Saturday, November 27, 2010

साकार होगा सस्ते आशियाने का सपना?



भोपाल पिछले दिनों महंगाई के चलते मकान खरीदने से रह गए या फिर खरीदने की तैयारी में लगे लोगों के लिए यह राहत देने वाली खबर है कि जल्द मकानों के दामों में गिरावट आ सकती है। होम लोन घोटाले के बाद तेजी से बदले बाजार के हालात ने रिएल एस्टेट कंपनियों के तेवरों को ढीला कर दिया है। जानकारों का मानना है कि घर खरीदने जा रहे लोगों को बाजार पर नजर रखते हुए थोड़ा इंतजार करना चाहिए, क्योंकि आसान लोन न मिलने के कारण बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा करने में दिक्कत आएगी।

मौजूदा वित्त वर्ष में शेयर बाजार में रिएल्टी फमोर्ं के प्रदर्शन को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इनके शेयर खरीदने में निवेशक ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। हालिया घोटाले के बाद रिएल्टी कंपनियों को कर्ज देने में बैंक ज्यादा सावधानी बरतेंगे।
कम से कम छह रिएल्टी कंपनियों को आईपीओ लाने के लिए सेबी से मंजूरी मिल चुकी है। ये कंपनियां आईपीओ से लगभग 10,000 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही हैं। इन कंपनियों के लिए ज्यादातर प्रस्तावित इश्यू का लक्ष्य कर्ज चुकाने के लिए पूंजी जुटाना है। मगर वर्तमान हालात में यह कठिन दिख रहा है।

भारी कर्ज चुकाना है

बैंकिंग उद्योग के अनुमान के अनुसार, रियल एस्टेट कंपनियों पर 75,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है। उद्योग के अनुसार, मौजूदा कारोबारी साल में रिएल्टी सेक्टर को निजी और सरकारी बैंकों के 25,000 करोड़ रुपए के कर्ज का भी भुगतान करना है।

बिल्डरों के विकल्प हुए कम

त्योहारों के सीजन में रियल एस्टेट कंपनियों ने मकानों के रेट बढ़ा दिए थे क्योंकि प्रोजेक्ट की फंडिंग करना आसान था और इस वजह से वे अपनी शतोर्ं पर मकान बेचती रहीं। लेकिन अब यह आसान नहीं होगा। क्योंकि बाजी पलट रही है इन कंपनियों को अपना कर्ज चुकाने और प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत है ऐसे में अपनी शर्तो को ढीला करने व दाम घटाने के अलावा इन कंपनियों के सामने कोई और विकल्प नहीं होगा।



होगी निगरानी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आदेश दिया है कि सभी सरकारी बैंक और संस्थाएं 50 करोड़ रुपए से अधिक के सरकारी लोन की समीक्षा करें। एक बड़े बैंकर के अनुसार मौजूदा जांच को देखते हुए बैंक रियल एस्टेट फमोर्ं को नया कर्ज देने में काफी सावधानी बरतेंगे। इससे वे प्राइवेट लोन पर निर्भर हो जाएंगे। रियल एस्टेट क्षेत्र में धन के अभाव से डेवलपर अपनी कीमतों को गिराने पर मजबूर होंगे। अगर धन के अभाव में प्रोजेक्ट रुकते हैं तो यह बिल्डरों के लिए आर्थिक रूप से महंगा साबित होगा।


हाउसिंग घोटाले के खुलासे के बाद बिल्डरों और डेवलपर्स को कर्ज मिलना आसान नहीं होगा । ऐसे में पुराना लोन चुकाने के लिए कर सकते हैं मकानों की कीमतें कम।


हाउसिंग लोन की राष्ट्रीय स्तर पर जांच से मध्य प्रदेश में रिएल स्टेट सेक्टर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि यहां ज्यादा बड़ा लोने लेने वालों की संख्या कम है।

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