिद्धपुर में 0.10.18 हैक्टेयर भूमि है। सिद्धपुर में किए जा रहे बौद्ध मठ के लिए भूमि सौदे में सिद्धपुर की भूमि के संबंध में ही एग्रीमेंट होने की संभावना बताई जा रही है।

ऊना में पकड़े युवक रिमांड पर
एक करोड़ की नगदी के साथ गिरफ्तार किए गए संयोग दत्त और आशुतोष को सीजेएम कोर्ट ने एक फरवरी तक रिमांड पर भेज दिया है। तिब्बती ट्र्स्ट प्रबंधक रावजी चौसांग को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

फेरा और फेमा के तहत दर्ज हो सकता है मामला
ग्यूतो तांत्रिक विश्वविद्यालय सिद्धबाड़ी स्थित करमापा के अस्थायी निवास स्थान के कार्यालय से करोड़ों रुपए की भारतीय के साथ विदेशी मुद्रा बरामदगी के बाद अब इस मामले में फारन एक्सचेंज मैनेजेंट एक्ट (फेमा) और फारन एक्सचेंज रेग्यूलेशन एक्ट (फेरा) की अवहेलना करने का मामला भी दर्ज हो सकता है। देश में विदेशी मुद्रा अधिनियम में विदेशी मुद्रा को लाने संबंधी नियम निर्धारित हैं, लेकिन इस मामले में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा मिलने के चलते पुलिस इस पर सीधे तौर पर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में अब फेरा और फेमा के तहत इस मामले में जांच की जाएगी। पांच जनवरी 2000 को धर्मशाला पहुंचे करमा कग्यू बौद्ध पंथ के 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे 28 दिसंबर 1999 को तिब्बत के तशुरफू बौद्ध मठ से अपने 5 अनुयायियों और बड़ी बहन नगदुप पेल्जोन सहित हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों की 1500 किलोमीटर पैदल यात्रा कर छिपते-छिपाते नेपाल होते हुए भारत पहुंचे थे, तब से लेकर वह मीडिया की सुर्खियां बने हुए हैं

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