Sunday, January 9, 2011

अपने घर की छत से ही उठाया गया खुशप्रीत

चंडीगढ़। खुशप्रीत को बुड़ैल में अपने घर की छत से ही उठा लिया गया था। घटना वाले दिन उसकी बुआ ने स्कूल की ड्रेस बदलने के लिए उसे पहली मंजिल पर बने घर में भेजा था। वह सीढ़ियां चढ़कर छत पर गया और फिर नीचे नहीं आया। उसके मकान की छत आसपास के मकानों की छतों से मिली हुई है और उनकी बाउंड्री सिर्फ दो फुट की है, जिसे आसानी से लांघा जा सकता है। ये तथ्य पुलिस में दर्ज एफआईआर से जांच में सामने आए हैं।
चंडीगढ़ पुलिस को दी शिकायत में खुशप्रीत के पिता लखवीर सिंह ने यह बात कही है कि स्कूल से एक बजे लौटने पर खुशप्रीत को उसकी बुआ हरजिंदर कौर ने वर्दी बदलने छत पर बने कमरे में भेजा था। उन्होंने इसमें कहा है कि उसके बेटे का अपहरण किसी जानकार ने ही किया है, क्योंकि खुशप्रीत इतना एक्टिव है कि किसी अजनबी के साथ नहीं जा सकता। खुशप्रीत की बुआ हरजिंदर कौर ने अमर उजाला को बताया कि घटना वाले दिन वह अपने भाई के छोटे बेटे के साथ खेल रही थी। वह नीचे मकान में उसके साथ थी। जब खुशप्रीत स्कूल से आया तो उसने उसे ड्रेस बदलने के लिए भेजा। वह भाई के बेटे के साथ नीचे ही रही, लेकिन खुशप्रीत नीचे नहीं आया। उसके अनुसार वह सोचती रही कि खुशप्रीत कमरे में ही होगा। जब खुशप्रीत का बड़ा भाई स्कूल से लौटा तो उसने उसके बारे में पूछा। जब हम छत पर बने कमरे में गए तो खुशप्रीत नहीं मिला।
एफआईआर में ओवरराइटिंग क्यों?
खुशप्रीत मामले में एफआईआर के आधार पर अपहरण का समय १ से २ बजे के बीच है। खुशप्रीत के पिता ने २१ दिसंबर की शाम ४ बजे पुलिस चौकी में खुशी के गायब होने की शिकायत दी थी। इसके बाद जैसे ही ४.२२ बजे फिरौती के लिए फोन आया तो तुरंत इसकी जानकारी भी पुलिस चौकी को दे दी गई।
४.४५ बजे डीडीआर सेक्टर-३४ थाने को ट्रांसफर कर दी गई, जो एफआईआर में बदल गई। पुलिस ने कंट्रोल रूम से ७ बजे अपहरण की कॉल भी चलाई, लेकिन एफआईआर में लापता और अपहरण होने की सूचना का समय रात १० बजे दर्ज किया गया है। उसमें भी ओवर राइटिंग की गई है। यहां सवाल उठता है पुलिस ने समय में हेरफेर क्यों किया? जनरल डायरी रेफ्रेंस में भी समय रात १० बजे का है। एफआईआर और जनरल डायरी रेफ्रेंस में समय पर कटिंग कर रखी गई है

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